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पहाड़ पर 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां…

विश्व धरोहर में शामिल होगी भारत की यह दुर्लभ विरासत

by ब्लिट्ज़ इंडिया
December 16, 2022
in राष्ट्रीय
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भगवान शिव के साथ यहां रुके थे लाखों देवी-देवता

भगवान शिव के साथ यहां रुके थे लाखों देवी-देवता

ब्लिट्ज विशेष

अगरतला। अपनी 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध उनाकोटी को वर्ल्ड हेरिटेज नाम देने के लिए भेजा जा रहा है। उनाकोटी को नॉर्थ-ईस्ट का अंगोर वाट भी कहा जाता है। यहां भगवान गणेश की दुर्लभ और प्राचीन मूर्तियां हैं। इसके अलावा विशाल पहाड़ में उकेरी गई भगवान शिव, मां दुर्गा की मूर्तियां भी हैं।

त्रिपुरा का रघुनंदन हिल्स
त्रिपुरा के रघुनंदन हिल्स पर स्थित एक पहाड़ पर ये मूर्तियां उकेरी गई हैं। कहते हैं कि यहां पर 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां हैं। इन्हें किसने और कब बनाया इसका अंदाजा नहीं है लेकिन कहते हैं कि ये 8वीं या 9वीं सदी में बनाई गई थीं। विश्व धरोहर घोषित कराने के लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और सरकार, दोनों प्रयास कर रहे हैं। इतिहासकार पन्नालाल रॉय कहते हैं कि ये पत्थर की मूर्तियां बेहद दुर्लभ हैं। ये उन मूर्तियों की तरह हैं जो कंबोडिया के अंगोर वाट में बनी हैं। पन्नालाल इन मूर्तियों का अध्ययन कई वर्षों से कर रहे हैं। बंगाली में उनाकोटी का मतलब होता है एक करोड़ से एक कम, यानी 99,999,999। इसलिए यहां पर इतनी मूर्तियां हैं।

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मूर्तियों पर प्रदूषण की मार
कई मूर्तियां खराब मौसम, प्रदूषण की वजह से खराब हो गई हैं। यहां पर कई स्थानों पर मूर्तियों के ऊपर से झरने बहते हैं।

रुके थे देवी देवता
कहते हैं कि उनाकोटी में एक रात के लिए भगवान शिव के साथ 99 लाख 99 हजार 999 देवी देवता रुके थे। जब से इस स्थान का संरक्षण एएसआई ने लिया है, तब से यहां के हालात थोड़े बेहतर हुए हैं।

खनन लगातार जारी
पुरातत्वविद लगातार यहां पर खनन का काम कर रहे हैं ताकि अन्य मूर्तियों की भी खोज की जा सके। हाल ही में केंद्र सरकार ने इस स्थान के संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए 12 करोड़ रुपये दिए थे। लोग यहां पर्यटन और पूजा-अर्चना के लिए जाते हैं लेकिन एएसआई मूर्तियों के पास किसी को जाने नहीं देती।

बनाया जा रहा पर्यटन स्थल
त्रिपुरा सरकार इन मूर्तियों के आसपास पर्यटन स्थल बना रही है। सरकार का मानना है कि यह उत्तर-पूर्व के प्राकृतिक, सांस्कृतिक धरोहरों और खजानों में से एक है। यहां पर दो तरह की मूर्तियां हैं। पहली पहाड़ों पर उकेरी गई मूर्तियां और दूसरी पत्थरों को काटकर बनाई गई मूर्तियां। सबसे प्रसिद्ध है भगवान शिव और विशालकाय गणेश की मूर्ति। भगवान शिव की मूर्ति को उनाकोटिश्वरा काल भैरवा बुलाया जाता है। यह करीब 30 फीट ऊंची है। भोलेनाथ के सिर के ऊपर की सजावट ही 10 फीट ऊंची है। इनमें सबसे बड़ी मूर्ति भगवान शिव, गणेश और मां दुर्गा की है।

क्रोधित हो गए थे भगवान शंकर
भगवान शिव की मूर्ति के पास ही नंदी बैल की तीन मूर्तियां मिली हैं, जो जमीन में आधी धंसी हुई हैं। कहा जाता है कि काशी की तरफ जाते समय भगवान शिव ने यहां पर एक रात बिताई थी। उनके साथ 99 लाख 99 हजार 999 देवी-देवता यात्रा कर रहे थे, वो सब यहां पर रुके थे।
कहा जाता है कि भगवान शिव ने सभी से कहा कि सूर्योदय होने से पहले हम सबको उठकर काशी के लिए चल देना है लेकिन भोलेनाथ के सिवा किसी की नींद नहीं खुली। इससे नाराज भगवान शिव ने उन सभी को पत्थर बनने का श्राप दे दिया, तब से वो सब उसी अवस्था में यहां पड़े हुए हैं।

आते हैं हजारों पर्यटक
अप्रैल में यहां पर अशोकाष्टमी का मेला होता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। पन्नालाल रॉय कहते हैं कि बंगाल के पाला साम्राज्य के समय उनाकोटी भगवान शिव को मानने वाले लोगों को लिए मुख्य धार्मिक स्थान था। इसलिए यह संभावना भी है कि उस समय यहां पर बौद्ध धर्म का भी बोलबाला रहा हो।

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