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कोविड के बाद प्रदूषण सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 3, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी समेत देश के अधिकांश महानगरों की खराब हो रही आबोहवा के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के बाद भारत जिस सबसे बड़े स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है, वह वायु प्रदूषण है।
ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय मूल के श्वसन रोग विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात साल दर साल और बिगड़ेंगे। विशेषज्ञों ने कहा कि देश में श्वसन संबंधी बीमारियों का एक बड़ा संकट धीरे-धीरे विकराल रूप ले रहा है, जो अभी न तो बड़े पैमाने पर पहचाना गया है और न ही इसके समाधान के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की वायु प्रदूषण पर रपटें लगातार यह बताती हैं कि वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है, जिससे हर साल लाखों लोग मरते हैं, खासकर बच्चे, और विश्व के देशों के मौजूदा कानून अपर्याप्त हैं।
केंद्र सरकार की विभिन्न रपट में भी कहा गया है कि वायु प्रदूषण भारत के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य और आर्थिक समस्या है। वर्ष 2025 में आई लैंसेट रपट के मुताबिक, वर्ष 2022 में भारत में प्रदूषण से करीब 17 लाख लोगों की मौत हुई जिसमें 7.5 लाख मौतें जीवाश्म ईंन्धन के कारण थीं।
भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में से एक है, जहां हवा में जहरीले तत्व विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से काफी ऊपर हैं। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गत सप्ताह स्वीकार किया कि दिल्ली में लगभग 40 प्रतिशत प्रदूषण परिवहन क्षेत्र से आता है, जो मुख्य रूप से जीवाश्म ईंन्धन पर निर्भर है।
ब्रिटेन में कार्यरत कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने कहा कि सांस संबंधी बीमारियों का यह छिपा हुआ संकट धीरे-धीरे गंभीर रूप ले रहा है और आने वाली लहर भारत के लोगों और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा व दीर्घकालिक असर डाल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दशक में विश्वभर में हृदय रोग के मामलों में वृद्धि केवल मोटापे के कारण नहीं हुई, बल्कि इसका मुख्य कारण कारों और विमानों सहित शहरी परिवहन से निकलने वाले जहरीले उत्सर्जन हैं।
यह समस्या भारत, ब्रिटेन और अन्य देशों के शहरों में विशेष रूप से गंभीर है। ‘लिवरपूल’ के सलाहकार श्वसन रोग विशेषज्ञ एवं भारत की कीविड-19 सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य मनीष गौतम ने कहा,’भारत सरकार का वायु प्रदूषण पर पुनः ध्यान केंद्रित करना जरूरी है। उत्तर भारत में रहने वाले लाखों लोगों के लिए नुकसान पहले ही हो चुका है। हाल में जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे बहुत कम हैं। सांस संबंधी बीमारियों का एक बड़ा संकट धीरे-धीरे हमारे सामने बढ़ रहा है। वर्षों तक प्रदूषण की जद में रहने के कारण फेफड़ों की स्वास्थ्य आपात स्थिति धीरे-धीरे सामने आ रही है।’
चिकित्सकों के अनुसार, दिसंबर में सिर्फ दिल्ली के अस्पतालों में श्वसन संबंधी परेशानियों से जूझ रहे मरीजों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत वृद्धि देखी गई, जिनमें कई ऐसे मरीज थे जो पहली बार इससे पीड़ित हुए थे और युवा थे। लंदन के ‘सेंट जार्ज यूनिवर्सिटी अस्पताल’ के मानद हृदय रोग विशेषज्ञ राजय नारायण के अनुसार, वायु प्रदूषण और हृदय, श्वसन, तंत्रिका संबंधी सहित कई बीमारियों के बीच वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं। यदि समय रहते हल नहीं किया गया, तो यह स्वास्थ्य और आर्थिक बोझ दोनों को और बढ़ा देगा।

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