ब्लिट्ज ब्यूरो
नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दावा किया है कि दुनिया के पांच महाद्वीपों से लोग संघ के कामकाज को देखने आ रहे हैं और वे चाहते हैं कि आरएसएस के स्वयंसेवक उनके देशों में जाकर लोगों को ट्रेनिंग दें।
नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि विदेशों से समय-समय पर लोग संघ का कार्य देखने आते हैं। वे यह जानना चाहते हैं कि संघ किस तरह समाज के लिए समर्पित स्वयंसेवक तैयार करता है और अपने देशों में भी ऐसे कार्यकर्ताओं को तैयार करने के लिए संघ की मदद चाहते हैं।
यह कार्यक्रम ‘डॉ. हेडगेवार: आधुनिक युग के शालीवाहन’ के सार्वजनिक प्रसारण के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस दौरान आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संघ प्रचारकों के जीवन पर आधारित 100 वीडियो भी जारी किए गए।
उन्होंने कहा कि समाज में धीरे-धीरे संघ की स्वीकार्यता और सम्मान बढ़ रहा है। शुरुआती वर्षों में संगठन को जिस तरह की उपेक्षा और बेरुखी का सामना करना पड़ा था, वह अब काफी हद तक समाप्त हो रही है।
प्रमुख ने कहा कि संघ की पहली प्राथमिकता ऐसे लोगों को तैयार करना है, जो समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में सेवा का काम कर सकें। उन्होंने उस धारणा को भी खारिज किया कि संघ विभिन्न संगठनों को दूर से नियंत्रित करता है। भागवत ने कहा कि संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार ने अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए महसूस किया था कि सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित और प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता होती है।
भागवत ने आरएसएस शाखा को संगठन के जीवन जीने के तरीके की प्रयोगशाला बताया। उन्होंने कहा कि शाखा में स्वयंसेवक हर परिस्थिति में अनुशासन, सेवा और संगठन के मूल्यों के साथ जीवन जीना सीखते हैं।
उन्होंने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को एकजुट करना है। डॉ. हेडगेवार ने केवल उपदेश नहीं दिए, बल्कि अपने जीवन से उदाहरण प्रस्तुत कर संगठन के प्रति समर्पण का मार्ग दिखाया।












