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चीन का खेल खत्म! ईवी और डिफेंस सेक्टर में भारत की लंबी छलांग

लोहम ने की रेयर अर्थ मैग्नेट्स की शुरुआत

by ब्लिट्ज़ इंडिया
March 11, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। इलेक्टि्रक वाहनों (ईवी), पवन ऊर्जा, रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में उपयोग होने वाले रेयर अर्थ मैग्नेट्स को लेकर भारत लंबे समय से चीन पर निर्भर रहा है लेकिन अब इस निर्भरता को कम करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। बैटरी रीसाइक्लिंग और क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र की अग्रणी कंपनी लोहम ने भारत में घरेलू स्तर पर रेयर अर्थ मैगनेट रीसाइक्लिंग की शुरुआत की है।

अब तक भारत में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन मैग्नेट चीन से आयात किए जाते रहे हैं।

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हाल के महीनों में चीन द्वारा रेयर अर्थ से जुड़े कच्चे माल और मैग्नेट्स की सप्लाई पर लगाए गए प्रतिबंधों ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इससे ईवी, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में लोहम की यह पहल भारत के लिए रणनीतिक आत्मनिर्भरता और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

लोहम अपनी उन्नत मेटलर्जिकल और सर्कुलर इकॉनॉमी आधारित तकनीक के ज़रिये ईवी मोटर्स, विंड टर्बाइंस, इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप और औद्योगिक कचरे से रेयर अर्थ मैग्नेट्स की रिकवरी और रीसाइक्लिंग कर रही है। इसका उद्देश्य भारत में ही डोमेस्टिक सेकेंडरी सप्लाई चेन विकसित करना है, जिससे घरेलू ईवी और रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों को स्थिर, किफायती और भरोसेमंद कच्चा माल उपलब्ध हो सके।

यह पहल हालिया केंद्रीय बजट और सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं के भी अनुरूप है। बजट में क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन मोबिलिटी, सर्कुलर इकॉनॉमी और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर विशेष ज़ोर दिया गया है। सरकार का फोकस आयात निर्भरता घटाने, वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग और रिसोर्स एफिशिएंसी बढ़ाने पर है, जिसमें रेयर अर्थ मैगनेट रीसाइक्लिंग को अहम कड़ी माना जा रहा है।

लोहम के निदेशक तरुण सिंघल ने कहा, “भारत के लिए रेयर अर्थ मैगनेट रीसाइक्लिंग केवल एक व्यावसायिक अवसर नहीं, बल्कि नीतिगत आवश्यकता है। हमारी उन्नत तकनीक के माध्यम से हम आयात निर्भरता कम करते हुए एक स्थायी, लो-कार्बन और सर्कुलर सप्लाई चेन बना रहे हैं, जो ईवी, रिन्यूएबल एनर्जी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करेगी।”

कंपनी सूत्रों के अनुसार, रीसाइक्लिंग के ज़रिये प्राप्त रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उपयोग भारत में ही मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक मोटर्स और अन्य हाई-टेक इंडस्ट्री में किया जाएगा। इससे आयात लागत में कमी आएगी और विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता घटेगी। साथ ही, पारंपरिक रेयर अर्थ माइनिंग की तुलना में रीसाइक्लिंग एक पर्यावरण-अनुकूल और सस्टेनेबल विकल्प के रूप में उभर रही है, जिससे कार्बन फुटप्रिंट और पर्यावरणीय नुकसान भी कम होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में ईवी और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के तेज़ विस्तार के साथ रेयर अर्थ मैग्नेट्स की मांग कई गुना बढ़ेगी. ऐसे में लोहम जैसी घरेलू कंपनियों की यह पहल ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के लक्ष्यों को मज़बूती देने के साथ-साथ भारत को रेयर अर्थ वैल्यू चेन में एक सशक्त खिलाड़ी बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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