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अमेरिका, रूस के दबदबे को इसरो ने तोड़ा

अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम

by ब्लिट्ज़ इंडिया
December 23, 2022
in अंतरिक्ष विज्ञान
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अमेरिका, रूस के दबदबे को इसरो ने तोड़ा

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। बीते एक दशक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी व अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इसरो की कामयाबियों से भारत का मस्तक ऊंचा हुआ है। अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में तो इसरो ने अब महारथ हासिल कर ली है। चंद्रयान-1 के सफल प्रक्षेपण, खुद का नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम, एस्ट्रोसैट, स्वदेश में बने अंतरिक्ष यान, रीयूज़ेबल लॉन्च व्हीकल-टेक्नॉलॉजी डेमॉनस्ट्रेटर (आरएलवी-टीडी) से लेकर मंगलयान का सफल प्रक्षेपण इन कामयाबियों की बानगी है।

संचार सेवाओं के अतिरिक्त धरती के अवलोकन एवं मौसम पूर्वानुमान समेत देश के अधिकांश मंत्रालयों एवं विभागों को अंतरिक्ष तकनीक उपलब्ध कराने के लिए अंतरिक्ष में इसरो के अनेक उपग्रह सक्रिय हैं। इसरो अपने पोलर सेटेलाइट लांच वेहिकल (पीएसएलवी-सी 47) से अब तक सिंगापुर, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे विकसित देशों समेत कई देशों के दर्जनों उपग्रहों का प्रक्षेपण कर चुका है। इस काम से इसरो को अब अच्छी खासी आमदनी भी हो रही है। अंतरिक्ष अनुसंधान और उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में इसरो फिलहाल कई योजनाओं पर एक साथ काम कर रहा है। इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स कार्पोरेशन ने कई देशों के उपग्रह छोड़ने के लिए समझौता किया है।

इसरो कई मिशन पूरे कर चुका है। इनमें कई प्रक्षेपण यान और दर्जनभर से अधिक उपग्रह मिशन शामिल हैं। आदित्य एल-1 सौर मिशन, छोटा उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के साथ ही 200 टन के सेमीक्रायो इंजन पर काम शुरू हो चुका । यही नहीं मानव को अंतरिक्ष में भेजने के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम पर भी गंभीरता से काम चल रहा है।

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अंतरिक्ष के क्षेत्र में इसरो ने जिस तरह से कुछ सालों में बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, उससे देश की क्षमता बढ़ी है। 2013 से पहले व्यावसायिक संचार उपग्रहों का प्रक्षेपण करने में रूस, अमेरिका आदि का ही दबदबा था, लेकिन इसरो ने अब इन देशों के दबदबे को तोड़ा है।

नासा को टक्कर : अमेरिका और रूस की अंतरिक्ष कार्यक्रमों से जुड़ी एजेंसियों नासा और रॉसकॉसमोस को लगने लगा है कि यदि भारत इसी तरह नित नई कामयाबी हासिल करता रहा, तो उनके अंतरिक्ष कारोबार पर असर पड़ेगा।

सस्ता प्रक्षेपण : जहां दूसरे देशों का उपग्रह प्रक्षेपण में भारी खर्च आता है, वहीं भारत अपने सस्ते लांच वेहिकल पीएसएलवी-सी 24 और पीएसएलवी-सी 47 के जरिए कम खर्च में ही उपग्रह प्रक्षेपित करने में सक्षम है। बाकी अंतरिक्ष एजेंसियों के मुकाबले वह 60 फीसदी कम पैसे लेता है।

सभी प्रक्षेपण सफल : एक महत्वपूर्ण बात इसरो के हक में जाती है कि उसने अभी तक जितने भी विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण किया है, वे सब सफल रहे हैं। यही वजह है कि 20 देशों की 57 से ज्यादा अंतरिक्ष एजेंसियां साल 1999 से ही उपग्रह प्रक्षेपण में इसरो की मदद ले रही हैं। मार्स ऑर्बिटर जैसे बड़े मिशन को महज 450 करोड़ रुपए में पूरा करने वाले इसरो से अब अमेरिका भी अपने संचार उपग्रहों का प्रक्षेपण करने में सहायता ले रहा है।
दुनिया में फिलहाल तीन अरब डॉलर से अधिक का अंतरिक्ष बाज़ार है, वह दिन दूर नहीं जब इसके बड़े हिस्से पर इसरो का कब्ज़ा होगा।

दो दर्जन देशों के उपग्रह छोड़े : अंतरिक्ष से धरती की निगरानी की क्षमता प्रदान करने वाले कार्टोसैट-3 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण भी इसरो की बड़ी कामयाबियों में से एक है। यह कार्टोसैट श्रृंखला का नौवां उपग्रह था । कार्टोसैट-3 तीसरी पीढ़ी का बेहद चुस्त और उन्नत उपग्रह माना गया। यह धरती की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने के साथ-साथ उसका मानचित्र तैयार कर रहा है। इस प्रक्षेपण तक तकरीबन दो दर्जन देशों के 310 उपग्रहों को अलग-अलग मिशन में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर चुका था।

कार्टोसैट-3 तीसरी आंख : कार्टोसैट-3 संचार और निगरानी का दोहरा काम कर रहा है। यह हाई रेज़ोल्यूशन उपग्रह है जो अंतरिक्ष से पृथ्वी की स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम है। एडॉप्टिव ऑप्टिक्स तकनीक की मौजूदगी फोटो को धुंधला होने से रोकेगी।
अपनी इस खूबी के चलते यह सैन्य कार्यों के लिए बहुत उपयोगी रहा। सेना इसकी मदद से दुश्मनों पर पैनी नज़र रख रही है। यही नहीं इसकी वजह से शहरी क्षेत्रों में नियोजन, ग्रामीण क्षेत्रों में ढांचागत विकास और संसाधनों का मानचित्रण, तटवर्ती क्षेत्रों में भू-उपयोग इत्यादि कामों में मदद मिली है । इन्हीं विशेषताओं को देखते हुए कार्टोसैट-3 को अंतरिक्ष में भारत की आंख कहा जा रहा है।

ये हैं देश के अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र

– विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर
– इसरो सैटेलाइट सेंटर
– शार सेंटर
– लिक्विड प्रोपल्सन सिस्टम सेंटर
– लॉन्च व्हीकल प्रोपल्सन सिस्टम
– स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर
– डेवेलपमेंट एंड एजुकेशनल कम्यूनिकेशंस यूनिट

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