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ईपीएफओ की 15000 की सैलरी लिमिट बढ़ाने पर विचार करे सरकार: सुप्रीम कोर्ट

कहा, 11 साल से नहीं हुआ बदलाव; 4 महीने में फैसला लेने का निर्देश

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 10, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (ईपीएफओ) की सैलरी लिमिट (वेज सीलिंग) बढ़ाने पर विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पिछले 11 साल से इस लिमिट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए सरकार को अगले 4 महीने के भीतर इस पर फैसला लेना चाहिए।

फिलहाल, ₹15,000 से ज्यादा मंथली सैलरी पाने वाले एम्प्लॉई इस सोशल सिक्योरिटी स्कीम के अनिवार्य दायरे से बाहर हैं। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चांदुरकर की बेंच ने एक्टिविस्ट नवीन प्रकाश नौटियाल की याचिका पर यह आदेश दिया।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को अपना प्रेजेंटेशन सौंपें, जिस पर सरकार को समय सीमा के भीतर फैसला लेना होगा।

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11 साल से सैलरी लिमिट ₹15,000 पर स्थिर
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रणव सचदेवा और नेहा राठी ने दलील दी कि ईपीएफओ की सैलरी लिमिट में आखिरी बार 2014 में बदलाव किया गया था। तब इसे ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था।

पिछले एक दशक में महंगाई और न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन ईपीएफओ की लिमिट वहीं अटकी हुई है। इसके कारण करोड़ों कर्मचारी इस सोशल सिक्योरिटी के लाभ से वंचित रह जाते हैं।

न्यूनतम वेतन से भी कम है ईपीएफओ की लिमिट
याचिका में कहा गया है कि केंद्र और कई राज्यों द्वारा तय किया गया न्यूनतम वेतन अब ₹15,000 की इस लिमिट से ज्यादा हो चुका है। ऐसे में जो कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी पा रहे हैं, वे भी ईपीएफओ के दायरे से बाहर हो जा रहे हैं।

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