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भारत को मिलेगा पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर, अंतरिक्ष से ट्रेंड होंगे एआई मॉडल्स

पिक्सल-सर्वम का ऐतिहासिक मिशन

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 23, 2026
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डा. सीमा द्विवेदी

नई दिल्ली। भारत को पहला ऑर्बिटल डेटा सेंटर मिलने वाला है। इसे पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए पिक्सल और एआई कंपनी सर्वम एआई ने हाथ मिलाया है। इसकी खास बात होगी कि यह पूरी तरह से स्वदेशी टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा। दुनियाभर की टेक कंपनियां इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं। ऐेसे में इस साल के आखिर तक ‘द पाथफाइंडर’ नाम का यह डेटा सेंटर भारत को एआई की रेस में काफी आगे पहुंचा देगा।

यह 200 किलो का एक सैटेलाइट होगा, जिसका नाम ‘द पाथफाइंडर’ है। इसे इस साल के आखिर तक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। यह सिर्फ एक सैटेलाइट नहीं बल्कि उड़ता हुआ डेटा सेंटर होगा, जिसमें शक्तिशाली जीपीयू लगे होंगे।

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यह ऐतिहासिक मिशन भारत की आत्मनिर्भर एआई शक्ति को अंतरिक्ष तक ले जाने का एक साहसिक कदम होने वाला है। इसकी सबसे खास बात है कि यह पूरी तरह से स्वदेशी टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा।

क्या है ‘द पाथफाइंडर’?

‘द पाथफाइंडर’ एक साधारण सैटेलाइट से काफी अलग होगा। इसमें वही शक्तिशाली जीपीयू लगे होंगे, जो जमीन पर मौजूद आधुनिक डेटा सेंटर्स में लगे होते हैं। इसकी मदद से एआई मॉडल्स को सीधे अंतरिक्ष में ही ट्रेन किया जा सकेगा। ऐसा करने की बड़ी वजह है कि जमीन पर डेटा सेंटर्स के लिए बिजली की भारी मांग एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। अंतरिक्ष में भरपूर सौर ऊर्जा से यह ऑर्बिटल डेटा सेंटर बिना ऊर्जा की समस्या के लगातार काम कर सकेगा।

भारत की आत्म निर्भर एआई टेक्नोलॉजी

पिक्सल और सर्वम एआई के बीच हुई पार्टनरशिपमें पिक्सल का काम सैटेलाइट डिजाइन करना, बनाना और लॉन्च करना होगा। इसे उनकी गीगा पिक्सल फैसेलिटी में तैयार किया जाएगा। वहीं सर्वम एआई अंतरिक्ष में अपने भाषा मॉडल की ट्रेनिंग और इन्फेंसिंग संभालेगी।

इस मिशन का सबसे खास पहलू यह है कि यह सॉवरेन एआई की दिशा में बड़ा कदम है। इस ऑर्बिटल डेटा सेंटर के चलते भारत को अपने एआई मॉडल्स के लिए विदेशी क्लाउड या जमीन आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

मिशन के सामने क्या कमजोरियां?

भले यह मिशन बहुत रोमांचक है लेकिन अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाना आसान नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक एक्सपर्ट्स की राय है कि इसके लिए रॉकेट लॉन्च की लागत को कम रखना होगा। इसके अलावा समय के साथ अंतरिक्ष में खराब होने वाले हार्डवेयर को ठीक करना या बदलना काफी बड़ी चुनोती होगी और साथ ही यह खाम खर्चीला भी होगा।

हालांकि गौर करने वाली बात है कि इसके लिए दुनियाभर में दौड़ शुरू हो चुकी है। एलन मस्क की स्पेस एक्स से लेकर गूगल और मेटा तक, सब अंतरिक्ष की ओर देख रहे हैं। पिक्सल और सर्वम का यह कदम भारत को इस ग्लोबल टेक रेस में एक अग्रणी खिलाड़ी के रूप में खड़ा करने की कोशिश है।

इसके अलावा समय के साथ अंतरिक्ष में खराब होने वाले हार्डवेयर को ठीक करना या बदलना काफी बड़ी चुनौती होगी और साथ ही यह काम खर्चीला भी होगा।

यह ऑर्बिटल डेटा सेंटर 200 किलो का एक सैटेलाइट होगा, जिसका नाम ‘द पाथफाइंडर’ है। इसे इस साल के आखिर तक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

लॉन्चिंग से पहले एआई मॉडल का रिव्यू करेंगे अधिकारी

वाशिंगटन। लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में कोई भी एआई मॉडल लॉन्च होने से पहले सरकारी अधिकारी उसका रिव्यू करेंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति चाहते हैं कि किसी भी एआई मॉडल के लॉन्च होने से पहले उनके प्रशासन के सरकारी अधिकारी उसकी जांच करें ताकि कुछ गड़बड़ी होने से पहले उनकी रिलीज को रोका जा सके। इसके लिए एक एआई वर्किंग ग्रुप बनाने पर विचार चल रहा है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एआई के सबसे बड़े समर्थकों में से एक हैं। वे अक्सर सोशल मीडिया पर एआई से बनी फोटोज शेयर करते रहते हैं एआई से बढ़ते जोखिमों की चिंता अब उन्हें भी सताने लगी है। एंथ्रोपिक का पावरफुल एआई मॉडल क्लॉड मिथोस लॉन्च होने के बाद ट्रंप चाहते हैं कि उनका प्रशासन नए एआई मॉडल्स पर ज्यादा निगरानी रखे।

इंसान रख सकेगा पर्सनल एआई, जो कहोगे करके देगा

मेटा अब एआई एजेंट्स की तरफ बढ़ रहा है। कंपनी ऐसे नए पर्सनलाइज्ड एआई एजेंट्स लाने पर काम कर रहा है, जो रोजमर्रा का काम कर पाएंगे। रिपोर्ट की मानें तो ओपनक्लॉ की तरह ही, यूजर्स एजेंट्स को काम सौंप सकेंगे और वे बैकग्राउंड में काम करते रहेंगे।

एआईएजेंट्स की लोकप्रियता बढ़ रही है। एआई एजेंट्स लोगों के कामों को ऑटोमेट कर सकते हैं। ज्यादातर एआई एजेंट्स का इस्तेमाल कोड लिखने या काम करने के लिए किया जाता है लेकिन मार्क जुकरबर्ग रोजमर्रा के कामों के लिए भी एआई एजेंट्स को लाने पर विचार कर रहे हैं।

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मेटा नए पर्सनलाइज्ड एआई एजेंट्स पर काम कर रहा है, जो 3 अरब से भी ज्यादा यूजर्स के लिए रोजमर्रा के काम कर सकेंगे।

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