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रूस-भारत रिश्तों में नया मोड़

एनर्जी से बाहर निकलकर टेक, शिपबिल्डिंग और लॉजिस्टिक्स पर जोर

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच रिश्ते लंबे समय से ऊर्जा और तेल व्यापार पर केंद्रित रहे हैं, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। रूस भारत के साथ सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए तेल से आगे बढ़कर मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में जॉइंट वेंचर कायम करना चाहता है। हालिया भारत-रूस शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर बातचीत तेज हुई है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
तेल से आगे लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
रूस की योजना भारत में स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने की है। रूस की कई कंपनियां इंजीनियरिंग, शिपबिल्डिंग, आईटी, रिन्यूएबल एनर्जी, ऑयल प्रोसेसिंग और मेटलर्जी जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी पर चर्चा कर रही हैं। रूस के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव आंद्रेई सोबोलेव ने कहा है कि मॉस्को की विदेशी आर्थिक रणनीति में भारत सर्वोच्च प्राथमिकता बना हुआ है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच गैर-ऊर्जा और गैर-कच्चे माल वाले उत्पादों का व्यापार बढ़ाना है।
भारत को उत्पादन और निर्यात का हब मान रहा रूस
सोबोलेव के मुताबिक, रूसी कंपनियां भारत को सिर्फ एक बड़ा बाजार ही नहीं, बल्कि साउथ एशिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने के लिए उत्पादन केंद्र के रूप में देख रही हैं। भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग से लागत घटेगी और सप्लाई चेन मजबूत होगी। दूसरी ओर, भारतीय कंपनियां भी रूस में बिजनेस के नए अवसरों को लेकर उत्साहित हैं, जिससे दोनों तरफ निवेश का रास्ता खुल सकता है।
नॉर्दर्न सी रूट पर बढ़ेगा सहयोग
भारत और रूस के बीच सहयोग का एक अहम क्षेत्र नॉर्दन सी रूट भी बनता जा रहा है। यह आर्कटिक क्षेत्र में रूस का प्रमुख समुद्री मार्ग है, जो यूरोपीय रूस को सुदूर पूर्व से जोड़ता है। दोनों देशों ने इस रूट पर स्थिर कार्गो बेस तैयार करने, ट्रांसपोर्ट लागत तय करने और लॉजिस्टिक्स व शिपबिल्डिंग में जॉइंट वेंचर की संभावनाओं पर सहमति जताई है। आने वाले वर्षों में इस कॉरिडोर में कारोबार बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
100 अरब डॉलर ट्रेड लक्ष्य पर नजर
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस के महानिदेशक अजय सहाय के मुताबिक, भारत का लक्ष्य रूस को अपने निर्यात को बढ़ाकर 10 अरब डॉलर तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि 2030 तक दोनों देशों के बीच 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य की ओर प्रगति उत्साहजनक है। हालांकि, वे चाहते हैं कि इसमें भारत के निर्यात की हिस्सेदारी कम से कम 30 से 35 अरब डॉलर की हो।
बजट 2026: न्यू टैक्स रिजीम को वित्त मंत्री बना सकती हैं ज्यादा आकर्षक, ऐसा हो जाए तो बात बन जाए।
संतुलित व्यापार की ओर
बढ़ते भारत-रूस रिश्ते
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जॉइंट वेंचर, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सहयोग सफल रहता है, तो भारत-रूस व्यापार ज्यादा संतुलित और टिकाऊ बन सकता है। अभी आयात में रूस की हिस्सेदारी ज्यादा है, लेकिन नए सेक्टर्स में भारतीय कंपनियों की एंट्री से निर्यात को मजबूती मिलेगी। इससे दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ ऊर्जा साझेदारी तक सीमित न रहकर व्यापक आर्थिक सहयोग में बदल सकते हैं।

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