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क्रिमिनल्स की तुरंत होगी पहचान डमी कैंडिडेट नहीं कर पाएंगे खेल

एआई संचालित फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम किया विकसित

by ब्लिट्ज़ इंडिया
March 4, 2026
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

जयपुर। दिल्ली में हुए एआई समिट 2026 को लेकर खूब चर्चा हो रही है। इस समिट के जरिए दुनिया ने भारत की टेक्नो पावर को जाना। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़ी एक खबर राजस्थान से भी सामने आई है। एआई तकनीक से प्रदेश में क्राइम कंट्रोल में बड़ी मदद होने वाली है। सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग की ओर से इस संबंध में जानकारी दी गई है। डीओआईटीसी राजस्थान के आयुक्त हिमांशु गुप्ता ने बताया कि विभाग के सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर की ओर से डेवलप कंप्यूटर विजन-आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फेस सिमिलैरिटी सर्च समाधानों की सिरीज को सफलतापूर्वक डिप्लॉय किया है। इस अनूठी एआई प्रणाली से राजस्थान में पब्लिक सर्विस डिलिवरी के क्षेत्र में आसानी से काम होगा। इसके अलावा डिपार्टमेंट ने जो सिस्टम तैयार किया है, उससे कानून व्यवस्था को सुचारू करने में भी मदद मिलगी। नागरिक सुरक्षा में भी ये एडवांस टेक्नोलॉजी मील का पत्थर साबित हो रही है।

सरकारी एग्जाम में मिलेगी मदद
प्रतियोगी परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थियों के केस सामने आते रहते हैं। डमी कैंडिडेट्स को पहचानने में एआई सिस्टम मदद करेगा। विभाग ने एआई-संचालित फेस सिमिलैरिटी सर्च सिस्टम विकसित किया है। इस एप्लिकेशन की मदद से संदिग्ध अभ्यर्थी के फोटोग्राफ का पंजीकृत अभ्यर्थियों के 50 लाख रिकॉर्ड वाले मौजूदा डेटाबेस से मिलान संभव हो रहा है। उच्च-सटीकता वाले फेस सिमिलैरिटी मिलान के माध्यम से संभावित डमी कैंडिडेट के मामलों की पहचान करने में एजेंसियों को सफलता भी मिल चुकी है। यह एआई पहल सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाएगी।

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सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग की ओर से बनाए गए सिस्टम से लॉ एंड ऑर्डर को दुरुस्त करने में मदद मिलेगी। वहीं क्राइम इंवेस्टिगेशन में भी पुलिस को बड़ी सहायता मिलेगी। प्रदेश में विभिन्न मामलों में आदतन अपराधियों की पहचान में यह सिस्टम सहायक हो रहा है। इसकी मदद से अभियुक्त की छवियों का 10 लाख फोटो युक्त रिकॉर्ड वाले आपराधिक डेटाबेस से मिलान किया जा सकता है। इससे अनेक अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों की पहचान आसान हो रही है। यह एआई-संचालित प्रणाली एजेंसियों की पैटर्न पहचान, आदतन अपराधियों की निगरानी एवं जांच में तीव्रता लाने में मददगार साबित हो रही है।

लावारिस शवों की त्वरित पहचान
सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग ने एक ऐसा फेस सिमिलैरिटी सर्च समाधान लागू किया है, जो मानवीय और जनसेवा में भी बड़ा काम करेगा। विभाग की इस पहल से लावारिस शवों की पहचान आसानी से होगी। लावारिस शवों की पहचान हेतु गुमशुदा व्यक्तियों, आपराधिक एवं अन्य डेटाबेस से मिलान करने में सहायता करता है। इस एप्लिकेशन के माध्यम से अज्ञात शवों के फोटोग्राफ का गुमशुदा व्यक्तियों एवं अन्य इमेज डेटाबेस से मिलान किया जा सकता है।

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