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3 बार प्रीलिम्स में फेल, चौथे प्रयास में यूपीएससी में हासिल की 26वीं रैंक

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3 बार प्रीलिम्स में फेल, चौथे प्रयास में यूपीएससी में हासिल की 26वीं रैंक

इंटरव्यू से पहले हो गया था मां का निधन, फिर भी नहीं खोया आत्मविश्वास

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2026
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3 बार प्रीलिम्स में फेल, चौथे प्रयास में यूपीएससी में हासिल की 26वीं रैंक

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करना लाखों युवाओं का सपना होता है लेकिन इस मंजिल तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं होता। कई बार असफलताएं रास्ता रोकती हैं, कई बार हालात हिम्मत तोड़ने की कोशिश करते हैं। उत्तर प्रदेश के बागपत की रहने वाली रूपल राणा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो बताती है कि अगर इरादा मजबूत हो तो लगातार मिलने वाली नाकामियां भी सफलता का रास्ता बन सकती हैं। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में ऑल इंडिया रैंक 26 हासिल करने वाली रूपल राणा ने यह मुकाम अपने चौथे प्रयास में हासिल किया। उनकी यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि सीखने, खुद को बदलने और हर असफलता से आगे बढ़ने की मिसाल है।

बागपत से दिल्ली तक का सफर

रूपल राणा की शुरुआती पढ़ाई बागपत में हुई। दसवीं तक की शिक्षा वहीं पूरी करने के बाद वह राजस्थान के पिलानी चली गईं ं, जहां उन्होंने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से गणित विषय में स्नातक की पढ़ाई की। कॉलेज के दूसरे वर्ष में पहली बार उन्हें यूपीएससी परीक्षा के बारे में विस्तार से जानकारी मिली। उसी समय उन्होंने तय कर लिया कि वह सिविल सेवा में जाना चाहती हैं। गणित और विज्ञान की छात्रा होने के कारण उनके लिए इतिहास, राजनीति और समसामयिक घटनाओं जैसे विषय बिल्कुल नए थे, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया।

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असफल प्रयासों ने सिखाए बड़े सबक

रूपल के पहले तीन प्रयास प्रीलिम्स चरण में ही समाप्त हो गए। हालांकि उन्होंने इन असफलताओं को हार नहीं माना बल्कि सीखने का अवसर बनाया। पहले प्रयास के बारे में वह खुद मानती हैं कि उनकी तैयारी पूरी नहीं थी। उन्होंने परीक्षा को केवल अनुभव लेने के लिए दिया था। दूसरे और तीसरे प्रयास में उन्होंने काफी पढ़ाई की, लेकिन परीक्षा हॉल में एक बड़ी गलती कर बैठीं। नकारात्मक अंकन के डर से उन्होंने बहुत कम प्रश्नों के उत्तर दिए। दूसरे प्रयास में उन्होंने केवल 71 और तीसरे प्रयास में 78 प्रश्न हल किए। बाद में उन्हें महसूस हुआ कि यही रणनीति उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई थी।

रणनीति बदली और किस्मत भी बदल गई

तीसरे प्रयास के बाद रूपल ने अपनी पूरी तैयारी का गहराई से विश्लेषण किया। उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अध्ययन शुरू किया और समझने की कोशिश की कि यूपीएससी सवाल किस तरह पूछता है। इसके साथ ही उन्होंने मॉक टेस्ट में अधिक प्रश्न हल करने की आदत डाली। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ने लगा और अंक भी बेहतर आने लगे। चौथे प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स में 94 प्रश्नों के उत्तर दिए। परिणाम यह रहा कि उन्होंने कटऑफ से 23 अंक अधिक प्राप्त किए और आराम से अगले चरण में पहुंच गईं। रूपल का मानना है कि सफलता का रास्ता सीमित और भरोसेमंद स्रोतों से होकर गुजरता है। उनके अनुसार एक किताब को कई बार पढ़ना, कई किताबों को एक बार पढ़ने से कहीं ज्यादा उपयोगी है।

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