ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।देश में बेरोज़गारी दर घटकर 5.1 प्रतिशत रह गई। लेकिन आपके लिए असली बात यह है कि यह सुधार पूरा-पूरा गाँवों का है — और इसका सबसे बड़ा हिस्सा गाँव की महिलाओं का है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने आज शाम जुलाई 2026 का श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) मासिक बुलेटिन जारी किया। बड़ी बात यह है कि 15 साल और उससे ऊपर के लोगों में बेरोज़गारी दर जून के 5.5 प्रतिशत से घटकर जुलाई में 5.1 प्रतिशत रह गई। काम करने वालों का अनुपात 51.4 से बढ़कर 52.5 प्रतिशत हुआ — फरवरी 2026 के बाद यह पहली बढ़त है। और श्रम बल में शामिल लोगों का अनुपात 54.4 से 55.4 प्रतिशत हो गया।
अब वह हिस्सा, जो सुर्खियों में नहीं आता। गाँवों में बेरोज़गारी 5.0 से घटकर 4.5 प्रतिशत रह गई। शहरों में यह घटी ही नहीं — करीब 6.6 से 6.7 प्रतिशत हो गई। गाँवों में काम करने वालों का अनुपात 1.6 प्रतिशत अंक बढ़ा, शहरों में सिर्फ़ 0.2। यानी जुलाई की पूरी अच्छी ख़बर गाँव से आई है। शहरी नौकरी बाज़ार इस महीने जहाँ था, वहीं खड़ा रहा।
यहीं हुआ पूरा खेल: गाँवों में खेती और उससे जुड़ा काम। जुलाई 2026 में गाँव की महिलाओं में काम करने वालों का अनुपात एक ही महीने में 2.5 प्रतिशत अंक बढ़ा — पूरे बुलेटिन में इससे बड़ी हलचल कहीं नहीं है।
पूरे बुलेटिन में सबसे बड़ी छलांग गाँव की महिलाओं की है — एक महीने में 2.5 प्रतिशत अंक। बाक़ी कोई आँकड़ा इतना नहीं हिला।
एक नज़र में
• रिपोर्ट: पीएलएफएस मासिक बुलेटिन, जुलाई 2026 · एनएसओ / एमओएसपीआई, 17 अगस्त
• बेरोज़गारी दर (15+): जून 5.5% से जुलाई 5.1%
• गाँव: 5.0% से 4.5% · शहर: करीब 6.6% से 6.7%
• काम करने वालों का अनुपात: 51.4% से 52.5%
• गाँव में: 53.8% से 55.4% · शहर में: 46.8% से 47.0%
• गाँव की महिलाएँ (काम करने वालीं): 34.7% से 37.2%
• महिलाओं का श्रम बल में हिस्सा: 32.7% से 34.4%
• गाँव की महिलाओं का: 36.6% से 38.8%
• शहरी पुरुष बेरोज़गारी: 5.9%, पिछले साल जुलाई में 6.6% थी
• शहरी महिला बेरोज़गारी: 8.4% से बढ़कर 8.8%
• सर्वे में शामिल लोग: 3,71,021 — गाँव 2,11,411, शहर 1,59,610
गाँव के आँकड़े के अंदर वह नंबर है जो पूरे महीने की कहानी कहता है। गाँव की महिलाओं में काम करने वालों का अनुपात जून के 34.7 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 37.2 प्रतिशत हो गया — एक महीने में 2.5 प्रतिशत अंक की छलांग। पूरे बुलेटिन में कोई और आँकड़ा तीस दिन में इतना नहीं बढ़ा। श्रम बल में गाँव की महिलाओं का हिस्सा भी 36.6 से 38.8 प्रतिशत हो गया, जो पिछले साल जुलाई से 1.9 प्रतिशत अंक ऊपर है। वजह साफ़ है: जुलाई में बारिश ने साथ दिया, बुवाई ने रफ़्तार पकड़ी, और रोपाई-निराई का काम उन गाँवों तक पहुँचा जहाँ जून में नहीं पहुँचा था।
एक आँकड़ा उलटी दिशा में गया है, और उसे छिपाना ठीक नहीं। शहरों में महिलाओं की बेरोज़गारी जून के 8.4 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 8.8 प्रतिशत हो गई। दूसरी तरफ़ शहरी पुरुषों की बेरोज़गारी 5.9 प्रतिशत है, जो पिछले साल जुलाई की 6.6 प्रतिशत से 0.7 अंक कम है। सीधी बात यह है कि शहरों में पुरुषों को काम पहले मिल रहा है, महिलाओं को बाद में। इसका रास्ता भी पता है — घर के पास सुरक्षित आना-जाना, बच्चों की देखभाल का इंतज़ाम, और पार्ट-टाइम या लचीले वक़्त की पक्की नौकरियाँ। खेती का काम फ़सल कटने के बाद घट जाएगा; शहर का यह फ़र्क अपने-आप नहीं भरेगा। अगस्त के बुलेटिन में यही नंबर देखने लायक़ होगा।













