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13.7 लाख तक की इनकम पर नहीं देना होगा कोई टैक्स

एनपीएस कंट्रीब्यूशन से टैक्स में बचा सकते हैं 96,000 रुपये

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 9, 2025
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Transforming taxpayer registration
संदीप सक्सेना

नई दिल्ली। सरकार ने अगले फाइनेंशियल इयर से 12 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स फ्री कर दिया है लेकिन अगर आप सैलरीड हैं तो 13.7 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर आपकी टैक्स देनदारी जीरो हो सकती है। यह अतिरिक्त बचत 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन और एनपीएस में निवेश से होगी। इनकम टैक्स कानून की धारा 80सीसीडी(2) के तहत एनपीएस में कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 14 फीसदी तक निवेश टैक्स रिबेट के दायरे में आता है। ओल्ड टैक्स रिजीम में यह सीमा बेसिक सैलरी का 10% है। इस तरह सालाना 13.7 लाख रुपये कमाने वाला व्यक्ति पेंशन योजना में योगदान देकर अपने टैक्स में 96,000 रुपये की कमी कर सकता है। हालांकि, यह तभी संभव है जब एम्प्लॉयर कंपनी के कॉस्ट के हिस्से के रूप में एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) बेनिफिट देता है। कर्मचारी इसे खुद नहीं चुन सकते।

मान लीजिए किसी कर्मचारी की सालाना इनकम 13.7 लाख रुपये है। इसमें 50% बेसिक सैलरी 6.85 लाख रुपये है, तो 14% पर एनपीएस कंट्रीब्यूशन 95,900 रुपये होगा। इसके साथ ही 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ पूरे 13.7 लाख रुपये पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। हैरानी की बात है कि लाखों टैक्सपेयर्स इस मौके का फायदा नहीं उठा रहे हैं। एनपीएस लाभ लगभग 10 साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन मुश्किल से 22 लाख टैक्सपेयर्स ने इसमें निवेश किया है।

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एनपीएस से क्यों दूर हैं निवेशक
टैक्स फाइलिंग पोर्टल Taxspanner.com के सीईओ सुधीर कौशिक ने कहा कि केवल कुछ कॉरपोरेट ही एनपीएस लाभ शुरू करने में रुचि रखते हैं और इससे भी कम कर्मचारी इसमें नामांकन करने के इच्छुक हैं। अधिकांश निवेशक लंबे लॉक-इन और मैच्योरिटी पर निकासी पर पाबंदियों से हतोत्साहित हैं। इसमें असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर रिटायरमेंट से पहले पैसा नहीं निकाला जा सकता है। मैच्योरिटी पर भी केवल 60% रकम ही निकाली जा सकती है जबकि शेष 40% को अनिवार्य रूप से लाइफलॉन्ग पेंशन पाने के लिए एन्युटी में निवेश करना पड़ता है।

जानकारों का कहना है कि ये पाबंदियां वास्तव में निवेशक को लाभ पहुंचाती हैं। एचडीएफसी पेंशन के सीईओ श्रीराम अय्यर ने कहा, ‘जरूरी नहीं कि एनपीएस में लिक्विडिटी की कमी बुरी हो, क्योंकि पैसा सही जगह पर है। अगर इसे लंबे समय तक रखा जाए तो निवेश पर बहुत अधिक रिटर्न मिल सकता है।’

एनपीएस के कई दूसरे फायदे भी हैं। निवेशक एसेट मिक्स चुन सकता है, फंड के बीच स्विच कर सकता है और बिना किसी टैक्स लायबिलिटी के पेंशन फंड मैनेजर भी बदल सकता है। एनपीएस में उद्योग में सबसे कम फंड मैनेजमेंट फीस भी है। यह सालाना 0.09% है जबकि सस्ते म्यूचुअल फंड भी 1-1.5% फीस लेते हैं।

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