ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।मध्य दिल्ली के यात्रियों को लगातार चौथे दिन मेट्रो की पाबंदियों से जूझना पड़ रहा है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने शनिवार सुबह 7:30 बजे से अगले निर्देश तक 18 स्टेशन बंद कर दिए। जंतर-मंतर के पास चल रहे छात्र प्रदर्शन के मद्देनज़र यह सुरक्षा इंतज़ाम किया गया है। बंद स्टेशनों में लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, ख़ान मार्केट, जोर बाग़, शिवाजी स्टेडियम, झंडेवालान और नई दिल्ली शामिल हैं।
सूची से ज़्यादा काम की बात यह है कि क्या चालू है। राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय पर इंटरचेंज की सुविधा जारी है — यानी यात्री इन स्टेशनों पर लाइन बदल सकते हैं, भले ही वहां से बाहर न निकल सकें और न ही प्रवेश कर सकें। एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर सेवाएं सिर्फ़ धौला कुआं और यशोभूमि द्वारका सेक्टर 25 के बीच चल रही हैं। इस सप्ताहांत हवाई अड्डे जाना हो, मध्य दिल्ली के किसी अस्पताल पहुंचना हो या शहर के आर-पार सफ़र करना हो — सलाह यही है कि प्रभावित हिस्से के लिए सड़क मार्ग का विकल्प पहले से सोच लें और सामान्य से काफ़ी ज़्यादा समय लेकर निकलें।
प्रवेश बंद, इंटरचेंज चालू: शनिवार सुबह 7:30 बजे से 18 स्टेशन बंद, लगातार चौथा दिन — राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय पर लाइन बदलना संभव; एयरपोर्ट एक्सप्रेस सिर्फ़ धौला कुआं से यशोभूमि द्वारका सेक्टर 25 तक।
इतने बड़े शहर की रफ़्तार उसके समय-चक्र से चलती है। नक्शा जब भी बदलता है, लाखों लोगों का पूरा दिन बदल जाता है — इसीलिए समय पर दी गई साफ़ जानकारी अपने आप में एक जनसेवा है।
एक नज़र में
• बंद: 25 जुलाई सुबह 7:30 बजे से 18 स्टेशन — लगातार चौथा दिन
• इंटरचेंज चालू: राजीव चौक, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय
• एयरपोर्ट एक्सप्रेस: सिर्फ़ धौला कुआं से यशोभूमि द्वारका सेक्टर 25
• अदालत में: पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर 27 जुलाई को सुनवाई
इस हफ़्ते का एक पहलू सोमवार को अदालत में भी आएगा। सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ कथित पुलिस ज़्यादती से जुड़ी याचिका पर 27 जुलाई को सुनवाई करना स्वीकार किया है। यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत तथा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के समक्ष रखा गया। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा को लेकर दो याचिकाएं दायर हुई हैं, जिनमें कई राज्यों को पक्षकार बनाया गया है। 20 जुलाई को बिना अनुमति संसद की ओर मार्च की कोशिश के बाद तनाव बढ़ा था; उसी दिन की घटनाओं की पड़ताल की मांग इन याचिकाओं में है।
आगे का रास्ता दो ऐसी बातों को साथ लेकर चलने का है जो एक-दूसरे की विरोधी नहीं हैं। दिल्ली पहले भी बड़े जमावड़े और लंबे आंदोलन संभालती रही है, और कारगर तरीक़ा जाना-पहचाना है: शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सुरक्षित रखा जाए, शहर की रफ़्तार बनी रहे, और विवादित आचरण की जांच सड़क पर बहस के बजाय स्वतंत्र न्यायपालिका करे। फ़ौरी तौर पर इस सप्ताहांत की प्राथमिकता संवाद है — स्टेशनवार समय पर जानकारी, प्रभावित रास्तों पर अतिरिक्त बसें, और अस्पताल व हवाई अड्डे जाने वालों के लिए स्पष्ट मार्गदर्शन — ताकि आम यात्री की परेशानी असुविधा तक सीमित रहे, छूटी हुई ज़रूरी मुलाक़ातों तक न पहुंचे।














