विनोद शील
नई दिल्ली। यह कितना उल्लेखनीय संयोग है कि एकतरफ जहां ब्लिट्ज इंडिया ने नशे के खिलाफ अभूतपूर्व अभियान प्रारंभ किया है तो वहीं नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने राज्य पुलिस बलों के साथ मिलकर एक अत्यंत साहसिक और ऐतिहासिक नार्को-विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ को अंजाम दिया है। भारत सरकार की ‘ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ नीति और ‘नशामुक्त भारत 2029’ के संकल्प के तहत 23 अक्टूबर 2026 को असम, मिजोरम और मणिपुर के 38 ठिकानों पर एक साथ सर्जिकल स्ट्राइक की गई।
इस मेगा ऑपरेशन ने न केवल नशीले पदार्थों की जब्ती की बल्कि म्यांमार-भारत-बांग्लादेश के ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ पर चल रहे 100 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय नार्को-हवाला साम्राज्य और सिंडिकेट की रीढ़ तोड़ दी है।
एक साथ 38 ठिकानों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
23 अक्टूबर 2026 की भोर भारतीय सुरक्षा और नार्को-इतिहास में एक युगांतरकारी मोड़ लेकर आई। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनसीबी ने असम, मिजोरम और मणिपुर के पुलिस बलों और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ लॉन्च किया। एकीकृत कमान संरचना के तहत 38 बहु-एजेंसी संयुक्त टीमों ने एक ही समय पर 38 पूर्व-चिह्नित संवेदनशील ठिकानों पर धावा बोल दिया। इस रणनीतिक कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग माफियाओं को संभलने या भागने का कोई मौका नहीं दिया।
यह कार्रवाई केवल नशीले पदार्थों को जब्त करने तक सीमित नहीं थी। इसका मुख्य उद्देश्य ड्रग्स के पूरे वित्तीय तंत्र और लॉजिस्टिक नेटवर्क को जड़ से उखाड़ना था। यह ऐतिहासिक प्रहार सीधे उस अंतरराष्ट्रीय नार्को-कार्टेल पर था जो भारत-म्यांमार सीमा से देश के आंतरिक हिस्सों जैसे पंजाब, त्रिपुरा और मुख्य भूमि भारत तक अपनी जड़ें फैला चुका था।
नशे के कारोबार और आतंक की परस्पर जुड़ी कड़ियां
भारत में नशे के कारोबार का भूगोल अब बदल चुका है। पूर्वोत्तर (मणिपुर, मिजोरम, असम) जहां म्यांमार से आने वाले नशीले पदार्थों के लिए ‘प्रवेश द्वार’ बन गए हैं वहीं पंजाब इसका मुख्य ‘उपभोग और वितरण केंद्र’ रहा है। हाल ही में पंजाब में हुई नार्को-कार्रवाइयों की कड़ियां सीधे मिजोरम और मणिपुर के इन सीमावर्ती तस्करों से जुड़ी पाई गईं। म्यांमार से आने वाली सिंथेटिक ड्रग्स (याबा टैबलेट और आइस (मेथम्फेटामाइन) को कछार कॉरिडोर (असम) के रास्ते सिलीगुड़ी गलियारे से होते हुए दिल्ली और पंजाब तक पहुंचाया जा रहा था।
मिजोरम में कुल एम्फ़ैटेमिन-टाइप स्टिमुलेंट्स (एटीएस) की जब्ती का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा पाया गया जिसके बाद मणिपुर का स्थान आता है। पंजाब में भी राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने ड्रोन तस्करी और सीमा पार से आने वाले नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त अभियान चला रखा है। ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के शब्दों में, इस अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ की कमर तोड़ दी है जिससे पंजाब और देश के अन्य हिस्सों में ड्रग्स की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है।
‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ का पर्दाफाश, वित्तीय नेटवर्क पर चोट
द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार नशीली दवाओं का कारोबार करने वाला गिरोह म्यांमार के सीमावर्ती व्यापारिक शहर जोखावथर (मिजोरम), चुराचांदपुर (मणिपुर) और कछार (असम) के ट्रांजिट कॉरिडोर का उपयोग कर रहा था।
इसे ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ का नाम दिया गया है जहां से भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं के पार बड़े पैमाने पर हेरोइन और मेथम्फेटामाइन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी की जा रही थी।
ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत जो वित्तीय
खुलासे हुए, वे चौंकाने वाले हैं:
100 करोड़ रुपये का हवाला ट्रेल: तस्करों द्वारा नशे की काली कमाई को सफेद करने और विदेशों में भेजने के लिए 100 करोड़ से अधिक के हवाला नेटवर्क का उपयोग किया जा रहा था।
1,424 बैंक खाते फ्रीज: सुरक्षा एजेंसियों ने डिजिटल फॉरेंसिक की मदद से एक ही झटके में 1,424 संदिग्ध बैंक खातों को सील कर वित्तीय लेन-देन पूरी तरह ठप कर दिया।
