ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने हाल ही में पूर्वी कमान के तहत आने वाले प्रमुख सैन्य ठिकानों का दौरा किया, जिनमें बेंगडुबी सैन्य थाना भी शामिल है। यह थाना रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के लिए सबसे जरूरी सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक)के उत्तरी प्रवेश द्वारा पर स्थित है।
नेपाल और बांग्लादेश को अलग करने वाला हिस्सा 20 किलोमीटर से भी कम चौड़ा है। यह कॉरिडोर नेशनल सिक्योरिटी के लिए खास महत्व रखता है क्योंकि यह नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाला एकमात्र रोड और रेल लिंक है।
असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्कि म और त्रिपुरा को मुख्य भूमि से जोड़ने वाले इस जरूरी जमीनी पुल को सुरक्षित करने के लिए, सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने में लगी हुई है।
रेलवे ने हाल ही में 35 किलोमीटर लंबी भूमिगत लाइन की योजना की घोषणा की है, जिसे संघर्ष या तोड़फोड़ के दौरान सैन्य और नागरिक आपूर्ति की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के सात महत्वपूर्ण भागों को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएई) और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम (एनएचआईडीसीएल) जैसी केंद्रीय एजेंसियों को इसके विस्तार के लिए सौंप दिया है। निगरानी बढ़ाने और सैनिकों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 120 एकड़ से ज्यादा जमीन बीएसएफ ( सीमा सुरक्षा बल ) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को ट्रांसफर कर दी गई है।
बागडोगरा हवाई अड्डा और हासिमारा वायुसेना स्टेशन इस क्षेत्र की रसद और रक्षा को काफी मजबूती प्रदान करते हैं। विशेष रूप से, हासिमारा में भारतीय वायु सेना का 101 स्क्वाड्रन स्थित है, जो देश के दो परिचालनशील राफेल स्क्वाड्रनों में से एक है। इस दौरे के दौरान, सेना प्रमुख (सीओएएस) को पूर्वी कमान के परिचालन क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थितियों, परिचालन तैनाती और निगरानी व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
जनरल सेठ ने टेक्नोलॉजी को अपनाने, क्षमता निर्माण और सेना के आधुनिकीकरण से जुड़ी चल रही पहलों की भी समीक्षा की। इसी दौरे के तहत, सेना प्रमुख ने नगालैंड स्थित 3 कोर (स्पीयर कोर) का दौरा किया, जहां उन्हें विकसित हो रहे ऑपरेशनल माहौल को बेहतर बनाने, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल और लड़ाई के लिए तैयारी से जुड़े मौजूदा उपायों के बारे में जानकारी दी गई।
इस बातचीत के दौरान, जनरल सेठ ने ‘विजय’ जैसे एक्रोनिम के जरिए अपना विजन साझा किया। जिसका मतलब है सतर्कता, इनोवेशन, जॉइंटनेस (संयुक्तता), आत्मनिर्भरता और वॉरियर-सेंट्रिसिटी।











