नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्टि्रयल कॉरिडोर में स्थित कावा यूएवी प्राइवेट लिमिटेड (होवरइट) ने ‘दिव्यास्त्र एमके 3’ नामक अगली पीढ़ी के जेट-संचालित लॉइटिंग म्यूनिशन यानी सुसाइड ड्रोन की पहली सफल टेस्टिंग की। कंपनी के अनुसार यह भारत के इतिहास में पहली बार है जब पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण वाला लॉइटिंग म्यूनिशन तैयार किया गया है। इसमें भारतीय जेट इंजन लगा है। टेस्टिंग उत्तर प्रदेश के एक निर्धारित एयर स्टि्रप पर हुई।
यह एक ऐसा सिस्टम है जो लक्ष्य की तलाश में लंबे समय तक हवा में घूम सकता है। सही समय पर सटीक हमला कर सकता है। अब तक भारत में इस तरह के सिस्टम या तो विदेशी तकनीक पर निर्भर थे या फिर पारंपरिक प्रोपेलर इंजन वाले थे। दिव्यास्त्र एमके 3 ने इस कमी को पूरा करते हुए जेट इंजन की ताकत को स्वदेशी रूप में जोड़ा है।
स्वदेश की सफलता
इस म्यूनिशन को डीजी प्रोपल्शन कंपनी के जेट इंजन से ताकत मिली है। उड़ान के दौरान इंजन का प्रदर्शन सभी मानकों पर खरा उतरा। कंपनी का कहना है कि यह इंजन अब मिशन के लिए पूरी तरह सक्षम साबित हो चुका है और दिव्यास्त्र एमके 3 पर उपयोग के लिए उपयुक्त है। यह उपलब्धि सिर्फ एक उड़ान नहीं बल्कि भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी मान्यता है। अब तक जेट इंजन जैसी जटिल तकनीक मुख्य रूप से विदेशी कंपनियों के पास मानी जाती थी। डीजी प्रोपल्शन और होवरइट ने दिखाया कि भारतीय इंजीनियरिंग इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर हो सकती है।
‘दिव्यास्त्र एमके 3’ कार्यक्रम की शुरुआत 2026 के शुरूआत में हुई थी। महज एक कैलेंडर वर्ष के अंदर ही यह जेट-संचालित लॉइटिंग म्यूनिशन आसमान में उड़ने में सफल हो गया। यह गति और फोकस भारतीय डिफेंस स्टार्टअप्स की क्षमता को दर्शाता है। कंपनी के सह-संस्थापकों ने कहा कि यह सिर्फ टेस्ट फ्लाइट नहीं बल्कि एक इरादे का एलान है। भारत ने साबित कर दिया है कि वह अपने ही सीमाओं के अंदर जेट-संचालित सटीक स्ट्राइक सिस्टम की कल्पना, इंजीनियरिंग और उड़ान पूरी तरह कर सकता है।














