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वी2वी तकनीक से रोके जाएंगे देश में सड़क हादसे

गाड़ियां आपस में सीधे करेंगी ‘बात’ - पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 5000 करोड़ रुपये

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 17, 2026
in the blitz
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विनोद शील
नई दिल्ली। सरकार साल के अंत तक एक ऐसी तकनीक लाने पर विचार कर रही है जिससे सड़क हादसों पर ब्रेक लगाने में मदद मिलेगी। कल्पना कीजिए कि आप घने कोहरे में गाड़ी चला रहे हैं और सामने कुछ दिखाई नहीं दे रहा है पर आपकी कार आपको पहले ही बता दे कि आगे खड़ी गाड़ी कितनी दूर है अथवा पीछे से तेज गति से वाहन आ रहा है और सिस्टम आपको अलर्ट कर दे। जब विजिबिलिटी लगभग जीरो हो जाती है, तब यह टेक्नोलॉजी ड्राइवर के लिए ‘तीसरी आंख’ का काम करेगी।

इसलिए सरकार अब इसी तरह की एक ख़ास तकनीक व्हीकल-टू-व्हीकल यानी वी2वी कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को वाहनों में लगाने की योजना पर काम कर रही है।

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उम्मीद है कि साल 2026 के अंत तक देश में वी2वी टेक्नोलॉजी लागू हो जाए। इसका सीधा मकसद है सड़कों पर हादसों की संख्या को कम करना और यात्रियों की जान बचाना।

नितिन गडकरी ने क्या कहा
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्य परिवहन मंत्रियों के साथ सालाना बैठक के बाद इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में इस टेक्नोलॉजी पर विस्तार से चर्चा हुई है और इसे शीघ्र लागू किया जाएगा। गडकरी के मुताबिक यह सिस्टम खास तौर पर पार्क की गई गाड़ियों और कोहरे में होने वाले हादसों को रोकने में बेहद कारगर साबित होगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने इसे रोड सेफ्टी की दिशा में बड़ा कदम बताया।
उन्होंने कहा कि दुनिया के बहुत कम देशों में इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। भारत में इसे लागू करना एक बड़ी उपलब्धि होगी। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 5000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
कैसी होगी यह टेक्नोलॉजी
यह सिस्टम एक खास डिवाइस के जरिए काम करेगा जो सिम कार्ड जैसी होगी और गाड़ी में लगाई जाएगी। यह डिवाइस आसपास मौजूद अन्य वाहनों से सिग्नल लेकर जानकारी साझा करेगी ताकि सड़क पर मौजूद सभी वाहनों में कम्युनिकेशन सिस्टम डेवलप हो सके। हालांकि इस सिस्टम के एक्टिव होने के बाद चालक को इससे मिलने वाले किसी भी तरह के अलर्ट पर तुरंत रिएक्ट करना जरूरी होगा।
कैसे मददगार होगी यह तकनीक
यह टेक्नोलॉजी सुरक्षित दूरी बनाए रखने में मदद करेगी। साथ ही सड़क किनारे खड़ी या रुकी हुई गाड़ियों के बारे में भी ड्राइवर को चेतावनी देगी। यह सिस्टम 360 डिग्री पर काम करेगा। यानी आगे, पीछे और दोनों तरफ से आने वाले वाहनों के सिग्नल ड्राइवर तक पहुंचेंगे।

क्या देने होंगे पैसे
जैसा कि बताया गया है कि इस परियोजना की कुल लागत लगभग 5000 करोड़ रुपये आंकी गई है। उपभोक्ताओं से भी इसके लिए शुल्क लिया जाएगा लेकिन इसकी कीमत अभी तय नहीं की गई है। इसके बारे में अभी आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा भी नहीं की गई है।
परिवहन मंत्रालय 2026 के अंत तक इस टेक्नोलॉजी को नोटिफाई करने की तैयारी में है। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से सभी वाहनों में लागू किया जाएगा। शुरुआत में यह सिस्टम सिर्फ नई गाड़ियों में लगाया जाएगा। वी2वी सिस्टम एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम यानी एडीएएस के साथ मिलकर काम करेगा। अभी कुछ महंगी एसयूवी में इस तरह की तकनीक मौजूद है लेकिन वह सेंसर पर आधारित है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन गाड़ियों को भी नए सिस्टम के हिसाब से अपडेट किया जाएगा। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि वी2वी टेक्नोलॉजी आने वाले समय में सड़क हादसों को कम करने और ट्रैफिक सेफ्टी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो 2026 के बाद भारतीय सड़कों पर गाड़ियां सिर्फ चलेंगी नहीं, बल्कि एक-दूसरे से बात भी करेंगी।

क्यों सरकार इसे सड़क सुरक्षा में ‘गेम-चेंजर’ मानती है?
भारत में दुनिया में सबसे अधिक सड़क दुर्घटना में मौतें होती हैं। इनमें पीछे से टकराव, कोहरे में कई गाड़ियों की टक्कर, और सड़कों के किनारे खड़ी गाड़ियों से टक्कर जैसे मामले आम हैं। सड़क हादसे रोकने में यह मददगार होगा।

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