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साल 2026 में इसरो का प्लान तैयार

गगनयान से लेकर पीएसएलवी, एसएलएलवी तक हैं लिस्ट में

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 10, 2026
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। नए साल में भारत अपनी अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मार्च 2026 तक ही सात मिशन पूरे करने की एक बड़ी योजना बनाई है। इसके अलावा नए साल में बिना क्रू वाले रोबोटिक टेस्ट से लेकर महत्वाकांक्षी प्लैनेटरी एक्सप्लोरर तक इसरो के लिए किफायती इनोवेशन का एक बेहतरीन उदाहरण साबित होने वाला है।

सफल एलवीएम3-एम6 मिशन (लॉन्च व्हीकल मार्क-III की छठी ऑपरेशनल उड़ान) के बाद एक संबोधन के दौरान इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि भारत एक क्षेत्रीय खिलाड़ी से एक प्रमुख वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनने की यात्रा की दिशा में बढ़ रहा है।

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पीएसएलवी-सी62 मिशन 12 जनवरी को सुबह 10:17 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा। यह इसरो के भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी की 64वीं उड़ान होगी। इस मिशन का मुख्य पेलोड ईओएस-एन1 है जिसे ‘अन्वेषा’ नाम दिया गया है। ये हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग के लिए एक एडवांस्ड टूल है। यह एक एडवांस्ड टेक्नीक है जो इमेज के हर पिक्सेल के लिए लाइट वेवलेंथ का डिटेल्ड डेटा कैप्चर करती है न कि सिर्फ लाल, हरा और नीला।

फरवरी में पीएसएलवी-एन1 मिशन- पहली बार ऐसा होगा जब कोई पीएसएलवी रॉकेट पूरी तरह से एक भारतीय इंडस्ट्री कंसोर्टियम (एचएएल और एलएंडटी) द्वारा बनाया गया है। यह प्राइवेटाइजेशन की दिशा में एक बड़े कदम के तहत होगा। यह सैटेलाइट समुद्र विज्ञान से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा देगा जिससे मछली उद्योग से लेकर जलवायु अनुसंधान तक सभी चीजों में मदद मिलेगी।

मार्च, 2026 के लिए तय गगनयान जी1 मिशन इस शेड्यूल का सबसे खास हिस्सा है। एक ह्यूमन-रेटेड एलवीएम3 (लॉन्च व्हीकल मार्क III) रॉकेट व्योममित्र, जो एक महिला ह्यूमनॉइड रोबोट है, को ऑर्बिट में ले जाएगा। यह बिना क्रू वाली उड़ान एक जरूरी सुरक्षा टेस्ट है। इसे लाइफ सपोर्ट, री-एंट्री और समुद्र में रिकवरी सिस्टम को वैलिडेट करने के लिए डिजाइन किया गया है।

मार्च में ही टीडीएस-01 टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर भी आ रहा है। यह मिशन सैटेलाइट इंजीनियरिंग में एक शांत क्रांति का प्रतीक है। हाई-थ्रस्ट इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम का टेस्ट करके, इसरो का मकसद सैटेलाइट के फ्यूल का वजन 90 प्रतिशत तक कम करना है। केमिकल से इलेक्ट्रिक पावर में इस बदलाव से हल्के, सस्ते और अधिक समय तक चलने वाले स्पेसक्राफ्ट बनाना संभव होगा।

मार्च 2026 से पहले स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएसएलवी-एल1) का एक डेडिकेटेड कमर्शियल या टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन होने की उम्मीद है। यह मिशन छोटे सैटेलाइट लॉन्च और प्राइवेटाइजेशन के क्षेत्र में प्रगति का प्रतीक है।

साल के बीच तक, जीएसएलवी-एफ17 मिशन की तरफ से एनवीएस-03 सैटेलाइट को लॉन्च किए जाने की उम्मीद है। यह मिशन एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के रूप में काम करता है।

2026 के आखिर में गगनयान जी2 मिशन होगा। ये दूसरी बिना क्रू वाली ऑर्बिटल फ्लाइट होगी। 2027 में क्रू वाले मिशन से पहले यह आखिरी तैयारी होगी जो यह सुनिश्चित करेगी कि हर ऑटोमेटेड प्रोसेस बिना किसी गलती के हो। साथ ही यह साबित करेगी कि भारत इंसानी स्पेसफ्लाइट करने वाले देशों के खास क्लब में शामिल होने के लिए तैयार है।

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