गुवाहाटी। किसी भूखे इंसान को खाना खिलाने की छोटी-सी पहल कब एक बड़े मानवीय मिशन में बदल जाए, यह असम के समय गोगोई की कहानी से समझा जा सकता है। डिब्रूगढ़ के रहने वाले 29 वर्षीय समय कभी फूड डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करते थे। आज वह अपने प्रयासों से जरूरतमंद परिवारों को छत, बच्चों को शिक्षा और बीमार लोगों को इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। अब तक वह पूरे असम में 89 घर बना चुके हैं। समय गोगोई के इस सफर की शुरुआत किसी बड़ी योजना या संस्था के साथ नहीं हुई थी।
कैसे शुरू हुआ सफर
कॉलेज के दिनों में ही वह घायल और बीमार आवारा जानवरों को इलाज के लिए ले जाते थे। बाद में फूड डिलीवरी का काम करते हुए उन्होंने अपनी कमाई से भूखे लोगों को खाना खिलाना शुरू किया। कई बार ऑर्डर कैंसिल होने पर वह अपनी जेब से पैसे खर्च करके जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराते थे। यही छोटी-छोटी कोशिशें आगे चलकर उनके जीवन का उद्देश्य बन गईं।
ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के साथ काम शुरू किया
पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन करने के बाद समय ने 2019 में डिब्रूगढ़ में एक ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के साथ काम शुरू किया। उस दौरान वह राज्य सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे थे। हालांकि, दूसरों की मदद करने की इच्छा लगातार मजबूत होती गई। 2021 के अंत में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपना पूरा समय सामाजिक कार्यों को समर्पित कर दिया। इसी दौरान उन्होंने ‘प्रोजेक्ट हुनर असम’ की शुरुआत की। उनके पहले बड़े प्रयासों में चराइदेव जिले के पिथागुटी में एक बुजुर्ग महिला के लिए घर बनाना शामिल था।














