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कमजोर आंखों वाली निशा ने जो किया वो आंखें चौंधिया देगा

विशेष दूरबीन से ब्लैकबोर्ड पर लिखे लेक्चर पढ़े, बनीं वन सेवा अधिकारी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 15, 2025
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। इच्छा शक्ति मजबूत हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह साबित करके दिखाया है कर्नाटक के विजयनगर जिले में कुरलगी इलाके की रहने वाली निशा एसएन ने। निशा ने बचपन से ही ऐसी चुनौतियों का सामना किया, जो मजबूत से मजबूत इंसान का हौसला हिला दे। उन्हें जन्म से ही एल्बिनिज्म नाम की आनुवंशिक बीमारी थी, जिसके वजह से उनकी नजर बेहद कमजोर थी। ब्लैकबोर्ड पर टीचर क्या लिखते हैं, उसे दिखाई नहीं देता था, पिछले बेंच से तो बिल्कुल नहीं। विशेष कोचिंग के दौरान टीचर ने अगले बेंच पर बैठने का अवसर नहीं दिया लेकिन एक साधक की तरह वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अड़ी रही। मेहनत और साधना रंग लाई और उसने यूपीएससी की भारतीय वन सेवा परीक्षा में 90वीं रैंक हासिल करके सबकी आंखें खोल दी हैं।

निशा 12वीं क्लास में थीं, जब उनके पिता का निधन हो गया। निशा के सामने मुश्किलें ही मुश्किलें थीं। लेकिन वो अपने लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश में जुटी रहीं। पापा सरकारी नौकरी में थे। परिवार के लिए पूरी तरह से बस वही एक सहारा थे लेकिन, कभी नहीं सोचा था कि ऐसा मनहूस दिन भी देखना पड़ेगा। अचानक वो सबको छोड़कर चले गए। पूरा परिवार अचानक से टूट गया। तीन साल तक न कोई निश्चित इनकम थी और न कोई उम्मीद।

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टीचर और दोस्तों ने दिया साथ
अपने गांव के स्कूल से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद निशा ने कॉलेज ऑफ फॉरेस्ट्री से बीएससी फॉरेस्ट्री की डिग्री हासिल की। निशा बताती हैं कि उनकी ये यात्रा बिलकुल भी आसान नहीं थी। निशा की कमजोर नजर के कारण आसान काम भी काफी मुश्किल हो गए थे। हालांकि इस दौरान उनके शिक्षक और दोस्त मजबूती से उनके साथ खड़े रहे। इन सबने मिलकर उनके लिए आगे की बेंच में बैठने की विशेष व्यवस्था की। उनके दोस्तों ने तो इतना साथ दिया कि खुद निशा के नोट्स तैयार किए।

हां, तुम परीक्षा दे सकती हो
अपनी कमजोर दृष्टि के कारण निशा प्रदेश की फॉरेस्ट सर्विस में नहीं जा सकती थीं लेकिन यहां एक और अच्छी बात हुई। कर्नाटक सरकार के सामाजिक कल्याण मंत्रालय ने उन्हें निशुल्क कोचिंग कार्यक्रम के लिए चुना। कोचिंग सेंटर ने उन्हें बताया कि उनकी कमजोर नजर के बावजूद वो भारतीय वन सेवा की परीक्षा दे सकती हैं।

कोचिंग क्लास की वो मुश्किल
निशा ने कोचिंग सेंटर के टीचर से कहा कि उनकी नजर कमजोर है, इसलिए उन्हें आगे की सीट मिल जाए तो अच्छा होगा, लेकिन टीचर ने उनकी मांग पर अपने हाथ खड़े कर दिए। अब ऐसी हालत में निशा आगे की सीट पर बैठने के लिए हर दिन 30 से 40 मिनट पहले सेंटर पहुंच जाती थीं।

और आखिरकार निशा ने हासिल की कामयाबी
निशा ने अपनी तैयारी के दौरान बोर्ड पर लिखे कंटेंट को पढ़ने के लिए विशेष दूरबीन का इस्तेमाल किया।
हालांकि यहां समस्या ये थी कि इससे उन्हें अक्सर सिरदर्द और आंखों में खिंचाव महसूस होने लगा। निशा बताती हैं कि वो टीचर के लेक्चर समझ सकें, इसके लिए पूरी तरह से उन्हें सुनने और समझने पर फोकस करती थीं। ये सब बहुत मुश्किल था, लेकिन निशा जानती थीं कि अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए ये सब जरूरी है। और ऐसी ही चुनौतियों के बीच, निशा ने साल 2023 में यूपीएससी के तहत भारतीय वन सेवा की परीक्षा दी। उनका रिजल्ट वाकई करिश्माई था। निशा को परीक्षा में 90वीं रैंक हासिल हुई।

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