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विकसित भारत के लिए ‘गुडी-गुडी’ बजट

वित्त वर्ष 2025-26: मोदी सरकार ‘मध्यम वर्ग के लिए अब तक की सबसे अनुकूल

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 4, 2025
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विनोद शील

बजट सभी मानदंडों पर खरा, ‘मध्यम वर्ग’ शब्द नौ बार आया – गरीब, युवा, किसान, महिला यानी GYAN पर केंद्रित किया ध्यान

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार 1 फरवरी को धीमी अर्थव्यवस्था और बढ़ती कीमतों के दोहरे प्रभाव से जूझ रहे करदाताओं, विशेष रूप से मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ी राहत देने वाला बजट पेश किया। वर्तमान में 7 लाख रुपए की छूट की तुलना में अब 12 लाख रुपये तक की आमदनी पर करदाताओं को कोई कर नहीं देना होगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी शुक्रवार को ही इस बात के जोरदार संकेत दे दिए थे, जब उन्होंने कहा था कि ‘मैं प्रार्थना करता हूं कि ‘मां लक्ष्मी देश के गरीब और मध्य वर्ग पर अपनी कृपा बनाए रखें।’। राष्ट्रपति मुर्मू ने भी यही कहा था। कुल मिला कर कहा जाए तो यह विकसित भारत और सभी देशवासियों के लिए एक ‘गुडी-गुडी’ बजट है। एक ऐसा बजट जो सभी मानदंडों पर खरा उतरता है।
मध्यम वर्ग के लिए उदार कर राहत पैकेज से उपभोग को बढ़ावा मिलेगा और अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन। बजट का विजन व्यापार और बुनियादी ढांचे पर खर्च के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर केंद्रित है और नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार ने ‘अब तक का सबसे मध्यम वर्ग अनुकूल बजट’ पेश किया है।

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वित्त मंत्री ने करों में कटौती करते हुए आयकर में 1 लाख करोड़ रुपए की छूट दी जो कि कुल मिलाकर एक रिकॉर्ड है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने भी एक दूरदर्शी, समावेशी और भविष्योन्मुखी तथा परिवर्तनकारी बजट 2025-26 के लिए मोदी सरकार की सराहना की है। पीएचडीसीसीआई ने कहा कि मध्यम वर्ग के लिए ऐतिहासिक कर राहत से लोगों के हाथ में अधिक पैसा आएगा, खपत को बढ़ावा मिलेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

पीएचडीसीसीआई ने कहा कि गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी (गरीब, युवा, किसान, महिला यानी कि (GYAN)) पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके अलावा कृषि और ग्रामीण समृद्धि में क्रांतिकारी बदलाव, उच्च उपज वाली फसलों पर राष्ट्रीय मिशन और उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए कृषि ऋण में वृद्धि, किसानों के लिए एक समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया गया है।

यही नहीं, आर्थिक विकास में सबसे आगे महिलाओं को रखते हुए महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने, वित्तीय स्वतंत्रता और नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए विशेष निवेश योजनाएं और प्रोत्साहन पर जोर दिया गया है। पीएचडीसीसीआई केअनुसार एमएसएमई भारत के विकास का इंजन हैं। छोटे व्यवसायों को फलने-फूलने और रोजगार पैदा करने में सक्षम बनाने के लिए आसान ऋण, कम अनुपालन और डिजिटल परिवर्तन आदि उपायों से विकास के नए आयाम खुलेंगे और रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। इसके अलावा राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक स्थिरता, राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर आंका गया जिससे वित्तीय विवेक और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होगी।

कर की नई व्यवस्था के अंतर्गत सभी स्लैब में उच्च सीमाएं होंगी। वेतनभोगियों के लिए, जिन्हें नई व्यवस्था के तहत 75,000 रुपये की मानक कटौती भी मिलती है, छूट का मतलब 12.75 लाख रुपये तक की आय वालों के लिए शून्य कर देयता होगी। परिवर्तनों के परिणामस्वरूप वास्तव में कर देने वाले 3 करोड़ भारतीयों में से लगभग 1 करोड़ अब कानूनी तौर पर कर के दायरे से बाहर हो जाएंगे। हालांकि उन्हें छूट का लाभ उठाने के लिए रिटर्न दाखिल करना होगा। जो लोग अभी भी कर देते हैं वे अपनी आय के स्तर के आधार पर प्रति वर्ष 30,000 रुपये से 1.1 लाख रुपये तक की रकम बचाएंगे जबकि मध्यम वर्ग के बड़े हिस्से को लाभ होगा, बड़े लाभार्थी 15 लाख-24 लाख रुपये की कर योग्य आय वाले लोग हैं।

इसमें कोई शक नहीं कि बजट के जरिये सरकारें राजनीतिक मकसद भी सिद्ध करती हैं। इसलिए बजट पर विपक्षी दल अपने– अपने तरीके से निशाना भी साध रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने दिल्ली और बिहार के चुनावों को ध्यान में रख कर बजट में प्रावधन किए हैं। दिल्ली में 5 फरवरी को मतदान होगा। बिहार में इस साल अक्टूबर या नवंबर में चुनाव संभावित हैं। प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से भारत के सबसे अमीर शहर दिल्ली के लिए और सरकारी कर्मचारियों, निजी क्षेत्र और व्यवसाय में फैले एक बड़े मध्यम वर्ग के लिए बड़ी कर छूट एक जोरदार और स्पष्ट संकेत है। यह देखते हुए कि आम आदमी पार्टी का मुख्य मतदाता आधार कम आय वाले लोगों का माना जाता है, और ऐसी रिपोर्टों के बीच कि राजधानी का मध्यम वर्ग डगमगा रहा है। मोदी सरकार उन्हें भगवा के पक्ष में लाने की उम्मीद कर रही है।

बिहार की बात
जहां तक बिहार की बात है तो भाजपा और सहयोगी नीतीश कुमार की जेडीयू के लिए भी बजट की घोषणाएं महत्वपूर्ण हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण में जितनी बार यह बात उभर कर आई, उससे किसी को भी इस बात पर कोई शक नहीं रह गया कि एनडीए सरकार राज्य को अपने पास बनाए रखने के इरादे में है। उन्होंने मखाना बोर्ड और राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना, आईआईटी-पटना का विस्तार, प्रमुख बौद्ध केंद्रों के आसपास पर्यटन को बढ़ावा देने और पश्चिमी कोसी नहर के लिए समर्थन की घोषणा की। निश्चित रूप से, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिहार की पारंपरिक लोक कला मधुबनी आकृति वाली साड़ी पहनी। राजनीतिक संदेश इससे अधिक स्पष्ट नहीं हो सकता था।

वित्त मंत्री का रिकॉर्ड दांव
इन सबके अतिरिक्त वित्त मंत्री ने आयकर संग्रह और निजी क्षेत्र के खर्च में वृद्धि पर भी दांव लगाया है। वित्त मंत्री का लगातार आठवां बजट कर छूट से उपभोग व्यय को बढ़ावा देने पर एक रिकॉर्ड दांव है। वित्त मंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत में ही मध्यम वर्ग का जिक्र किया। यह धीमी होती अर्थव्यवस्था और सुस्त उपभोग वृद्धि, खासकर शहरी भारत की पृष्ठभूमि में आया। यदि उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देने के लिए करों में कटौती वित्त मंत्री की अल्पकालिक प्रतिक्रिया है, तो विनियमनों की समीक्षा और उन्हें कम करने, विभिन्न कानूनों में 100 प्रावधानों को अपराधमुक्त करने और सरलीकृत आयकर विधेयक पेश करने के प्रस्ताव अर्थव्यवस्था के लिए उनकी दीर्घकालिक रणनीति भी हैं। निवेश के मामले में, बीमा एफडीआई सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने के अलावा वित्त मंत्री ने इस क्षेत्र में विदेशी निवेशकों के लिए आसान प्रवेश का वादा किया है। 2025-26 के लिए सरकार के बजटीय पूंजीगत व्यय में मामूली वृद्धि के साथ, सरकार का कहना है कि निजी क्षेत्र के लिए अपने पूंजीगत व्यय को बढ़ाने का समय अब आ गया है।

‘पहले भरोसा करो, बाद में जांच करो’
वित्त मंत्री ने अगले सप्ताह एक नया आयकर विधेयक लाने का प्रस्ताव रखा है, जिसके बारे में उनका कहना है कि यह ‘पहले भरोसा करो, बाद में जांच करो’ के सिद्धांत की पुष्टि करेगा। यह स्वागत योग्य है। ईमानदार करदाता को मान्यता देना और उसे राहत देना अच्छी राजनीति और अच्छे अर्थशास्त्र का मिलन है। वास्तव में, वित्तमंत्री ने मोदी सरकार के ‘राष्ट्र निर्माण में मध्यम वर्ग की सराहनीय ऊर्जा और क्षमता’ में विश्वास को रेखांकित किया है और ‘मध्यम वर्ग’ शब्द नवीनतम बजट भाषण में नौ बार आया।

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