ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।सरकार ने संसद में एक आकलन रखा है जो किसान क्रेडिट कार्ड को लेकर सबसे बड़ा सवाल सीधे-सीधे उठाता है: ब्याज में जो छूट सरकार देती है, उससे खेती को मिलता कितना है? जवाब — हर ₹1 पर ₹2.30।
यह आकलन बेंगलुरु के इंस्टिट्यूट फ़ॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज ने किया है, यानी किसी मंत्रालय ने अपना काम खुद नहीं जांचा। पर इस रिपोर्ट में असली दिलचस्प बात यह नहीं कि आंकड़ा क्या है। दिलचस्प बात यह है कि वह ₹2.30 आया कहां से। फ़सल से उतना नहीं — ज़्यादातर फ़ायदा डेयरी, पशुपालन और अंदरूनी मछलीपालन से आया। यानी जिस कार्ड को सब “खेती का कर्ज़” समझते हैं, वह असल में गांव के उस हिस्से में सबसे ज़्यादा काम कर रहा है जो फ़सल के मौसम पर निर्भर नहीं है।
फ़सल से आगे: आकलन कहता है कि केसीसी का सबसे बड़ा असर डेयरी, पशुपालन और मछलीपालन पर दिखा — यानी उस कमाई पर जो हर महीने आती है, साल में दो बार नहीं।
जिस घर की कमाई सिर्फ़ फ़सल पर टिकी है, वहां एक ख़राब मौसम पूरा साल ले जाता है। जिस घर में दो भैंस भी हैं, वहां दूध हर सुबह बिकता है।
एक नज़र में
• आकलन: इंस्टिट्यूट फ़ॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज, बेंगलुरु द्वारा तीसरे पक्ष का मूल्यांकन
• नतीजा: केसीसी संशोधित ब्याज सहायता योजना पर खर्च हर ₹1 से कृषि व संबद्ध क्षेत्र में ₹2.30 का शुद्ध मूल्यवर्धन
• सबसे ज़्यादा असर: डेयरी, पशुपालन और अंदरूनी मछलीपालन — ख़ासकर पूर्वोत्तर में कार्यशील पूंजी की ज़रूरत पर
• बिना गारंटी कर्ज़ की सीमा: 1 जनवरी 2025 से ₹1.6 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख
• डिजिटल रास्ते: किसान ऋण पोर्टल, जन समर्थ पोर्टल, ई-केसीसी और कृषिका
• जवाब कहां रखा गया: लोकसभा में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी के लिखित उत्तर में
अब यह आपके लिए क्यों मायने रखता है। केसीसी सिर्फ़ फ़सल के लिए नहीं है — यही बात सबसे ज़्यादा लोगों को नहीं पता। इसी कार्ड से पशुपालन और मछलीपालन के लिए भी कार्यशील पूंजी मिलती है, और जिस परिवार के पास ज़मीन कम है पर दो-चार मवेशी हैं, उसके लिए यह अक्सर सबसे सस्ता कर्ज़ होता है जो उसे मिल सकता है। दूसरी बात रकम की है: बिना किसी गारंटी के मिलने वाला कर्ज़ जनवरी 2025 से ₹1.6 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दिया गया है। यह छोटा बदलाव नहीं है — गारंटी की मांग ही वह जगह है जहां छोटा किसान बैंक की खिड़की से लौटता है।
चुनौती अब भी बाकी है और उसे मानना चाहिए। कार्ड बन जाना और कार्ड चलना दो अलग बातें हैं — कई किसानों के पास कार्ड है पर सीमा नवीनीकरण अटका रहता है, और नवीनीकरण अटकने पर ब्याज छूट का फ़ायदा भी अटक जाता है। इसी को आसान करने के लिए किसान ऋण पोर्टल, जन समर्थ, ई-केसीसी और कृषिका जैसे डिजिटल रास्ते बनाए गए हैं, ताकि आवेदन और नवीनीकरण शाखा के चक्कर पर निर्भर न रहे। आपके लिए इस हफ़्ते का काम बस इतना है: अपने कार्ड की सीमा और नवीनीकरण की तारीख़ शाखा से एक बार पूछ लीजिए, और अगर घर में दुधारू पशु हैं तो यह भी पूछिए कि उसके लिए सीमा जुड़ सकती है या नहीं। जवाब अक्सर हां होता है, बस कोई पूछता नहीं।














