• Latest
  • Trending

जमानत के बाद हिरासत बढ़ाने के लिए लगातार एफआईआर दर्ज करना प्रक्रिया का दुरुपयोग

February 25, 2026
प्रधानमंत्री मोदी

भारत की विकास गाथा: स्टार्टअप, व्यापार, डेटा और खादी

October 13, 2026
प्याज

प्याज महंगा, सेना को 27 पदक और नई रक्षा पहल

October 13, 2026
dal

दाल का आयात बिल 14,634 करोड़ रुपये घटा

October 12, 2026
daily-news

सप्ताह की समीक्षा: रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी, GST नियमों में राहत और रिकॉर्ड रक्षा निर्यात

October 11, 2026
daily-news

14416 पर चार साल में 47.75 लाख कॉल

October 10, 2026
medicine

दवा, कोयला, खादी और व्यापार पर सरकार के नए कदम

October 9, 2026
अर्थव्यवस्था

जीएसटी सुधार, नाविकों की संख्या और भारतनेट का विस्तार

October 9, 2026
यशोभूमि, नई दिल्ली में 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 8 अक्टूबर 2026। श्रेय : पीएमओ (pmindia.gov.in)

किसान के फोन पर किस्त, हर जिले में 5जी

October 8, 2026
यूपीआई और डीपीआई ने बदली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था

कर्ज महंगा, पर अर्थव्यवस्था 7.1% की रफ्तार पर

October 7, 2026
भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

October 6, 2026
भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा...!

भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा…!

October 5, 2026
jai-shankar

न्यूयॉर्क में दिखी नए भारत की ‘दबंग कूटनीति’

October 5, 2026
Tuesday, October 13, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

जमानत के बाद हिरासत बढ़ाने के लिए लगातार एफआईआर दर्ज करना प्रक्रिया का दुरुपयोग

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 25, 2026
in the blitz
0
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी आरोपी को जमानत मिलने के बाद भी उसे हिरासत में बनाए रखने के उद्देश्य से लगातार नई एफआईआर दर्ज करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है और ऐसे मामलों में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप उचित है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की खंडपीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनाया जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य ने जानबूझकर आपराधिक प्रक्रिया का सहारा लेकर याचिकाकर्ता को “सलाखों के पीछे” बनाए रखा, जबकि उसे जमानत मिल चुकी थी।

मामला क्या था?
मामले की शुरुआत 20 मई 2025 को रांची एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा आईपीसी और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट ,1988 के तहत दर्ज एक एफआई से हुई। इसी एफआईआर में पूछताछ के दौरान, हजारीबाग एसीबी ने 2010 में कथित रूप से वन भूमि के म्यूटेशन से संबंधित एक और एफआईआर दर्ज कर दी—यानी कथित घटना के 15 वर्ष बाद। इसके बाद 2025 में दो और एफआईआर दर्ज की गईं। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि यह पूरी प्रक्रिया जमानत आदेशों को निष्प्रभावी करने और आरोपी को निरंतर हिरासत में रखने की एक सुनियोजित कोशिश थी।

YOU MAY ALSO LIKE

भारत की विकास गाथा: स्टार्टअप, व्यापार, डेटा और खादी

प्याज महंगा, सेना को 27 पदक और नई रक्षा पहल

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने यह दलील दी कि चूंकि जमानत का वैकल्पिक उपाय उपलब्ध है, इसलिए अनुच्छेद 32 के तहत याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया मामला बनता है, तो अनुच्छेद 32 के तहत याचिका सुनने से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने डॉ. बी.आर. आंबेडकर के उस कथन को उद्धृत किया जिसमें अनुच्छेद 32 को संविधान का “हृदय और आत्मा” बताया गया था।

कोर्ट ने पाया कि “लगातार एफआईआर दर्ज करना और जमानत मिलने के तुरंत बाद नए मामलों में रिमांड लेना यह दर्शाता है कि अभियोजन पक्ष ने जानबूझकर यह सुनिश्चित किया कि याचिकाकर्ता हिरासत में ही रहे।” अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि 17 दिसंबर 2025 को जमानत मिलने के बाद 19 और 20 दिसंबर 2025 को अलग-अलग एफआईआर में पुनः पुलिस रिमांड लिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आरोपी को निरंतर हिरासत में रखने का प्रयास किया गया। आदेश सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि वह ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करेगा, सभी सुनवाई तिथियों पर उपस्थित रहेगा और जांच में सहयोग करेगा। इस प्रकार, अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के बाद लगातार एफआईआर दर्ज कर हिरासत बनाए रखना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में शीर्ष अदालत हस्तक्षेप करेगी।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation