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महाराष्ट्र के सरकारी दफ्तरों में अब सिर्फ मराठी में ही बात और काम

आदेश नहीं मानने पर होगा एक्शन

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 9, 2025
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ब्लिट्ज ब्यूरो

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों में सभी अधिकारियों के लिए केवल मराठी में बात करना अनिवार्य कर दिया। इस संबंध में जारी सरकारी प्रस्ताव (जीआर) में यह भी कहा गया है कि स्थानीय स्वशासन, सरकारी निगमों और सरकारी सहायता प्राप्त प्रतिष्ठानों में मराठी बोलना अनिवार्य है। जीआर में चेतावनी दी गयी है कि दोषी अधिकारियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
पिछले वर्ष स्वीकृत मराठी भाषा नीति में भाषा के संरक्षण, संवर्धन, प्रसार और विकास के लिए उठाए गए कदमों को आगे बढ़ाने को कहा गया था। इसके लिए सभी सार्वजनिक मामलों में मराठी के उपयोग की सिफारिश की गई थी।

सूचना पट्ट भी मराठी में
जीआर में यह भी कहा गया है कि सभी कार्यालयों में पीसी (पर्सनल कंप्यूटर) कीबोर्ड पर रोमन वर्णमाला के अलावा मराठी देवनागरी वर्णमाला भी होनी चाहिए। साथ ही मराठी में सूचना पट्ट लगाना भी अनिवार्य होगा। सरकारी खरीद और अनुदान योजना के तहत खरीदे जाने वाले सभी कंप्यूटरों के कीबोर्ड मराठी के साथ-साथ रोमन लिपि में भी होने चाहिए।

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शिकायत की प्रक्रिया
राज्य नियोजन विभाग के उप सचिव मिलिंद कुलकर्णी ने इस संबंध में सरकारी संकल्प जारी किया। इसके अनुसार मराठी भाषा में संवाद न करने वाले सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों के बारे में संबंधित कार्यालय प्रमुख या विभाग प्रमुख को शिकायत की जा सकती है। कार्यालय प्रमुख या विभाग प्रमुख मामले की पुष्टि करेंगे और जांच के बाद यदि संबंधित सरकारी अधिकारी/कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, शिकायतकर्ता को कार्यालय प्रमुख सूचित करेगा। अगर विभागाध्यक्ष की कार्रवाई दोषपूर्ण या असंतोषजनक पाई जाती है, तो विधानसभा की मराठी भाषा समिति में अपील की जा सकती है।

वेबसाइट पर सूचनाएं भी मराठी में
महाराष्ट्र राजभाषा अधिनियम, 1964 के अनुसार, निषिद्ध उद्देश्यों को छोड़कर, सभी सरकारी कार्यालय दस्तावेज, सभी पत्राचार, नोटिस, आदेश और संदेश मराठी में होंगे और कार्यालय स्तर पर सभी प्रकार की प्रस्तुतियां और वेबसाइट भी मराठी में होंगी। जिला स्तर पर मराठी भाषा नीति को लागू करने का काम जिला स्तरीय मराठी भाषा समिति को सौंपा जाएगा। सरकार के अनुमोदित उद्यमों द्वारा विभिन्न मीडिया आउटलेट्स को दिए जाने वाले विज्ञापनों में मराठी भाषा का उपयोग अनिवार्य होगा। इसके अलावा, सभी संबंधित विभाग मराठी भाषा नीति के कार्यान्वयन के लिए आवश्यकतानुसार धन आवंटित करने के लिए कदम उठाएंगे। सरकारी प्रस्ताव में कहा गया है कि मराठी भाषा विभाग ने राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद राज्य की मराठी भाषा नीति की घोषणा की है।

कंप्यूटर में भी मराठी में होगी बात
एक अधिकारी ने कहा, ‘मराठीकरण आवश्यक है। इसके लिए सभी स्तरों पर संचार और लेन-देन के लिए मराठी भाषा का उपयोग करना आवश्यक है।’

इसे ध्यान में रखते हुए, मराठी भाषा नीति में शिक्षा, उच्च और तकनीकी शिक्षा, कंप्यूटर विज्ञान, कानूनी और न्यायिक मामलों, वित्त और उद्योग और मीडिया सहित मराठी के क्षेत्रवार उपयोग के लिए सिफारिशें की गई हैं। अन्य उद्देश्यों के साथ-साथ इस नीति का मुख्य उद्देश्य अगले 25 वर्षों में मराठी को ज्ञान और रोजगार की भाषा के रूप में स्थापित करना है। सरकारी प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘यदि मराठी भाषा नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करना है, तो उक्त नीति में दी गई सिफारिशों को लागू करना आवश्यक है। इसलिए, सभी विभागों और विभागों के अंतर्गत आने वाले सभी कार्यालयों को मराठी भाषा नीति में दी गई सिफारिशों की समीक्षा करने और उन्हें तदनुसार लागू करने पर तुरंत काम करना शुरू कर देना चाहिए।’

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