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दिनभर खेत में काम, फिर पढ़ाई, रंग लाई मेहनत और सोनू बन गए डीएसपी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2026
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दिनभर खेत में काम, फिर पढ़ाई, रंग लाई मेहनत और सोनू बन गए डीएसपी

ब्लिट्ज ब्यूरो

भोपाल। ‘पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं।’ यह कहावत चरितार्थ की है मध्य प्रदेश के रहने वाले सोनू कुर्मी ने। गरीबी और संघर्ष को देखते हुए परिवार के साथ खेतों में काम किया। हमेशा सोचते कि उनके पास वो चीजें क्यों नहीं हैं, जो और लोगों के पास हैं। बस यहीं से उन्होंने अपनी किस्मत बदलने का फैसला कर लिया। दराती लेकर खेत में दिनभर काम किया और रात में पढ़ाई के लिए किताबें भी उठाईं। सीमित संसाधनों, गरीबी और कठिन परिस्थितियों में कुछ बड़ा करने का सपना लेकर आगे बढ़े और एमपीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की। आज वह डीएसपी हैं।

मध्य प्रदेश के हैं निवासी, खेती-किसानी के बीच देखे बड़े सपने

सोनू कुर्मी मध्य प्रदेश के सागर जिले के एक गांव में साधारण किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने जोश टाॅक के वीडियो में अपनी जर्नी साझा करते हुए बताया कि ग्रामीण परिवेश में पले बढ़े। जीवन यापन के लिए खेतों पर निर्भर रहना पड़ता था। बचपन से ही उन्होंने कठिन परिश्रम और संघर्ष को करीब से देखा।

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किताबों को बनाया साथी

वह बताते हैं कि उनका परिवार खेतों में काम करता था और वह भी अपने परिवार के साथ खेती-किसानी करने लगे। जब वह खेतों में काम के लिए जाते थे तो पहले नहीं सोचते थे कि वह कभी प्रशासनिक अफसर बनेंगे क्योंकि उनके ऐसा आसपास माहौल नहीं था। लेकिन उन्हें आगे कुछ करना था और यही वजह थी उन्होंने किताबों को साथी बनाया। यही सोच उनके भविष्य की नींव बनी।

हिंदी मीडियम से की पढ़ाई, शुरुआत में मिली असफलताएं

सोनू ने हिंदी मीडियम से पढ़ाई की थी। अपने करियर की शुरुआत में उन्हें कई असफलताओं का सामना करना पड़ा। पहला जॉब इंटरव्यू असफल होने के बाद वे मानसिक रूप से टूट गए और निराशा के दौर से गुजरे।

गरीबी और आत्म-संदेह ने उनके आत्मविश्वास को भी प्रभावित किया। लेकिन इस कठिन समय में परिवार का सहयोग उनके लिए सहारा बना। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को संभाला और जीवन में आगे बढ़ने का निर्णय लिया।

शिक्षा की नई शुरुआत, एमपीपीएससी की तैयारी का सफर

असफलताओं के बाद सोनू ने हरीसिंह विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई के साथ-साथ वे परिवार की आर्थिक मदद भी करते रहे। इसी दौरान एमपीपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। खेतों में काम करते हुए भी वे किताबों को साथ रखते थे और हर खाली समय में पढ़ाई करते थे। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका ध्यान लक्ष्य पर केंद्रित रहा।

एमपीपीएससी परीक्षा में हासिल की 18वीं रैंक

पहले प्रयास में वह असफल हो गए थे लेकिन दूसरे अटेंप्ट में 18वीं रैंक हासिल की और डीएसपी बने। उनकी कहानी बताती हैं कि असफलताएं रुकने का नहीं बल्कि नई शुरुआत का रास्ता होती हैं। उनका संदेश है कि धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को पूरा कर सकता है। उन्हें अपने परिवार का साथ भी खूब मिला।

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