• Latest
  • Trending
export

बारह दिन शुल्क-मुक्त: भारत–ब्रिटेन समझौते ने ज़मीन पर क्या बदला

July 27, 2026
daily-news

कोयला खदानों से डेटा सेंटर तक: भारत की बड़ी आर्थिक और तकनीकी खबरें

September 14, 2026
brics

भारत की बड़ी खबरें: एशिया कप, धीरज बोम्मादेवरा, हिंदी दिवस और G20-ब्रिक्स

September 14, 2026
ब्रिक्स सम्मेलन: भारत को क्या मिला?

ब्रिक्स सम्मेलन: भारत को क्या मिला?

September 13, 2026
मोदी-शी मुलाकात और ब्रिक्स सम्मेलन का दूसरा दिन

मोदी-शी मुलाकात और ब्रिक्स सम्मेलन का दूसरा दिन

September 13, 2026
ब्रिक्स सुधार, ओडिशा में 11.5 अरब डॉलर निवेश, भारतीय वाणिज्य दूतावास, हॉकी, बद्री नस्ल और बांस की बड़ी खबरें।

ब्रिक्स से ओडिशा निवेश तक भारत की बड़ी खबरें

September 12, 2026
भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत मंडपम में शुरू, भारत चौथी बार अध्यक्ष

September 12, 2026
daily-news

भारत में ब्रिक्स बैठक: व्यापार, UPI, डिजिटल मजदूर चौक और आर्थिक सुधार

September 11, 2026
daily-news

भारत की बड़ी खबरें: LPG नियम, मत्स्य योजना, BRICS, AI, सुधार और ग्रीन मिशन

September 10, 2026
daily-news

भारत की बड़ी खबरें: रेलवे, UPI, कौशल, तकनीक और हरित विकास में बड़े फैसले

September 10, 2026
भारत की 7.8% जीडीपी ग्रोथ

‘झूठ की गूंज वाले निराशा फैलाने में लगे हैं’

September 7, 2026
पीएम मोदी पुतिन मुलाकात SCO शिखर सम्मेलन

पीएम मोदी का विदेश दौरा और एससीओ शिखर सम्मेलन का संदेश… भारत विश्व-मित्र महाशक्ति

September 7, 2026
भारत-उज्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

भारत का बढ़ा रुतबा

September 7, 2026
Thursday, September 17, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

बारह दिन शुल्क-मुक्त: भारत–ब्रिटेन समझौते ने ज़मीन पर क्या बदला

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 27, 2026
in the blitz
0
export

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।समझौता कमरे में होता है, इम्तिहान गोदाम में। भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया, और बीते बारह दिन पहली बार ऐसे हैं जब इसकी शर्तें असली माल से टकराई हैं। समझौते के तहत भारत का क़रीब 99 फ़ीसदी सामान ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त या कम शुल्क पर जाएगा, और ब्रिटेन का लगभग 90 फ़ीसदी सामान भारत में। लक्ष्य है दोनों देशों का कारोबार 2025-26 के क़रीब 58 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक लगभग 115 अरब डॉलर तक ले जाना।

असल बात यह है कि फ़ायदा किस तरफ़ जाता है। भारत की तरफ़ सबसे ज़्यादा लाभ उन क्षेत्रों को है जहां हाथ का काम ज़्यादा है — कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट, जूते-चप्पल, कालीन, प्रसंस्कृत खाद्य और इंजीनियरिंग सामान। इन धंधों में शुल्क कोई किताबी शब्द नहीं होता; अक्सर वही तय करता है कि ऑर्डर मिलेगा या हाथ से निकल जाएगा। अनुमान है कि इससे सात से दस लाख नए रोज़गार के मौक़े बन सकते हैं। ब्रिटेन की तरफ़ से हिसाब यह है कि उसके निर्यातकों को शुरू में सालाना 40 करोड़ पाउंड तक और दस साल बाद क़रीब 90 करोड़ पाउंड तक की शुल्क बचत होगी।

YOU MAY ALSO LIKE

कोयला खदानों से डेटा सेंटर तक: भारत की बड़ी आर्थिक और तकनीकी खबरें

भारत की बड़ी खबरें: एशिया कप, धीरज बोम्मादेवरा, हिंदी दिवस और G20-ब्रिक्स

शुल्क हटा, काग़ज़ बाक़ी: 15 जुलाई से लागू समझौते के बाद भारत का क़रीब 99% निर्यात ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त है। अब असली सवाल यह है कि छोटे निर्यातक काग़ज़ी शर्तें कितनी जल्दी समझ पाते हैं।

शुल्क हटाना आसान हिस्सा था। मुश्किल हिस्सा यह है कि तिरुपुर का छोटा निर्यातक वह प्रमाणपत्र बनाना सीखे, जो काग़ज़ की छूट को बैंक खाते के पैसे में बदलता है।

एक नज़र में

• लागू: 15 जुलाई 2026 (हस्ताक्षर जुलाई 2025)
• दायरा: भारत का ~99% निर्यात ब्रिटेन में, ब्रिटेन का ~90% सामान भारत में
• लक्ष्य: कारोबार ~58 अरब डॉलर से ~115 अरब डॉलर (2030 तक)
• रोज़गार: 7–10 लाख नए मौक़ों का अनुमान

असली चुनौती हस्ताक्षर के बाद शुरू होती है। शुल्क-मुक्त पहुंच एक इजाज़त है, बिक्री नहीं। इसका फ़ायदा उठाने के लिए निर्यातक को मूल-देश (रूल्स ऑफ़ ओरिजिन) की शर्तें पूरी करनी होंगी, सही प्रमाणपत्र लेने होंगे, ब्रिटेन के लेबल और सुरक्षा मानक निभाने होंगे। बड़ी कंपनियों में इसके लिए पूरा विभाग होता है। तिरुपुर की गारमेंट इकाई, कानपुर की चमड़ा कार्यशाला या नासिक का खाद्य प्रसंस्करण संयंत्र — यानी जिनके लिए यह समझौता सबसे ज़्यादा मायने रखता है — उनके पास अक्सर नहीं होता।

यह हल हो सकने वाली दिक़्क़त है और अगले कुछ महीनों की मेहनत यहीं लगनी चाहिए। निर्यात संवर्धन परिषदें और उद्योग संगठन सरल हिंदी और स्थानीय भाषाओं में नियमों की पुस्तिकाएं दें, क्लस्टर स्तर पर साझा जांच और प्रमाणन सुविधाएं बनें, काग़ज़ी काम डिजिटल हो ताकि बिचौलिये की लागत घटे, और पहली बार निर्यात करने वालों के लिए छोटे आकार का व्यापार-वित्त उपलब्ध हो। भारत यह काम इलेक्ट्रॉनिक्स और दवा उद्योग में पहले कर चुका है और नतीजे कुछ ही साल में आंकड़ों में दिखे थे। अगर यही मदद अब छोटे कारख़ानों तक पहुंचे, तो यह समझौता सिर्फ़ व्यापार का आंकड़ा नहीं बढ़ाएगा — उन क़स्बों में मज़दूरी बढ़ाएगा जिनकी चर्चा व्यापार नीति में कम ही होती है।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation