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मैं अयोध्या हूं, न मुझे कोई जीत सका न कोई जीत सकता है

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 19, 2024
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I am Ayodhya, no one can conquer me and no one can conquer me.

अयोध्या। मैं अवधपुरी हूं! कौशलपुर की राजधानी! वह अयोध्या नगरी, जिसे न कभी जीता जा सका और न कभी जीता जा सकता है। जिसके साथ युद्ध करना असंभव है। रघु, दिलीप, अज, दशरथ और राम जैसे रघुवंशी राजाओं के पराक्रम और शक्ति के कारण उनकी राजधानी को अपराजेय माना जाता था। इसलिए नगरी का ‘अयोध्या’ नाम सर्वदा सार्थक रहेगा।

सतयुग के सतकाल को मैंने देखा है। राजा भरत को मैंने देखा। राज हरिश्चंद्र का सुख पाया। त्रेता युग के वैभव को मैंने जिया। मैंने राजा दशरथ के शासन को देखा। उनके काल की विरासत मेरी धमनियों में आज भी बहती है। राजा दशरथ के चार लालों ने मेरी धरती पर पैर रखा, मेरी गलियों में घूमे। उनका बचपन, उनकी जवानी और उनकी कहानी मेरी रगों में रची- बसी है। उस राम के वैभव को समेटे मैंने द्वापर और कलियुग का आगमन देखा। भाइयों को आपस में कटते देखा। भ्रष्टाचार को बढ़ते देखा। मुस्लिम शासकों के आक्रमण को झेला। मुगलों के तांडव का साक्षात्कार किया। मेरी धरती पर बने मेरे भगवान के मंदिर को भी टूटते मैंने देखा। उस मंदिर के लिए मेरी धरती पर अपने पुत्रों का खून बहते भी देखा। मेरी आंखों के कोर भी गीले हुए। फिर, अपने प्रभु के मंदिर का निर्माण होते भी देख रही हूं। मैं अयोध्या हूं और मैं अपनी कहानी आपको खुद सुनाने वाली हूं। कहानी की शुरुआत वर्तमान से करती हूं।

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रामलला के आगमन की तैयारी
आज मेरी गलियां चमक रही हैं। मेरी धरती पर नई सड़कें बन रही हैं। मेरा वैभव फिर लौट रहा है। मेरे यहां का रेलवे स्टेशन भी प्रभु श्रीराम के रंग में रंगा है तो एयरपोर्ट पर भी भगवान की आभा झलकती है। आज मेरी भव्यता को देखकर सब हर्षित हो रहे हैं। लेकिन, क्या यह सब इतना आसान था। बिल्कुल नहीं। 500 साल की लंबी लड़ाई मैंने देखी है। मेरी बात करने वालों पर अत्याचार मैंने देखा है। लेकिन, मैं 9 नवंबर 2019 को कैसे भूल सकती हूं। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ का वह आदेश, जिसने यमेरी धरती को राम मंदिर से फिर आबाद कर दिया। इसके बाद 5 अगस्त 2020 का वह दिन। मेरी धरती धन्य हुई। मेरे आराध्य प्रभु श्रीराम के वैभव के वापस लौटने की शुरुआत का दिन। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे दर पधारे। मेरी धरती के जिस टुकड़े पर भगवान राम ने जन्म लिया था, वहां मंदिर की नींव रखी गई।

मेरी जमीन पर खड़ी की गई मस्जिद-मंदिर की लड़ाई लंबी थी। उबाऊ भी। फिर भी न कोई थका। न हारा। 100 सालों से अधिक की कानूनी लड़ाई लड़ी गई।

मेरी धरती पर जब नींव का पहला कुदाल चला, मैं कितनी खुश थी। अंदाजा नहीं लगा सकते। मेरी रगों में राम का संचार हो रहा था। वह सपना, वह उम्मीद, वह भरोसा, जो करोड़ों लोगों ने मेरी तरफ नजर टिकाकर रखा था, वह पूरा हो रहा था। राम के मंदिर बनने की शुरुआत हुई। करोड़ों लोगों की भक्ति का वह चरम बिंदु था। मेरे लिए जो भी युद्ध लड़े गए। इस दिन एक बार फिर मैं जीत गई। क्योंकि, मैं अयोध्या हूं।

कोर्ट का आदेश सबसे अहम
मेरी जमीन पर खड़ी की गई मस्जिद- मंदिर की लड़ाई लंबी थी। उबाऊ भी। फिर भी न कोई थका। न हारा। 100 सालों से अधिक की कानूनी लड़ाई लड़ी गई। फिर आया 9 नवंबर 2019 का दिन। श्रीराम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश का दिन। सुप्रीम कोर्ट ने एक लंबी सुनवाई के बाद मेरे दर को लेकर चल रहे विवाद पर फैसला सुनाया। तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में बैठी संवैधानिक पीठ ने अपने आदेश में कहा कि विवादित जमीन पर हिंदुओं का हक है। मेरी जीत हुई थी। फिर मेरे दर पर मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई।

आदेश के बाद रामलला के मंदिर का निर्माण
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का निर्माण किया। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास बनाए गए। विश्व हिंदू परिषद से चंपत राय महासचिव बनाए गए। ट्रस्ट में 15 सदस्य हैं।

ट्रस्ट ने राम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में राम मंदिर निर्माण कमेटी का गठन किया। मेरी धरती पर राम मंदिर निर्माण कमेटी ने तय समय सीमा में मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को पूरा कराने में मदद की है।

22 जनवरी 2024 को मंदिर निर्माण के प्रथम चरण का कार्य पूरा होने के बाद मेरे प्रभु रामलला को अपने भव्य मंदिर में विराजमान किया जाएगा। मेरे दर पर रामलला के नए मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां जोरदार तरीके से चल रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर मेरी धरती पर आएंगे। मेरा सदियों का इंतजार पूरा होगा। मेरे रामलला अपने मंदिर में विराजमान होंगे, वह दिन कितना सुहावना होगा।

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