• Latest
  • Trending
Pollution is the biggest threat to human existence

प्रदूषण मानव अस्तित्व पर सबसे बड़ा खतरा

November 17, 2023
daily-news

कोयला खदानों से डेटा सेंटर तक: भारत की बड़ी आर्थिक और तकनीकी खबरें

September 14, 2026
brics

भारत की बड़ी खबरें: एशिया कप, धीरज बोम्मादेवरा, हिंदी दिवस और G20-ब्रिक्स

September 14, 2026
ब्रिक्स सम्मेलन: भारत को क्या मिला?

ब्रिक्स सम्मेलन: भारत को क्या मिला?

September 13, 2026
मोदी-शी मुलाकात और ब्रिक्स सम्मेलन का दूसरा दिन

मोदी-शी मुलाकात और ब्रिक्स सम्मेलन का दूसरा दिन

September 13, 2026
ब्रिक्स सुधार, ओडिशा में 11.5 अरब डॉलर निवेश, भारतीय वाणिज्य दूतावास, हॉकी, बद्री नस्ल और बांस की बड़ी खबरें।

ब्रिक्स से ओडिशा निवेश तक भारत की बड़ी खबरें

September 12, 2026
भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत मंडपम में शुरू, भारत चौथी बार अध्यक्ष

September 12, 2026
daily-news

भारत में ब्रिक्स बैठक: व्यापार, UPI, डिजिटल मजदूर चौक और आर्थिक सुधार

September 11, 2026
daily-news

भारत की बड़ी खबरें: LPG नियम, मत्स्य योजना, BRICS, AI, सुधार और ग्रीन मिशन

September 10, 2026
daily-news

भारत की बड़ी खबरें: रेलवे, UPI, कौशल, तकनीक और हरित विकास में बड़े फैसले

September 10, 2026
भारत की 7.8% जीडीपी ग्रोथ

‘झूठ की गूंज वाले निराशा फैलाने में लगे हैं’

September 7, 2026
पीएम मोदी पुतिन मुलाकात SCO शिखर सम्मेलन

पीएम मोदी का विदेश दौरा और एससीओ शिखर सम्मेलन का संदेश… भारत विश्व-मित्र महाशक्ति

September 7, 2026
भारत-उज्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

भारत का बढ़ा रुतबा

September 7, 2026
Wednesday, September 16, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

प्रदूषण मानव अस्तित्व पर सबसे बड़ा खतरा

by ब्लिट्ज़ इंडिया
November 17, 2023
in दृष्टिकोण
0
Pollution is the biggest threat to human existence

deepakभारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा है और वायु प्रदूषण एक विकराल समस्या बन गई है। इसकी वजह से भारत ही नहीं, दुनिया भर में मौतों और बीमारियों का आंकड़ा साल दर साल बढ़ रहा है। यह मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है। लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ पॉल्यूशन नामक पत्रिका 2020 में प्रकाशित एक प्रमुख अध्ययन से पता चला है कि प्रदूषण इंसान के लिए “सबसे बड़ा अस्तित्व संबंधी खतरा” बनकर उभरा है।
वायु प्रदूषण की वजह से हर साल दुनिया भर में 90 लाख से अधिक लोगों की मौत हो रही है। अध्ययन से पता चला है कि दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में वायु प्रदूषण से अधिक लोगों की मौत होती है।

इसके परिणामस्वरूप 2019 में भारत में 16.7 लाख मौतें हुईं जो उस साल दुनिया भर में इस कारण हुई मौतों का 17.8 प्रतिशत थी। 2016 की डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वायु प्रदूषण से एक घंटे में करीब 12 मौतें होती हैं। बाहरी और घरेलू वायु प्रदूषण के कारण 2016 में पांच वर्ष से कम उम्र के 1,01,788 बच्चों की समय से पहले मृत्यु हो गई। घर के बाहर की हवा प्रदूषित होने से देश में हर घंटे लगभग सात बच्चे मर जाते हैं, और उनमें से आधे से अधिक लड़कियां हैं।

YOU MAY ALSO LIKE

भारत का बढ़ा रुतबा

तेजस एमके-2 फाइटर जेट पर पूर्व वाइस चीफ की दो टूक ‘कब तक करेंगे इंतजार’

2019 में दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 21 भारत में थे। 2016 के आंकड़ों पर आधारित एक अध्ययन के अनुसार, भारत में लगभग 140 मिलियन लोग 10 गुना या उससे अधिक प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं।

डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से अधिक और वायु प्रदूषण के उच्चतम वार्षिक स्तर वाले दुनिया के 20 शहरों में से 13 भारत में हैं जहां करीब 51 प्रतिशत प्रदूषण औद्योगिक प्रदूषण से, 27 प्रतिशत वाहनों से, 17 प्रतिशत फसल जलाने से और 5 प्रतिशत अन्य स्रोतों से होता है। आंकड़ों पर अगर गौर करें तो वायु प्रदूषण हर साल लगभग 20 लाख भारतीयों की असामयिक मृत्यु का कारण बनता है। शिकागो विश्वविद्यालय के ऊर्जा नीति संस्थान द्वारा 2023 के लिए अगस्त में जारी वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक (एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स) रिपोर्ट से पता चला है कि वायु प्रदूषण से दिल्ली में रहने वाले लोगों की जीवन प्रत्याशा (लाइफ एक्सपेंटेंसी) 11.9 साल कम हो गई है। शोधकर्ताओं ने कहा कि पीएम 2.5 भारत में मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

हृदय रोगों (4.5 वर्ष) और बाल एवं मातृ कुपोषण (1.8 वर्ष) की तुलना में औसत भारतीय के जीवन में 5.3 वर्ष कम हो जाते हैं और हम सभी यह जानते हैं कि दिल्ली, दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में टॉप पर है। लैंसेट अध्ययन के आंकड़ों के मद्देनजर श्वसन तंत्र चिकित्सा के विशेषज्ञों की राय के मुताबिक, ‘हमारे देश में विशेषकर सिंधु-गंगा पट्टी में, वायु प्रदूषण के स्तर में वृद्धि के साथ मौतों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। यह वही है जो हम इन दिनों अनुभव कर रहे हैं’। वस्तुत: वायु प्रदूषण का यह ‘धीमा जहर’ अजन्मे, नवजात शिशुओं और सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है। वायु प्रदूषण के चलते जन्म के समय ही बच्चे का वजन कम होता है, बड़े होने पर वह एलर्जी का शिकार हो सकता है।

– आज की तारीख में दिल्ली-एनसीआर के कुछ इलाकों में सांस लेना 20 या इससे अधिक सिगरेट पीने के बराबर है।
– अब सरकारों को ऐसे उपायों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है जिनसे प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान निकले।

शरद ऋतु और वसंत के महीनों में कृषि क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर फसल अवशेष जलाना – यांत्रिक जुताई का एक सस्ता विकल्प – धुआं, धुंध और कण प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है। भारत में ग्रीन हाउस गैसों का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन कम है लेकिन कुल मिलाकर देश चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्पादक है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के शहरों में प्रदूषण की खतरनाक धुंध का गाढ़ा होना न केवल दुखद, बल्कि विशेष चिंता का विषय है। दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 के आसपास पाया जा रहा है जो पिछले साल से भी अधिक है। अब हालत यह है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लोग आमतौर पर इस प्रदूषण को अपनी सांसों व आंखों में महसूस करने लगे हैं। वायु गुणवत्ता बहाल करने के लिए हरसंभव उपाय करने की जरूरत आ खड़ी हुई है।

अब आवश्यकता इस बात की है कि वायु गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा ठोस कदम उठाए जाएं। अभी जो उपाय किए गए हैं, उन्हें जारी रखा जाए पर ऑड-ईवन जैसे तात्कालिक उपाय भी न अपनाए जाएं जिनसे आने वाले दिनों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़े। कृत्रिम वर्षा पर करोड़ों रुपये फूंकने के बजाय सरकारें इन्हीं रुपयों से किसानों को ऐसी मशीनें सस्ती दरों पर उपलब्ध कराएं ताकि उन्हें अपनी फसलों के ठूंठ जलाने की आवश्यकता ही न पड़े। परिवहन के सस्ते व इलेक्ट्रॉनिक साधन शहरों व गांवों में आवागमन के लिए सर्वसुलभ कराए जाएं ताकि लोग अपने वाहनों का कम से कम प्रयोग करें, तभी इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण की जो गंभीर स्थिति बनी है, उसे नजरंदाज नहीं किया जा सकता। यह पूरी जिम्मेदारी से काम करने का समय है।

कहीं न कहीं सरकारों व सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी है, जिसकी वजह से ऐसे प्रदूषण के हालात बार-बार या हर साल बनने लगे हैं। स्थिति यह है कि आज की तारीख में दिल्ली-एनसीआर के कुछ इलाकों में सांस लेना 20 या इससे अधिक सिगरेट पीने के बराबर है। इतना तो कोई भी बता सकता है कि प्रदूषण के खिलाफ बातें तो खूब हुई हैं पर जो कदम उठाए जाने चाहिए थे, वे नहीं उठाए गए। अत: अब सरकारों को ऐसे उपायों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है जिनसे प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान निकले। साथ ही नागरिकों के हर वर्ग को भी यह दायित्व स्वत: स्वीकार करना चाहिए कि वे कोई ऐसे कार्य न करें जिनसे किसी भी प्रकार के प्रदूषण में वृद्धि हो क्योंकि प्रदूषण अंतत: उनके ही अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation