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भारत की पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की इमारत को मिला ग्रीन सर्टिफिकेशन

हाई स्पीड रेल क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में मील का पत्थर

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2026
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आस्था भट्टाचार्य
गांधीनगर। बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। गुजरात के साबरमती में स्थित हाई-स्पीड रेल मल्टी-मॉडल हब को इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आईजीबीसी) द्वारा गोल्ड रेटिंग प्रदान की गई है, जो भारत के हाई-स्पीड रेल क्षेत्र में सतत बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़ी पहली इमारत है, जिसे प्रतिष्ठित आईजीबीसी ग्रीन सर्टिफिकेशन मिला है। आईजीबीसी भारत की प्रमुख ग्रीन बिल्डिंग प्रमाणन संस्था है और सततता, हरित अवधारणाओं और तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए वर्ल्ड ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल की संस्थापक सदस्य है।
इस अत्याधुनिक इमारत का निर्माण साबरमती रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, निर्माणाधीन साबरमती बुलेट ट्रेन स्टेशन और बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के साथ निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए किया गया है। इस अनुकरणीय संरचना के अग्रभाग पर स्टेनलेस स्टील से बना एक बड़ा भित्तिचित्र प्रदर्शित है, जो दांडी मार्च आंदोलन को दर्शाता है।
इस इमारत को विभिन्न हरित भवन सुविधाओं को शामिल करते हुए डिजाइन किया गया है, जिनमें छतों पर सोलर पैनल लगाने की व्यवस्था, बड़े लैंडस्केप वाली छतें और बगीचे, कुशल वॉटर फिक्स्चर, ऊर्जा-कुशल एयर कंडीशनिंग और लाइटिंग फिक्स्चर, ऊर्जा-कुशल प्रकाश एवं विद्युत प्रणालियां, प्रमाणित ग्रीन बिल्डिंग मटेरियल का उपयोग, टिकाऊ वास्तुशिल्प डिजाइन, जल-कुशल कम प्रवाह पाइपलाइन फिक्स्चर, वर्षा जल प्रबंधन और प्रभावी कचरा प्रबंधन प्रणाली शामिल हैं। संग्रहण बिनों के माध्यम से कचरे का पृथक्करण, अनुकूलित प्राकृतिक प्रकाश और वेंटिलेशन की भी व्यवस्था की गई है। यह इमारत साबरमती बुलेट ट्रेन स्टेशन के पूर्व की ओर स्थित है और ट्रैवेलटर्स से सुसज्जित तीन फुट ओवरब्रिज (एफओबी) के साथ एकीकृत है। ये एफओबी साबरमती बुलेट ट्रेन स्टेशन, साबरमती रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन और बीआरटीएस के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं। यह एक ट्विन स्ट्रक्चर है, जिसमें कार्यालयों, वाणिज्यिक विकास और खुदरा बिक्री के लिए स्थान निर्धारित है.
तीसरी मंजिल के स्तर पर एक सौंदर्यपूर्ण रूप से मनभावन समागम क्षेत्र यात्रियों के आराम के लिए प्रतीक्षा लाउंज, खुदरा विकल्प और रेस्तरां जैसी सुविधाएं प्रदान करता है। इस मान्यता के साथ, हाई-स्पीड रेल मल्टी-मॉडल हब सतत परिवहन अवसंरचना के लिए एक नया मानक स्थापित करता है, जो पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए यात्री अनुभव को बेहतर बनाता है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति के तहत कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 कि.मी. (गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली: 352 किमी, महाराष्ट्र: 156 किमी) है। विषयगत रूप से डिजाइन किए गए 12 बुलेट ट्रेन स्टेशन गुजरात में साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी और महाराष्ट्र में बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई निर्माणाधीन हैं। 508 किमी में से 332 किमी वायाडक्ट और 415 किमी पियर का काम पूरा हो चुका है।
इसके साथ ही 17 नदी पुल, 5 पीएससी (प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट) और 12 स्टील ब्रिज पूरे हो चुके हैं. 245 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 4.9 लाख से अधिक नॉइज़ बैरियर लगाए गए हैं। 292 ट्रैक किमी (146 रूट किमी) आरसी ट्रैक बेड का निर्माण पूरा हो गया है। मेनलाइन वायाडक्ट के लगभग 111 रूट किमी को कवर करते हुए लगभग 4,800 ओएचई मास्ट लगाए गए हैं।
महाराष्ट्र के पालघर जिले में सात पहाड़ी सुरंगों में से पहली पहाड़ी सुरंग में ब्रेकथ्रू पूरा कर लिया गया है। शेष छह पहाड़ी सुरंगों पर खुदाई का काम जारी है। इसके साथ ही बीकेसी और शिलफाटा (महाराष्ट्र) के बीच 21 किमी लंबी सुरंग में से 5 किमी एनएटीएम सुरंग की खुदाई पूरी हो चुकी है। सूरत और अहमदाबाद में रोलिंग स्टॉक डिपो का निर्माण कार्य जारी है। गुजरात के सभी स्टेशनों पर सुपर-स्ट्रक्चर का काम उन्नत चरण में है, जबकि महाराष्ट्र में तीनों एलिवेटेड स्टेशनों पर काम शुरू हो चुका है और मुंबई अंडरग्राउंड स्टेशन पर बेस स्लैब कास्टिंग का कार्य चल रहा है।

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