• Latest
  • Trending
Kanpur airport now 16 times bigger

सख्ती और करुणा, दोनों जरूरी

January 17, 2026
दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026

बारिश लौटी, बुवाई अब भी पीछे

August 10, 2026
आयुष्मान भारत योजना

70 पार हैं तो इलाज का हक़ अलग

August 10, 2026
student

चार साल की डिग्री, तो पीजी एक साल में

August 10, 2026
ev-scooter

हर नौवाँ स्कूटर बैटरी वाला

August 10, 2026
boxing

बॉक्सिंग में सात गोल्ड, अब आगे

August 10, 2026
student

अब सर्टिफ़िकेट पर नहीं, नौकरी पर पैसा

August 10, 2026
Makhana

दरभंगा का मखाना, अब जहाज़ से ऑस्ट्रेलिया

August 10, 2026
पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी

बारिश 11 फ़ीसदी कम, अब क्या करें

August 10, 2026
ई20 पेट्रोल से इंजन खराब नहीं होते: गडकरी

E20 पेट्रोल: जाँच में क्या निकला

August 10, 2026
milk

गाँव की समिति अब डिजिटल हो रही है

August 10, 2026
gale cricket stedium

गॉल से शुरुआत, और दो बड़े झटके

August 10, 2026
E20 पेट्रोल

ई20: आत्मनिर्भर भारत की नई क्रांति

August 10, 2026
Tuesday, August 11, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

सख्ती और करुणा, दोनों जरूरी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 17, 2026
in the blitz
0
Kanpur airport now 16 times bigger
ब्लिट्ज ब्यूरो

सड़कों से आवारा कुत्ते हटाने पर 26,800 करोड़ रुपये खर्च होंगे तथा उन्हें रखने के लिए बुनियादी ढांचा भी चाहिए और आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में लगभग 91,800 नए डॉग शेल्टर भी बनाने होंगे। अतः समाधान के लिए ठोस, वैज्ञानिक और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है ताकि ‘डर और क्रूरता’ के बजाय ‘तर्क और करुणा’ से आवारा श्वानों की समस्या का हल निकाला जा सके।

देश में आवारा कुत्तों के आतंक और उनसे जुड़ी सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में घमासान जारी है। आवारा कुत्तों का मुद्दा आज समाज और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। जहां एक ओर बेजुबानों के प्रति दया और पशु कल्याण है तो वहीं दूसरी ओर इंसानों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का अहम सवाल भी मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि कुत्ते के काटने और किसी बच्चे, बड़े या बूढ़े, कमजोर व्यक्ति की मौत या चोट लगने पर वह भारी मुआवजा तय कर सकता है जिसका भुगतान राज्य सरकार करेगी। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले में सुनवाई के दौरान यह कठोर टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि 75 साल से सरकारों ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कुछ नहीं किया। अदालत ने कहा कि वह इस लापरवाही के लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराना चाहती है। राज्य सरकारें मुआवजा दें और खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी तय करें। साथ ही एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों को ठीक से लागू करने पर जोर दिया है ताकि इंसानी सुरक्षा और पशु प्रेम के बीच संतुलन कायम किया जा सके क्योंकि सिर्फ भावनात्मक बातें काफी नहीं हैं और समस्या का समाधान वैज्ञानिक और मानवीय तरीकों से ही संभव है। इसमें प्रभावी नसबंदी और जागरूकता महत्वपूर्ण है।
भारत में लाखों आवारा कुत्ते हैं और उनके काटने से होने वाली घटनाएं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की, लगातार बढ़ रही हैं जिससे रेबीज का खतरा भी बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन इस समस्या से निपटने में विफल रहे हैं। अदालत ने पशु प्रेमियों से भी सवाल किया कि अगर आपको कुत्तों से इतना ही प्यार है तो उन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते? वे सड़कों पर क्यों घूमते और लोगों को डराते रहें? कोर्ट ने एनिमल बर्थ कंट्रोल (नसबंदी और टीकाकरण) नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया है। हालांकि समस्या यह है कि यह काम भी शासन और प्रशासन के स्तर पर प्रभावी ढंग से नहीं किया जा रहा है। अगर सख्त निगरानी तंत्र के तहत नसबंदी और टीकाकरण का काम किया जाए तो पूरे देश में आवारा कुत्तों की जनसंख्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। दरअसल कहीं न कहीं समस्या का मूल यह है कि शहरीकरण और पर्यावास के सिकुड़ने से कुत्तों में आक्रामकता बढ़ी है और वे इंसानों के करीब आ गए हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि इस समस्या को हल करने के लिए मानव सुरक्षा एवं पशु कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करना होगा।
वस्तुतः आवारा श्वानों की समस्या के समाधान का रास्ता केवल कानूनी हस्तक्षेप या क्रूरता से नहीं निकलने वाला बल्कि हम तर्कसंगत, मानवीय और वैज्ञानिक तरीकों से ही इस समस्या का समाधान कर पाएंगे पर यहां तथाकथित श्वान प्रेमियों से भी कानूनों का पालन सख्ती से कराना होगा जो इन्हें जगह-जगह खाना खिलाने तो पहुंच जाते हैं किंतु इन बेजुबानों को बेहतर जीवन और वातावरण देने के लिए अपने घर नहीं ले जाना चाहते। आरोप है कि तथाकथित श्वान प्रेमियों को तमाम देशी-विदेशी संस्थाएं आर्थिक लाभ पहुंचा रही हैं। इस लाभ के लालच में ये इन आवारा कुत्तों को जगह-जगह खाना खिला कर आम नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल रहे हैं जो एक बड़े अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए इस प्रवृत्ति से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त एक अंदेशा यह भी व्यक्त किया जाता है कि भारत में तेजी से बढ़ और विकसित हो रहे पर्यटन उद्योग को भी नुकसान पहुंचाने के लिए तमाम विदेशी संस्थाएं इस समस्या का समाधान निकलने नहीं देना चाहती। अतः सरकार को इस दृष्टि से भी तथ्यों की जांच कर के उन संस्थाओं पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए जो इस नापाक इरादे को अंजाम दे रही हैं। इसके साथ ही सरकार, समाज और पशु प्रेमियों के बीच सामूहिक सहयोग से ही प्रभावी नीति बना कर इस समस्या का समाधान निकाला जाना संभव हो सकता है जिसमें सभी की सुरक्षा और जानवरों के प्रति दया, दोनों का ध्यान रखा जाए। यह एक संवेदनशील मुद्दा है जहां एक तरफ बेजुबानों की चिंता है तो वहीं दूसरी तरफ इंसानी जान की सुरक्षा भी सबसे अधिक अहमियत रखती है। सड़कों से आवारा कुत्ते हटाने पर 26,800 करोड़ रुपये खर्च होंगे तथा उन्हें रखने के लिए बुनियादी ढांचा भी चाहिए और आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में लगभग 91,800 नए डॉग शेल्टर भी बनाने होंगे। अतः समाधान के लिए ठोस, वैज्ञानिक और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है ताकि ‘डर और क्रूरता’ के बजाय ‘तर्क और करुणा’ से आवारा श्वानों की समस्या का हल निकाला जा सके।

YOU MAY ALSO LIKE

बारिश लौटी, बुवाई अब भी पीछे

70 पार हैं तो इलाज का हक़ अलग

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation