आस्था भट्टाचार्य
चेन्नई। भारतीय एयरोस्पेस स्टार्टअप डी-प्रोपल्स ने इतिहास रचते हुए दुनिया के सबसे एडवांस मिसाइल इंजन का टेस्ट किया है। यह इंजन भारत के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह आईआईटी मद्रास की तरफ से इनक्यूबेटेड एक स्टार्टअप है जिसने अपने 5 केएन (किलोन्यूटन) एयर-ब्रीदिंग रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन (आरडीई) का एक सरकारी टेस्ट रिग डीआरडीओ फैसिलिटी में सफल परीक्षण पूरा किया है।
एयरोस्पेस कंपनी के फाउंडर और सीईओ सौरव झा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इंजन ने अब टीआरएल-5 लेवल को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। इसका मतलब है कि यह इंजन अब प्रयोगशाला के बुनियादी परीक्षणों से बाहर निकलकर वास्तविक प्रोटोटाइप के रूप में प्रमाणित हो चुका है और फिजिकल स्ट्रेस को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार है। ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
भारत का पहला ब्रीदिंग रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन
बहुत आसान शब्दों में समझें तो ये इंजन भविष्य का इंजन है। इसे सुपरसोनिक मिसाइलों से ज्यादा स्पीड वाली मिसाइलों में इस्तेमाल किया जाएगा। यानि ब्रह्मोस से ज्यादा रफ्तार वाली मिसाइलों में इसका इस्तेमाल हो सकता है।
कम हवा के प्रवाह में भी इस इंजन ने स्थिरता के साथ 5 केएन का दमदार थ्रस्ट पैदा किया है। यह थ्रस्ट एक छोटी क्रूज मिसाइल के इंजन के बराबर माना जाता है।
यह परफॉर्मेंस कम एयर मास फ्लो के साथ काम करने के बावजूद हासिल की गई जिससे पता चलता है कि आगे के टेस्ट कैंपेन में और ऑप्टिमाइजेशन से और भी ज़्यादा थ्रस्ट लेवल हासिल किए जा सकते हैं। यह उपलब्धि भारत के स्वदेशी प्रोपल्शन इकोसिस्टम के लिए खासकर अगली पीढ़ी के हाई-एफिशिएंसी इंजन के क्षेत्र में एक अहम कदम है।
यह तकनीक इतनी खास क्यों ?
दरअसल पारंपरिक जेट इंजन ईंन्धन को धीरे-धीरे जलाते हैं लेकिन आरडीई तकनीक में ईंन्धन को लगातार होने वाले सुपरसोनिक धमाकों के जरिए जलाया जाता है। इससे इंजन की थर्मल एफिशिएंसी यानि ऊर्जा क्षमता 25% या उससे ज्यादा बढ़ जाती है और इंजन में चलने वाले पुर्जे बहुत कम हो जाते हैं जिससे मैकेनिकल जटिलता खत्म होती है।
आम रॉकेट या मिसाइल इंजन के नोजल घंटी के आकार के होते हैं जो सिर्फ एक निश्चित ऊंचाई पर ही बेस्ट परफॉर्मेंस देते हैं। इसके विपरीत एयरोस्पाइक नोजल हवा के दबाव के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर लेता है जिससे यह कम ऊंचाई से लेकर अंतरिक्ष की गहराइयों तक एक समान और बेहतरीन थ्रस्ट देता है। इस तकनीक का इस्तेमाल भविष्य की मिसाइलों, अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी), हाई-स्पीड एयरक्राफ्ट और एडवांस्ड प्रोपल्शन सिस्टम के लिए हो सकता है।
अभी कई चरण में और टेस्ट होना बाकी
टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल-5 (टीआरएल-5) का आम तौर पर मतलब होता है कि जरूरी टेक्नोलॉजी को असल कामकाजी हालात जैसे माहौल में इंटीग्रेट और टेस्ट किया गया है लेकिन असल इस्तेमाल के लिए अभी और डेवलपमेंट एंड्योरेंस टेस्टिंग और परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने की जरूरत होगी। इस स्टेज तक पहुंचने का मतलब है कि टेक्नोलॉजी का जोखिम काफी कम हो जाता है।
रोटेटिंग डेटोनेशन इंजन जैसी एडवांस्ड प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी दुनिया भर में ज्यादा ध्यान खींच रही हैं क्योंकि देश तेज रफ्तार उड़ान और कॉम्पैक्ट प्रोपल्शन सिस्टम के लिए ज्यादा कुशल विकल्प तलाश रहे हैं। सफल स्वदेशी डेवलपमेंट से भारत को उस क्षेत्र में महारत हासिल होगी जिस पर अभी कुछ ही देश और रिसर्च कर रहे हैं।
टीआरएल-5 तक पहुंचना
एक एडवांस्ड प्रोपल्शन कॉन्सेप्ट को प्रैक्टिकल इंजीनियरिंग सिस्टम में बदलने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। सरकारी सुविधा में सफल टेस्ट इंजन के डिजाइन के अहम पहलुओं को वेरिफाई करता है और अत्याधुनिक एयरोस्पेस प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी विकसित करने में कंपनी की बढ़ती क्षमताओं को दिखाता है। जैसे-जैसे प्रोग्राम टेक्नोलॉजी की परिपक्वता के उच्च स्तर की ओर बढ़ेगा और टेस्टिंग व परफॉर्मेंस में सुधार की उम्मीद है।
एयरोस्पेस और डिफेंस में इसका उपयोग
हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलें: यह इंजन क्रूज मिसाइलों की स्पीड, रेंज और मारक क्षमता को काफी बढ़ा सकता है।
हाई-स्पीड लड़ाकू ड्रोन: भविष्य के तेज गति से उड़ने वाले ऑटोनॉमस मिलिट्री ड्रोन्स को यह आसानी से पावर दे सकता है।
अंतरिक्ष यान और स्पेसक्राफ्ट: कम ईंन्धन खपत के कारण इसे पुन: उपयोग किए जाने वाले स्पेस लॉन्च व्हीकल्स में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
डी-प्रोपल्स कंपनी के बारे में जानिए
इस एयरोस्पेस स्टार्टअप की स्थापना जुलाई 2025 में हुई थी और इसके पीछे भारत के दिग्गज रक्षा विशेषज्ञ और वैज्ञानिक शामिल हैं।
सौरभ झा इसके को-फाउंडर और सीईओ हैं जो पहले एक जाने-माने डिफेंस जर्नलिस्ट और थिंक-टैंक ‘दिल्ली डिफेंस रिव्यू’ के संस्थापक रह चुके हैं।
डॉ. वी. रामानुजाचारी कंपनी के सीटीओ हैं जो डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक रह चुके हैं और उन्होंने भारत के स्क्रैमजेट इंजन प्रोग्राम और आकाश मिसाइल के प्रणोदन सिस्टम पर काम किया है।
डॉ. वी.के. सारस्वत भी इस कंपनी के साथ हैं जो पूर्व डीआरडीओ प्रमुख और नीति आयोग के सदस्य रह चुके हैं और इस कंपनी के मुख्य मेंटर हैं।













