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नीट को जेईई की तरह डबल टियर परीक्षा बनाने की जरूरत

एक्सपर्ट्स ने दी सलाह, बड़े बदलाव की जरूरत

by ब्लिट्ज़ इंडिया
June 2, 2026
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। विशेषज्ञों ने नीट यूजी परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की जरूरत बताई है और इसे जेईई की तरह डबल-टियर बनाने का सुझाव दिया है। 23–24 लाख छात्रों और सीमित सीटों के बीच मौजूदा सिंगल-स्टेज सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं, साथ ही पेपर लीक चिंता का विषय है। आइए जानें एक्सपर्ट्स ने क्या सलाह दी है।

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) पेपर लीक और देशभर में प्रदर्शन के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने दोबारा एग्जाम की डेट घोषित कर दी है। इस दौरान देश में प्री-मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा के सिस्टम पर भी बड़े सवाल खड़े हुए हैं। कुछ साल से नीट की गड़बड़ियों के बाद बड़ा सवाल यह भी है कि क्या डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए 23-24 लाख स्टूडेंट्स में से देशभर के मेडिकल कॉलेजों की करीब एक लाख सीटों के लिए स्टूडेंट्स को चुनने का तरीका सही है?

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अगले साल से नीट एग्जाम ऑनलाइन होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझने की जरूरत है कि नीट स्कैम क्यों हो रहे हैं और इसी आधार पर नीट की परीक्षा में तुरंत बदलाव की जरूरत है, इसे सिंगल टियर से डबल टियर में लाने और इसके प्रश्नों के पैटर्न में भी बदलाव लाने की जरूरत है।
‘नीट के 2 चरण और एप्टिट्यूड चेक करना भी जरूरी’

नीट का एग्जाम पहले सीबीएसई ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट के नाम से करवाता था। सीबीएस के पूर्व डायरेक्टर अशोक गांगुली कहते हैं कि नीट सिंगल टियर परीक्षा है, जिसे बदलने की जरूरत है। जिन एग्जामिनेशन में 10 लाख से ऊपर बच्चे बैठते हैं, उसे सिंगल टियर की बजाय डबल टियर करना चाहिए, जो कि पहले एआईपीएमटी में होता भी था। इंजीनियरिंग दाखिले के लिए भी जेईई दो एग्जाम जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड में बंटा हुआ है।

अभी जरूरत है कि नीट का पहला चरण एमसीक्यू (मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन) आधारित एग्जाम हो। इसे सभी स्टूडेंट्स दें। इनमें से कुछ लाख चुने जाएं, जो दूसरे चरण का एग्जाम दें जिसमें स्टूडेंट्स को लिखना पड़े ताकि उनका एप्टिट्यूड पता चले जो एक डॉक्टर बनने के लिए होना चाहिए।

’23-24 लाख स्टूडेंट्स देते हैं एग्जाम, पर सीटें काफी कम हैं
साइकोग्राफिक सोसायटी के करियर काउंसलर विकास कुमार कहते हैं कि इस बार नीट को कैंसल करना सही कदम है। हालांकि, समझने की जरूरत है कि नीट स्कैम क्यों हो रहे हैं।

23-24 लाख स्टूडेंट्स एग्जाम में बैठते हैं, मगर सीटें काफी कम हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेज में 6-8 हजार रुपये फीस सालाना है तो प्राइवेट कॉलेजों में 15-20 लाख सालाना देनी पड़ रही है। पेपर लीक इसलिए होता है ताकि सरकारी सीट मिल जाए।

इस एंट्रेंस सिस्टम को ठीक करने के लिए डिस्ट्रिक्ट हेडक्वॉटर्स में टेस्ट सेंटर्स बहुत कम करने चाहिए, सीबीएसई के स्कूलों/कॉलेजों में बड़े सेंटर्स बनाए जाएं। दूसरा बड़ा बदलाव यह होना चाहिए कि नीट की परीक्षा भी जेईई की तर्ज पर दो लेवल पर हो और इसे सीबीएसई रखे।

शिक्षा मंत्री की प्रमुख बातें
नीट री-एग्जाम 21 जून को आयोजित किया जाएगा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए नीट परीक्षा के बारे में डिटेल में जानकारी दी है। उनका कहना है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीट पेपर कैंसिल करने का कड़ा फैसला लेना पड़ा।

इस बार परीक्षा का समय भी 15 मिनट बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

पेपर 2 बजे से शुरू होगा और 5.15 तक चलेगा।

नई परीक्षा के लिए स्टूडेंट्स के एडमिट कार्ड 14 जून तक जारी हो जाएंगे।

अगले साल से नीट यूजी की परीक्षा कंप्यूटर बेस्ट टेस्ट यानी ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमारी एप्रोच जीरो टॉलरेंस की होगी। हमारी लड़ाई परीक्षा माफिया के साथ उसी तरह से रहेगी। विभिन्न तरह के सोशल मीडिया हैंडल से भ्रामक तथ्यों को रखकर गुमराह करने की कोशिश की जाती है। इन सभी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तुरंत सीबीआई को इसका जिम्मा सौंपा है।

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