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सिर्फ जानवरों का चारा मत समझिए, पराली से बन रही है ‘पावर’

by ब्लिट्ज़ इंडिया
March 11, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। आपको याद होगा दिवाली के आसपास का समय। उस समय देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में स्मॉग की एक मोटी सी चादर फैल गई थी। यह राष्ट्रीय समाचार की सुर्खी बनी थी। तब कई राजनीतिक दलों ने दावा किया था कि यह पंजाब के किसानों द्वारा जलाए जाने वाले पराली (धान की फसल का पुआल) की वजह से है लेकिन पंजाब में अब पराली जलाने की घटना में कमी आ गई है। सरकार इस समय पराली से बिजली बनाने की परियोजना पर काम कर रही है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार विभिन्न तरह के प्रोत्साहन भी दे रही है। इसका असर दिखना शुरू हुआ और पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में ऐसे थर्मल पावर प्लांट लगने शुरू हो गए जिसमें कोयले के बदले पराली को जलाया जाता है।

आपने यदि कभी धान की फसल देखी होगी तो आपको पराली के बारे में समझने में आसानी होगी। जब धान की फसल पक जाती है तो पंजाब और हरियाणा में इसकी कटाई या हार्वेस्टिंग मशीन से होती है। इस प्रक्रिया में खेतों में हार्वेस्टर चलता है और धान निकाल लिया जाता है। इसके बाद खेत में धान का पौधा खड़ा रह जाता है। इसे ही पंजाब में ‘पराली’ कहते हैं। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे ‘पुआल’ कहते हैं। बिहार में तो धान की फसल को पहले काटा जाता है, फिर पुआल का छोटा-छोटा ‘अंटिया’ बनाया जाता है। उसे ही झाड़ कर धान निकाला जाता है। धान निकालने के बाद पुआल बच जाता है।

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पराली प्रबंधन
बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा आदि जैसे राज्यों में आपने कभी नहीं सुना होगा कि किसान ‘पुआल’ या ‘पराली’ को जलाते हैं। इन राज्यों में धान निकालने के बाद पुआल का उपयोग जानवरों के चारे में होता है। इन राज्यों में झोपड़ी के छप्पर भी पुआल से बनाए जाते हैं। पशुपालक किसान आमतौर पर पूरे साल के लिए पुआल खरीद कर रख लेते हैं और उसे चारा कल या गंड़ासे से काट कर जानवरों को खिलाते हैं। इसलिए यह महंगा भी बिकता है।

पंजाब में किसान जला देते थे पराली
पंजाब के किसान समृद्ध हैं। वहां पशुओं को ज्यादातर हरा चारा खिलाया जाता है। इसलिए वहां पराली को काटा नहीं जाता था बल्कि परंरपरागत रूप से जला दिया जाता था। इससे प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होने लगी। इसके बाद सरकार ने पराली पराली जलाने पर रोक लगा दी। तब भी किसान इसे चोरी-छिपे जलाते थे। तब इससे पावर यानी बिजली बनाने के कंसेप्ट पर काम शुरू हुआ।

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