नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने का फैसला किया है। यूपीआई की उज्बेकिस्तान में भी एंट्री हो गई है।
इस दौरान संस्कृति, आयुर्वेद, खनिज संसाधन, पर्यटन, शिक्षा, पर्यावरण, वित्त और वैज्ञानिक शोध समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 11 समझौतों और अन्य पहलों की घोषणा की गई। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी यात्रा के परिणामों के मुताबिक, दोनों देशों ने 2026-30 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम पर समझौता किया है। दोनों देशों में आयुर्वेद से खनिज तक बढ़ेगा सहयोग।

बौद्ध स्थलों के संरक्षण में सहयोग
भारत उज्बेकिस्तान के प्राचीन बौद्ध स्थलों फयाज टीपा और करा टीपा के संरक्षण और पुनरुद्धार में भी सहयोग करेगा। ये दोनों ऐतिहासिक स्थल उज्बेकिस्तान के तेरमेज क्षेत्र में स्थित हैं। इसके लिए भारत के विदेश मंत्रालय और उज्बेकिस्तान की सांस्कृतिक विरासत एजेंसी के बीच ‘लैटर ऑफ इंटेंट’ हुआ है। दोनों देशों के राष्ट्रीय अभिलेखागार के बीच भी सहयोग का समझौता हुआ है। वहीं, आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भी एमओयू किया गया।
भारत के खान मंत्रालय और उज्बेकिस्तान के खनन उद्योग एवं भूविज्ञान मंत्रालय के बीच भूविज्ञान और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग पर सहमति बनी। पर्यटन के क्षेत्र में 2026-28 के लिए साझेदारी कार्यक्रम भी शुरू किया गया है।
भारत के सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस और उज्बेकिस्तान की डिप्लोमैटिक अकादमी के बीच सहयोग का समझौता हुआ है। दोनों देशों के वित्त मंत्रालयों के बीच आर्थिक और वित्तीय संवाद शुरू करने के लिए भी एमओयू किया गया है।
यूजेडक्यूआर कोड
भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र यूपीआई को भी उज्बेकिस्तान में विस्तार मिलने जा रहा है। एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) और उज्बेकिस्तान के नेशनल इंटरबैंक प्रोसेसिंग सेटर (एनआईपीसी) के बीच वाणिज्यिक समझौता हुआ है। इसके तहत भारत के यूपीआई एप से उज्बेकिस्तान के राष्ट्रीय क्यूआर कोड यूजेडक्यूआर को स्कैन कर व्यापारिक भुगतान किया जा सकेगा।
पीएम मोदी ने ताशकंद में योग फेडरेशन ऑफ उज्बेकिस्तान की ओर से आयोजित योग सत्र में भी हिस्सा लिया।
प्रमुख फैसले
भारत-उज्बेकिस्तान संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदले।
अरल सागर क्षेत्र में वनीकरण के लिए भारत देगा 10 लाख डॉलर ।
बौद्ध स्थलों, फयाज टीपा और करा टीपा के संरक्षण में भारत सहयोग करेगा।
हिंदी भाषा के लिए 100 लाल बहादुर शास्त्री छात्रवृत्तियां।
भूविज्ञान, खनिज, आयुर्वेद, पर्यटन, पर्यावरण, उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक शोध में सहयोग बढ़ेगा।
ताशकंद में संस्कृत चेयर स्थापित होगी।














