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प्लास्टिक के फूलों पर राज्य में प्रतिबंध

गणेशोत्सव या दिवाली पर इस्तेमाल किया तो लगेगा बड़ा जुर्माना

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 30, 2024
in महाराष्ट्र
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State ban on plastic flowers
ब्लिट्ज ब्यूरो

मुंबई । प्लास्टिक के फूलों के इस्तेमाल पर पूरे राज्य में रोक लगा दी गई है। पर्यावरण के लिए घातक माने जाने वाले इन फूलों के अलावा थर्मोकोल से बनाए जाने वाले सजावटी सामानों के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इन सबका गणेश चतुर्थी, दशहरा, दीवाली, ईद, क्रिसमस, सालगिरह समारोह में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है।

हलफनामा दायर
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) ने हलफनामा दायर कर बॉम्बे हाईकोर्ट में यह स्पष्ट किया है। इस प्रतिबंध को लागू करने की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों, राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमे को दी गई है। एमपीसीबी ने यह हलफनामा बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के तहत दायर किया है।

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यह कोर्ट ने कहा था
कोर्ट ने पिछले दिनों कहा था कि प्लास्टिक के फूलों पर प्रतिबंध लगाने में उन्हें कोई बाधा नजर नहीं आती। सरकार को इस संबंध में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। ये फूल पर्यावरण के अनुकूल नहीं है।

ये है हिदायद
हलफनामे में उल्लेखित एमपीसीबी की 8 मार्च 2022 को जारी अधिसूचना के अनुसार, 100 माइक्रोन से कम मोटाई वाले सिंगल यूज प्लास्टिक के उत्पादन, वितरण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाई गई है। बाजार में बिकने वाले प्लास्टिक के फूलों की मोटाई 30 माइक्रोन है। यह पर्यावरण के लिए हानिकारक है। इकोलॉजी पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्लास्टिक के फूलों को नष्ट करने में काफी दिक्क तों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा बायो डिग्रेडेबल वस्तुओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

हलफनामे में कहा गया है कि प्लास्टिक के फूलों की बिक्री पर लगाम लगाने के लिए राज्य के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने स्टेट, डिस्टि्रक्ट और सिटी लेवल पर टास्क फोर्स गठित की है, जो सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठा रही है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का निर्देश
प्लास्टिक के फूलों को प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची में शामिल करने के संबंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (महाराष्ट्र वेस्टर्न जोन) ने निर्देश जारी किया है। इसके तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस विषय पर कदम उठाने का निर्देश दिया गया था। यह बोर्ड जल्द ही इस मामले को संबंधित कमेटी के सामने रखेगा जिससे प्लास्टिक के फूल भी आधिकारिक तौर पर प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची में शामिल हो सकेंगे

1 लाख 70 हजार रुपये वसूला जुर्माना
आर्टिफिशियल फ्लावर को मनचाहा रंग देने के लिए खतरनाक रसायन का इस्तेमाल किया जाता है, जो पर्यावरण के लिए खतरनाक है। वर्तमान में मुंबई समेत राज्य भर के बड़े-बड़े बाजार प्लास्टिक के फूलों से पटे पड़े हैं। इसे देखते हुए एमपीसीबी ने सभी महानगर पालिकाओं को ऐसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर नजर रखने को कहा है, जहां प्लास्टिक की वस्तुओं का उत्पादन होता है।

स्थानीय निकायों को सेमिनार के जरिए इस संबंध में जागरूकता फैलाने का जिम्मा दिया गया है। पिछले साल अलग-अलग जगहों पर की गई कार्रवाई के जरिए 116 किलो प्लास्टिक के फूल बरामद किए गए थे। एक लाख 70 हजार रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गए थे।

इन देशों से इम्पोर्ट होते हैं फूल
चीन, यूएसए, ताइवान, श्रीलंका, थाईलैंड, दुबई, इटली, नीदरलैंड और हांगकांग से प्लास्टिक के फूल बड़े पैमाने पर इम्पोर्ट किए जाते हैं। साल 2017-18 तक इन फूलों का इम्पोर्ट 30 करोड़ रुपये था, जो 2022-2023 में बढ़कर 52 करोड़ रुपये तक पहुंच गया । इसलिए प्लास्टिक के फूलों के कारोबार को रोकने के लिए इनके इम्पोर्ट पर भी रोक लगाने की दिशा में कदम बढ़ाना पड़ेगा।

हाईकोर्ट में जनहित याचिका
प्लास्टिक के फूलों से हो रहे नुकसान के कारण ग्रोवर फ्लावर कॉउन्सिल ऑफ इंडिया ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है। याचिका में गणेश चतुर्थी, दशहरा, दीवाली, ईद, क्रिसमस, सालगिरह समारोह में बड़े पैमाने पर कृत्रिम फूलों के इस्तेमाल पर चिंता व्यक्त की गई है, क्योंकि यह पर्यावरण के साथ मानव जीवन के लिए भी घातक है। कृत्रिम फूलों के बढ़ते उपयोग से नैसर्गिक रूप से फूल की बागवानी में लगे किसानों और उनके साथ काम करने वाले श्रमिकों को काफी दिक्क तों का सामना करना पड़ रहा है। भारत में फूलों की 18 हजार प्रजातियां हैं।

ऐसे में पर्यावरण के लिए नुकसानदेह माने जान वाले प्लास्टिक के फूलों का बहिष्कार किया गया है।

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