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जीवन के कठोरतम हालात से लड़कर अफसर बनी एनी

18 साल की सिंगल मदर, मंदिर में काटे दिन, ठेला भी लगाया

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 22, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। ‘जीवन में कठिनाइयां हमें बर्बाद करने नहीं आती हैं, बल्कि ये हमारी छुपी हुई सामर्थ्य और शक्तियों को बाहर निकलने में हमारी मदद करने आती हैं। कठिनाइयों को यह जान लेने दो कि आप उससे ज्यादा कठिन हो।’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की ये लाइन मानों एनी शिवा जैसी महिलाओं को हिम्मत देने के लिए ही लिखी गई हैं। केरल की रहने वाली एनी शिवा ने बहुत कम उम्र में न सिर्फ तमाम कठिनाइयों को झेला, बल्कि उन विपरीत हालात से लड़कर समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनकी सक्सेस स्टोरी उन तमाम लड़कियों के लिए मोटिवेट कर सकती है जो अंधेरे से निकलकर शिखर तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

8 महीने के बच्चे के साथ सड़क पर आ गईं

शादी के कुछ समय बाद तक सब कुछ सही चल रहा था। बहुत जल्द उन्होंने बेटे को जन्म दिया। 18 साल की उम्र में एनी मां बन गई थीं लेकिन इसके बाद चीजें खराब होने लगीं। पति ने उन्हें घर से निकाल दिया। जब वह अपने माता-पिता के पास पहुंची तो उन्होंने भी मुंह फेर लिया। आठ महीने के बच्चे के साथ एनी सड़क पर रहने को मजबूर हो गई थीं।

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सिर के बाल काटे, मंदिर में गुजारी रातें

जब कहीं कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था, तब एनी ने अपने बच्चे के साथ एक मंदिर में शरण ली। उन्होंने कई रातें मंदिर में गुजारीं। एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने अपनी उन दिनों का याद करते हुए बताया था कि उन्हें अपने बाल बहुत अच्छे लगते थे लेकिन उन्होंने बाल काटने का फैसला लिया। बाल काटने के बाद वे खुद को मजबूत और दूसरों से अलग महसूस कर रही थीं। वे कहती हैं, ‘मैंने बेबसी से अपने बेटे को भूख से रोते और सोते हुए देखा है।’

गली-गली बेचा सामान, नींबू पानी का ठेला भी लगाया

खुद को हौसला देते हुए एनी ने आगे बढ़ने का फैसला किया। वे अपने बेटे के साथ एक बेहतर कल के लिए वर्काला चली गईं। कुछ समय बाद उन्हें अपनी नानी के घर शरण मिल गई लेकिन अब कमाने की चुनौती सामने खड़ी थी। उन्होंने गली-गली घूमकर साबुन और कपड़े धोने का पाउडर बेचा। यहां तक कि नींबू-पानी का ठेला भी लगाया। इसके अलावा बच्चों के लिए प्रोजेक्ट वर्क लिखकर ऑनलाइन काम भी किए।

पुलिस भर्ती में दिखी उम्मीद की नई किरण

एनी अपने हालात से जूझ रही थीं। तभी उन्हें किसी ने केरल पुलिस भर्ती के बारे में बताया। उन्होंने पुलिस कॉन्स्टेबल और सब-इंस्पेक्टर भर्ती की तैयारी शुरू कर दी। परीक्षा से कुछ दिन पहले उन्होंने सारे काम छोड़ दिए और पूरा फोकस सरकारी नौकरी की प्रिपेशन पर लगा दिया। 20-20 घंटे पढ़ाई की।

यूं बनीं पुलिस अफसर

आखिरकार वह दिन आ गया जब एनी शिवा को अपनी कड़ी मेहनत का फल मिला। साल 2016 में उनका सेलेक्शन पुलिस कॉन्स्टेबल पद पर हो गया। करीब तीन साल तक कॉन्स्टेबल पद पर सेवा देने के बाद उन्हें सब-इंस्पेक्टर बनने का मौका मिला। उन्होंने परीक्षा दी और 2021 में वर्काल पुलिस स्टेशन में सब-इंस्पेक्टर पद पर तैनाती मिली। संघर्ष, कड़ी मेहनत और दृढ़ निश्चय के बल एनी शिवा पुलिस ऑफिसर बन गईं। यह कहानी उनके हौसले और हार न मानने के जज्बे को दर्शाती है।

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