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अमरिकी मिड टर्म चुनाव : भारतीय-अमेरिकियों का दबदबा

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अमरिकी मिड टर्म चुनाव : भारतीय-अमेरिकियों का दबदबा

by ब्लिट्ज़ इंडिया
November 18, 2022
in नया-भारत
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अमरिकी मिड टर्म चुनाव : भारतीय-अमेरिकियों का दबदबा

Vector flag of United States of America. Waving flag of USA, vector illustration. Bright colors

एमी बेरा

वॉशिंगटन। अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन हो रहे हैं। इससे संसद के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव (लोअर हाउस), सीनेट (अपर हाउस) के मेंबर्स और राज्यों में गवर्नर चुने जाते हैं। अब इलेक्शन के रिजल्ट सामने आने लगे हैं। अमेरिकी इतिहास में पहली बार 23 साल की सैयद सबसे कम उम्र की सांसद (कांग्रेस) मेंबर चुनी गई हैं।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के चुनाव में नबीला को 52.3 फीसद वोट मिले हैं। उन्होंने इलिनोइस सीट पर जीत हासिल करते हुए रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी क्रिस बोस को हरा दिया। उन्होंने कहा कि जब मैंने चुनाव लड़ने की घोषणा की तो मेरा एक ही मिशन था लोगों से बातचीत करना। असल और जमीनी मुद्दे जानना। मैं चाहती थी कि लोग भी लोकतंत्र में शामिल हों। इसमें उनका बराबरी का हिस्सा हो।

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जीत की खुशी को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा नाम नबीला सैयद है। मैं 23 साल की मुस्लिम, भारतीय-अमेरिकी हूं। हमने अभी-अभी एक रिपब्लिकन दबदबे वाले शहरी निकाय का चुनाव जीता है।

हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स में ये भी चुने गए

संसद के हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव (लोअर हाउस) में भारतीय-अमेरिकियों का दबदबा है। अमी बेरा, राजा कृष्णमूर्ति, रो खन्ना और प्रमिला जयपाल को फिर से चुना गया है।

अमेरिका में भारतीय अमेरिकी मतदाताओं का रोल भी अहम
भारतीय लोग अमेरिकी स्विंग वाले राज्यों में एक महत्वपूर्ण वोट के रूप में उभरे हैं। यहां हार-जीत कुछ हजार वोटों से तय होती है। अमेरिकी थिंक टैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस की 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक चुनिंदा स्विंग राज्यों में भारतीय अमेरिकी आबादी जीत के अंतर से बड़ी है जिसने 2016 में हिलेरी क्लिंटन और 2020 में ट्रम्प को नजदीकी लड़ाई में बाहर कर दिया था।

जानें जीतने वाले कैंडिडेट्स

प्रमिला जयपाल
प्रमिला वर्तमान में हाउस ज्यूडिशियरी कमेटी में हैं। उन्हें दिसंबर 2020 में अमेरिकी संसद के कांग्रेशनल प्रोग्रेसिव कॉकस (सीपीसी) की अध्यक्ष के तौर पर भी चुना गया था। ये पद प्रभावी और अनुभवी सांसद को दिया जाता है। 1966 में चेन्नई में जन्मी डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमिला जयपाल ने चौथी बार वॉशिंगटन के सातवें डिस्िट्रक्ट से चुनाव जीता है। उनका अधिकतर समय इंडोनेशिया और सिंगापुर में भी बीता है। 1982 में वो जब 16 वर्ष की थीं तब अमेरिका आ गई थीं। उनकी कॉलेज की पढ़ाई अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से हुई है। इसके बाद उन्होंने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की।

रो खन्ना
खन्ना ने 8 अगस्त, 2009 से अगस्त 2011 तक राष्ट्रपति बराक ओबामा के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका के वाणिज्य विभाग में उप सहायक सचिव के रूप में भी काम किया। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना कैलिफोर्निया से चौथी बार जीते हैं। उनका जन्म 13 सितंबर, 1976 में फिलाडेल्फिया में एक भारतीय पंजाबी हिंदू परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता पंजाब से यूएस में आकर बस गए। उनके दादा ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था। लाला लाजपत राय के सहयोगी रहे थे। वे चर्चित वकील और ‘हाउस आर्म्ड सर्विस एक्ट’ के सदस्य भी हैं। वह 2017 से कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद हैं।

राजा कृष्णामूर्ति
डेमोक्रेट राजा कृष्णामूर्ति शिकागो वेस्ट से जीते हैं। लंबे समय तक ओबामा की टीम में रहे। राजा कृष्णमूर्ति का जन्म 19 जुलाई 1973 को नई दिल्ली में हुआ था। वे महज तीन महीने के थे जब उनके माता-पिता अमेरिका आकर बस गए। राजा कृष्णमूर्ति 2004 और 2008 के चुनाव में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार थे। कृष्णमूर्ति पेशे से वकील और इंजीनियर हैं। उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की डिग्री ली।

एमी बेरा
एमी बेरा अमेरिकी हाउस की अहम कमेटियों में रह चुके हैं। वे अमेरिकी संसद के कांग्रेशनल प्रोग्रेसिव कॉकस (सीपीसी) के मेंबर रहे। अमरीश बाबूलाल या एमी बेरा एक अमेरिकी डॉक्टर और राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान अमेरिका संसद में सीनेटर हैं। उनके पिता बाबूभाई 1958 में गुजरात से अमेरिका आ गए थे। एमी बेरा का जन्म लॉस एंजिल्स में हुआ। उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से बायोलॉजिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया। 1997 से 1999 तक वह सैक्रामेंटो में मर्सी हेल्थकेयर में हेल्थ मैनेजेंट के डायरेक्टर थे। एमी बेरा संसद के सबसे वरिष्ठ भारतवंशी हैं। छठी बार कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक टिकट पर जीते।

वंदना स्लेटर
डेमोक्रेट वंदना स्लेटर राजनीति में आने से पहले 20 साल तक फार्मा कंपनी में कैमिकल साइंटिस्ट रह चुकी हैं। हाउस की साइंस कमेटी की सदस्य रहीं। वंदना का जन्म ब्रिटिश कोलंबिया में हुआ था। उनके पिता डॉक्टर हैं। उन्होंने ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय से फार्मेसी में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की। वह कॉलेज में तलवारबाजी टीम की कप्तान और बीसी जूनियर वुमन फोइल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल विजेता हैं। बैचलर डिग्री हासिल करने के बाद स्लेटर और उनके पति मिशिगन शिफ्ट हो गए थे। साल 2001 में स्लेटर को अमेरिकी नागरिकता मिली।

श्री थानेदार
डेमोक्रेट श्री थानेदार मिशीगन से जीत हासिल करने वाले पहले भारतवंशी बने। वे 1979 में अमेरिका आए थे। यहां एमबीए और पीएचडी की।

डॉ. वैंकट
डॉ. वैंकट पेंसिल्वेनिया से हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव में चुने गए पहले भारतवंशी हैं। डेमोक्रेट डॉ. वैंकट ने रिपब्लिकन प्रतिद्वंदी नर्स सिंडी को हराया।

डॉ. मेगन श्रीनिवास
डेमोक्रेट डॉ. मेगन श्रीनिवास आयोवा से जीत हासिल करने वाली दूसरी भारतवंशी बनीं। वे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हैं।

अरुणा मिलर
मोंटगोमरी काउंटी में रहने वाली अरुणा ने डेव मिलर से शादी की। उनकी 3 बेटियां हैं। 58 साल की अरुणा डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं। वो मैरीलैंड में लेफ्टिनेंट गवर्नर का पद संभालने वाली पहली अप्रवासी होंगी। उनका जन्म भारत के हैदराबाद में हुआ था। 7 साल की उम्र में वे अमेरिका आ गई थीं। उन्होंने 1989 में मिसौरी यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से सिविल इंजीनियरिंग की। 2010 से 2018 तक मैरीलैंड हाउस ऑफ डेलीगेट्स को रिप्रेजेंट किया। 2018 में पहली बार संसद पहुंचने के लिए चुनाव लड़ा।

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