17.82 करोड़ की संपत्ति कुर्क: ड्रग सरगनाओं द्वारा अवैध कमाई से अर्जित की गई चल-अचल संपत्तियों को तत्काल जब्त किया गया।
गिरफ्तारी और घातक हथियारों की जब्ती: ऑपरेशन में सिंडिकेट के 18 मुख्य गुर्गों को दबोचा गया। साथ ही 500 सैन्य-ग्रेड डेटोनेटर और 12 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई जो इस बात का संकेत है कि नार्को-आतंकवाद का यह जाल कितना खतरनाक रूप ले चुका था।
ब्लिट्ज इंडिया: तंबाकू- सिगरेट छोड़ो अभियान
हर कश के साथ घटती जिंदगी
इस अंक से, हम धूम्रपान के बुरे प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए ‘ ब्लिट्ज इंडिया ‘ अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य लोगों, विशेषकर भारत के युवाओं की जान बचाने के लिए जरूरी उपायों पर जोर देना है। इसमें गहन शोध रिपोर्टों और डॉक्टरों, मनोवैज्ञानिकों, अर्थशास्त्रियों तथा अन्य संबंधित विशेषज्ञों की राय के साथ-साथ, हम धूम्रपान करने वालों, उनसे प्रभावित परिवारों और इस खतरनाक लत को छोड़ने में सफल रहे लोगों के अनुभव भी साझा करेंगे। इस तीन-भाग वाली श्रंखला का पहला हिस्सा पढ़ें, जिसमें धूम्रपान करने वालों पर धूम्रपान के जानलेवा प्रभावों के बारे में बताया गया है।
नार्को-कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026–2029)
भारत सरकार के नार्को-कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-2029) की रणनीतियों का सीधा परिणाम है कि नशे का कारोबार करने वालों पर प्रभावी ढंग से अंकुश लग पा रहा है। देश ने संकल्प लिया है कि 31 दिसंबर 2029 तक भारत को पूर्णतः नशामुक्त बनाया जाएगा और ड्रग्स को इतिहास का हिस्सा बना दिया जाएगा। अब रणनीति बदल चुकी है- एजेंसियां सड़क पर ड्रग बेचने वाले छोटे पैडलर्स के बजाय डिजिटल फॉरेंसिक, वित्तीय ऑडिट, इंटेलिजेंस-शेयरिंग और शेल कंपनियों (फर्जी फर्मों) के नेटवर्क को निशाना बना रही हैं ताकि ड्रग कार्टेल का समूल नाश किया जा सके।
नशीला पदार्थ मेथम्फेटामाइन
मेथम्फेटामाइन, ( जिसे ‘मेथ’ या ‘आइस’ भी कहा जाता है) एक बेहद खतरनाक, कृत्रिम (सिंथेटिक) और अत्यधिक नशा फैलाने वाला उत्तेजक पदार्थ है, जो सीधे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल नर्वस सिस्टम ) पर असर डालता है जिसे ड्रग्स तस्कर बेचते हैं।
मेथम्फेटामाइन का मकड़जाल
मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
यह दिमाग में डोपामाइन का स्तर अचानक बहुत बढ़ा देता है, जिससे क्षणिक ऊर्जा और खुशी महसूस होती है।
इसके असर के खत्म होने पर गंभीर मानसिक थकावट, तीव्र चिंता, अनिद्रा और अत्यधिक भ्रम या पैरानोया होता है।
लंबे समय के उपयोग से हिंसक व्यवहार, मतिभ्रम और महीनों या वर्षों तक रहने वाली साइकोसिस की समस्या हो सकती है।
हृदय और रक्त वाहिकाएं
दिल की धड़कन तेज हो जाती है और ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है।
इससे दिल का दौरा और ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
शारीरिक अंगों को नुकसान
किडनी और लिवर: शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ने से किडनी फेलियर और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
फेफड़े और मुंह: स्मोकिंग करने पर फेफड़े खराब होते हैं; दांतों का टूटना और मसूड़ों का सड़ना जिसे ‘मेथ माउथ’ कहते हैं, आम है।
संक्रमण: यदि इसे सुई से लिया जाए, तो एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी जैसे गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
गंभीर लत और जान का खतरा
यह इतनी जल्दी आदत बनाता है कि इसे छोड़ना बहुत मुश्किल होता है।
इसकी अत्यधिक मात्रा (ओवरडोज) से गंभीर दौरे, कोमा या मौत भी हो सकती है।
याबा टैबलेट
याबा टैबलेट एक अत्यधिक खतरनाक और अवैध सिंथेटिक नशीली दवा है, जो मुख्य रूप से मेथम्फेटामाइन और कैफीन के मिश्रण से बनी होती है। थाई भाषा में ‘याबा’ का अर्थ पागलपन की दवा होता है। यह आमतौर पर चमकीले लाल, नारंगी या गुलाबी रंग की छोटी गोलियों के रूप में होती है और इसे गैर-कानूनी तरीके से ‘पार्टी ड्रग’ या उत्तेजक के रूप में बेचा जाता है। यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र) को कृत्रिम रूप से अत्यधिक उत्तेजित कर देती है, जिससे व्यक्ति को कुछ समय के लिए भारी ऊर्जा और उत्साह महसूस होता है। हालांकि, इसका नशा उतरते ही शरीर और दिमाग पर इसके भयानक और जानलेवा दुष्प्रभाव शुरू हो जाते हैं।














