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‘मुश्किल दौर में यूरोप, वर्ल्ड ऑर्डर बदलने की है जरूरत ‘

पेरिस की धरती से जयशंकर का यूरोप को आईना

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 17, 2026
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

पेरिस। बेबाक बयानों के लिए मशहूर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बार पेरिस की धरती पर खड़े होकर न केवल यूरोप की मौजूदा स्थिति पर तीखी टिप्पणी की है, बल्कि ग्लोबल ऑर्डर में बड़े बदलाव की वकालत भी कर दी है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट के साथ मुलाकात के दौरान जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि यूरोप इस वक्त चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से गुजर रहा है और इसके गहरे स्ट्रेटेजिक इंप्लिकेशन हैं। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया अस्िथर जियोपोलिटिकल सिचुएशन का सामना कर रही है। एक तरफ अमेरिका ने वेनेजुएला में अटैक कर तनाव बढ़ा दिया है तो दूसरी ओर ट्रंप लगातार यूरोप को भिखारी कहकर चिढ़ा रहे हैं।

अक्सर देखा गया है कि पश्चिमी देश और यूरोप दुनिया को मानवाधिकारों और कूटनीति का पाठ पढ़ाते रहे हैं लेकिन पेरिस में जयशंकर ने यूरोप को उसी के घर में हकीकत का आईना दिखा दिया। उन्होंने कहा, यूरोप चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से गुजर रहा है, जिनमें से कई के स्ट्रेटेजिक इंप्लिकेशन हैं। मेरा मानना है कि आज ग्लोबल ऑर्डर को लेकर एक व्यापक वैश्विक चर्चा की आवश्यकता है।” यह बयान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अन्य वैश्विक संस्थाओं में पश्चिमी देशों के वर्चस्व पर सीधा प्रहार है। जयशंकर के इस एक वाक्य के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह इशारा यूरोप की सुरक्षा निर्भरता और आर्थिक संकट की ओर है। अमेरिका में नेतृत्व परिवर्तन और वैश्विक उथल-पुथल के बीच यूरोप अपनी सुरक्षा और रणनीति को लेकर असमंजस में है। जयशंकर ने परोक्ष रूप से यह जता दिया कि जो यूरोप कल तक दुनिया की दिशा तय करता था, आज वह खुद अपनी दिशा तलाशने के लिए संघर्ष कर रहा है।

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अराजक दुनिया में भारत और फ्रांस ‘स्टेबलाइजर’
वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी और अमेरिकी कार्रवाई का जिक्र करते हुए जयशंकर ने माना कि दुनिया में काफी अनिश्चितता है। ऐसे माहौल में भारत और फ्रांस की भूमिका महज द्विपक्षीय नहीं रह जाती, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी हो जाती है। जयशंकर ने कहा, हम एक खंडित और अस्थिर भू-राजनीतिक वातावरण देख रहे हैं। ऐसे में भारत और फ्रांस का साथ मिलकर काम करना वैश्विक राजनीति को स्थिर करने के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। इस साल का कूटनीतिक संयोग भी बेहद खास है। भारत जहां ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, वहीं फ्रांस जी-7 का नेतृत्व कर रहा है। इसके अलावा दोनों देश जी-20 का भी हिस्सा हैं। जयशंकर ने इस संयोग को रेखांकित करते हुए कहा, हम दोनों ही राष्ट्र बहुध्रुवीयता के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम अलग-अलग डोमेन में सक्रिय हैं, इसलिए हमारा साथ आना दुनिया के संतुलन के लिए जरूरी है।

फ्रांस यूरोप में भारत का सबसे पुराना और खास दोस्त
भले ही जयशंकर ने यूरोप की स्थिति पर चिंता और कटाक्ष व्यक्त किया हो, लेकिन फ्रांस के लिए उनके शब्द बेहद गर्मजोशी भरे थे। उन्होंने फ्रांस को यूरोप में भारत का सबसे पुराना रणनीतिक साझेदार बताया। बैठक के दौरान जयशंकर ने कहा, हमारे संबंधों की क्वालिटी कुछ कुछ बहुत ही खास है। फ्रांस यूरोप में हमारा पहला रणनीतिक साझेदार है और मुझे विश्वास है कि हमारी निरंतर बातचीत उस रिश्ते को पोषित करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि भारत अपनी रक्षा और सामरिक जरूरतों के लिए रूस के अलावा फ्रांस पर ही सबसे ज्यादा भरोसा करता है। चाहे राफेल डील हो या परमाणु ऊर्जा सहयोग, फ्रांस ने हर मुश्किल वक्त में भारत का साथ दिया है और पश्चिमी दबावों के बावजूद भारत की स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी का सम्मान किया है।

मैक्रों का भारत दौरा और एआई समिट
इस मुलाकात का एक मुख्य एजेंडा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आगामी भारत यात्रा की तैयारी करना भी था। जयशंकर ने पुष्टि की कि मैक्रों अगले महीने एआई समिट में भाग लेने के लिए भारत आएंगे। पिछले साल फरवरी में पीएम मोदी ने पेरिस में मैक्रों के साथ एआई समिट की सह-अध्यक्षता की थी। अब उसी कड़ी को आगे बढ़ाने के लिए मैक्रों भारत आ रहे हैं। इस यात्रा के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बड़े समझौतों की उम्मीद है।

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