ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।लाल क़िले से घोषित ‘शक्ति की सप्त धारा’ का पहला ठोस काम कल पूसा में शुरू होगा। और उसमें सबसे बड़ा नंबर लखपति दीदी का है — तीन करोड़ से छह करोड़।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल क़िले से ‘शक्ति की सप्त धारा’ की घोषणा की थी। कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान 18 अगस्त को नई दिल्ली के पूसा परिसर में अपने दोनों मंत्रालयों के अधिकारियों को इस पर संकल्प दिलाएँगे। इस बैठक में विभागों का रोडमैप तय होगा और लखपति दीदी योजना के विस्तार पर फ़ैसले लिए जाएँगे। कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान, लखपति दीदियाँ, कृषि निर्यातक और फ़ूड प्रोसेसर भी शामिल होंगे।
अब सीधी बात, जो घर तक पहुँचती है। अब तक तीन करोड़ ग्रामीण महिलाएँ लखपति दीदी बन चुकी हैं, और प्रधानमंत्री ने इसे छह करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य दिया है। यानी योजना को दोगुना करना है। यह काम स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण और वित्तीय मदद देकर होता है। बड़ी बात यह है कि केंद्रीय बजट में ‘शी-मार्ट्स’ जैसी पहल जोड़ी गई है, जिससे इन महिलाओं के बनाए सामान को बाज़ार मिले — योग, आयुर्वेद, हस्तशिल्प और ग्रामीण उत्पादों की पहुँच बढ़ाने के साथ।
यहीं से बनता है नंबर: स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएँ। लखपति दीदी योजना में अब तक तीन करोड़ महिलाएँ शामिल हो चुकी हैं, नया लक्ष्य छह करोड़ है।
तीन करोड़ से छह करोड़ का मतलब है योजना को दोगुना करना। और आज की रोज़गार रिपोर्ट बताती है कि गाँव की महिलाएँ काम के लिए तैयार खड़ी हैं।
एक नज़र में
• घोषणा: ‘शक्ति की सप्त धारा’, प्रधानमंत्री, लाल क़िला, 15 अगस्त 2026
• संकल्प कार्यक्रम: 18 अगस्त, पूसा परिसर, नई दिल्ली
• कौन कराएँगे: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान
• मंत्रालय: कृषि एवं किसान कल्याण, और ग्रामीण विकास
• अब तक लखपति दीदी: 3 करोड़ ग्रामीण महिलाएँ
• नया लक्ष्य: 6 करोड़
• तरीक़ा: स्वयं सहायता समूह, कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय मदद
• बाज़ार के लिए: बजट में ‘शी-मार्ट्स’ पहल
• सप्त धारा में शामिल: खेती का विस्तार, खाद्य प्रसंस्करण, वैश्विक बाज़ार तक पहुँच
• और: किसानों को रियायती दर पर खाद, खाद-ईंधन में आत्मनिर्भरता
• कार्यक्रम में: किसान, लखपति दीदियाँ, निर्यातक, फ़ूड प्रोसेसर
‘सप्त धारा’ में खेती से जुड़ी बातें भी हैं, और वे किसान के घर के हिसाब की हैं। खेती का विस्तार, खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा, और किसानों के सामान को वैश्विक बाज़ार तक पहुँचाना — ये तीन एक ही कड़ी हैं। कृषि और समुद्री उत्पादों के लिए नए बाज़ार खोलने की बात कही गई है। दुनिया में उलट-फेर के बीच किसानों को रियायती दरों पर खाद देते रहने की प्रतिबद्धता दोहराई गई है, और खाद तथा ईंधन जैसी बुनियादी ज़रूरतों में देश को आत्मनिर्भर रखने पर ज़ोर है।
आज की रोज़गार रिपोर्ट इस योजना के लिए एक अच्छी ख़बर लेकर आई है। जुलाई में गाँव की महिलाओं में काम करने वालों का अनुपात 34.7 से 37.2 प्रतिशत हो गया। यानी गाँव की महिलाएँ काम के लिए तैयार खड़ी हैं — ज़रूरत बस यह है कि वह काम खेत के मौसम पर निर्भर न रहे। लखपति दीदी और शी-मार्ट्स की असली कसौटी यही होगी: फ़सल कटने के बाद जब खेत का काम घटता है, तब समूह की महिला की कमाई चलती रहे। जो काम आगे करना है वह साफ़ है — समूहों को कच्चा माल, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और पक्के ख़रीदार से जोड़ना, ताकि आँकड़ा साल भर टिके।













