ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।संसद को विगत दिवस बताया गया कि नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) के तहत 70 हाइड्रोजन संचालित वाहनों को तैनात करने के लिए कुल 12 पायलट प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी गई है, जिसके लिए 410.77 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
लोकसभा में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने बताया कि इन प्रोजेक्ट्स में 27 बसें और 43 ट्रक शामिल हैं – जिनमें फ्यूल सेल इलेक्टि्रक वाहन (एफसीईवी) और हाइड्रोजन इंटरनल कंबशन इंजन (एच2-आईसीई) वाहन शामिल हैं – साथ ही अलग-अलग राज्यों में 21 रूटों पर 16 हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन (एचआरएस) भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स के लिए कुल आवंटित वित्तीय सहायता लगभग 410.77 करोड़ रुपये है, जिसमें से 41.582 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ये पायलट प्रोजेक्ट्स एनएचपीसी, एनटीपीसी, टाटा मोटर्स+ आईओसीएल, आर आईएल +एएल, एचपीसीएल+वोल्वो, एनटीपीसी-जीईएल जैसी निजी और सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा किए जा रहे हैं।
एक अलग जवाब में, नाइक ने यह भी कहा कि इस मिशन के तहत, उर्वरक निर्माण को ग्रीन अमोनिया की खपत के लिए एक संभावित क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है, और इसी के अनुसार, उर्वरक विभाग ने पूरे भारत में 13 उर्वरक इकाइयों को आपूर्ति के लिए प्रति वर्ष 7.24 लाख टन ग्रीन अमोनिया की मांग का आकलन किया है।
एनजीएचएम के तहत, ग्रीन अमोनिया उत्पादन के लिए प्रोत्साहन देने हेतु योजना के दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इस स्कीम के तहत, ग्रीन अमोनिया के प्रोडक्शन और सप्लाई के पहले साल में ₹8.82 प्रति किलोग्राम, दूसरे साल में ₹7.06 प्रति किलोग्राम और तीसरे साल में ₹5.30 प्रति किलोग्राम।














