• Latest
  • Trending
लोग साथ आते गए और संघ बढ़ता गया

लोग साथ आते गए और संघ बढ़ता गया

October 31, 2026
नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

October 31, 2026
नशे पर सर्जिकल स्ट्राइक

नशे पर सर्जिकल स्ट्राइक

October 31, 2026
युवाओं के आइडिया और उत्पादों को पंख देने की तैयारी

युवाओं के आइडिया और उत्पादों को पंख देने की तैयारी

October 31, 2026
केविन पीटरसन ने बताया, कैसे बदल रहा है भारत

नया भारत, जिसे दुनिया देख रही है

October 31, 2026
यूपी सरकार 1,000 एकड़ में डेटा सेंटर और आईटी हब करेगी विकसित

यूपी सरकार 1,000 एकड़ में डेटा सेंटर और आईटी हब करेगी विकसित

October 31, 2026
यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली के 70 घाटों पर उतरे हजारों लोग

यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली के 70 घाटों पर उतरे हजारों लोग

October 31, 2026
फिर बदला भदोही का नाम

फिर बदला भदोही का नाम

October 31, 2026
'मोदी-आबे की दोस्ती पद से नहीं, विश्वास से बनी थी'

‘मोदी-आबे की दोस्ती पद से नहीं, विश्वास से बनी थी’

October 31, 2026
गुजरात लगातार पांचवीं बार स्टार्टअप के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य बना

गुजरात लगातार पांचवीं बार स्टार्टअप के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य बना

October 31, 2026
बेलापुर में भूमि के दाम आसमान पर

बेलापुर में भूमि के दाम आसमान पर

October 31, 2026
हवा सुधारने को बीएमसी का 'डीप क्लीन प्लान'

हवा सुधारने को बीएमसी का ‘डीप क्लीन प्लान’

October 31, 2026
बंगाल में चुनाव से पहले हुआ खेला लाखों फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट हुए थे जारी

पश्चिम बंगाल के स्कूलों में मोबाइल पर लगेगा बैन

October 31, 2026
Saturday, October 31, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

लोग साथ आते गए और संघ बढ़ता गया

by ब्लिट्ज़ इंडिया
October 31, 2026
in the blitz
0
लोग साथ आते गए और संघ बढ़ता गया

दीपक द्विवेदी

20 अक्टूबर को दशहरे के दिन नागपुर के रेशिमबाग मैदान में सरसंघचालक मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया। उन्होंने आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित की और संघ के शताब्दी कार्यक्रमों के पूरा होने की घोषणा की। शताब्दी वर्ष 2 अक्टूबर 2025 की विजयादशमी से शुरू हुआ था। मोहन भागवत ने जो आंकड़े पढ़े, वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के किसी एक साल के अब तक के सबसे बड़े दावे हैं। संघ के मुताबिक उसके स्वयं सेवकों ने देश में 4,61,527 गांवों और 41,076 शहरी बस्तियों में 10,19,88,511 घरों से संपर्क किया ।

आरएसएस की स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी पर नागपुर में हुई थी। आरएसएस का न कोई सदस्यता रजिस्टर है, न सोसाइटी पंजीकरण कानून के तहत पंजीकरण। फिर भी उसने एक साल में 10 करोड़ घर गिने क्योंकि उसकी असली इकाई सदस्य नहीं, शाखा है और शाखा रोज लगती है।

YOU MAY ALSO LIKE

नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

नया भारत, जिसे दुनिया देख रही है

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सितंबर 2018 में दिल्ली के विज्ञान भवन में कहा था कि हिंदू राष्ट्र का अर्थ यह नहीं कि उसमें मुसलमानों के लिए जगह नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि एम.एस. गोलवलकर की किताब ‘बंच ऑफ थॉट्स’ अपने समय के लिए लिखी गई थी, हर समय के लिए नहीं। शताब्दी समापन भाषण में भागवत ने तीन बंधन गिनाए, जो भारतीयों को आपस में जोड़ते हैं। ये बंधन हैं मातृभूमि के रूप में भारत की भक्ति, साझे पूर्वजों पर गर्व और भारतीय संस्कृति के सार्वभौमिक मूल्य।

उल्लेखनीय है कि संघ के काम करने का तरीका बीते 100 साल में आज तक नहीं बदला। आज भी शाखा खुले मैदान में करीब एक घंटे की बैठक होती है। इसमें व्यायाम, खेल, देशभक्ति गीत, छोटी चर्चा और भगवा ध्वज के सामने प्रार्थना होती है। संघ इस ध्वज को अपना गुरु मानता है।

नागपुर के एक डॉक्टर ने विजयादशमी पर कुछ लड़कों को जोड़कर जो संगठन शुरू किया था, उसने अपना शताब्दी वर्ष 2025 में पूरा कर लिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आज करीब 90,000 दैनिक शाखाएं हैं और उसने 10 करोड़ से ज्यादा घरों से सीधा संपर्क किया।

आपकी जानकारी में संघ का ढांचा दो समानांतर पटरियों पर चलता है। मार्गदर्शन मानद प्रमुख, यानी संघचालक करते हैं। काम कार्यवाह और पूर्णकालिक प्रचारक चलाते हैं। सबसे ऊपर सरसंघचालक होते हैं। उन्हें उनके पूर्ववर्ती मनोनीत करते हैं और वे मार्गदर्शक की भूमिका में रहते हैं। कार्यकारी अधिकार सरकार्यवाह, यानी महासचिव के पास है। अभी इस पद पर दत्तात्रेय होसबाले हैं। सरकार्यवाह को हर तीन साल में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) चुनती है। यह संघ की निर्णय लेने वाली सबसे बड़ी संस्था है। मार्च में हरियाणा के समालखा में हुई प्रतिनिधि सभा में 1,487 प्रतिनिधि आए।
संघ का ढांचा राष्ट्रीय स्तर के नीचे देश क्षेत्र, प्रांत, विभाग, जिला, खंड और मंडल या बस्ती में बंटा है। लगभग हर स्तर पर तीन पद दोहराए जाते हैं: संघचालक, कार्यवाह और प्रचारक।

संघ की व्यवस्था में प्रचारक इस व्यवस्था की प्रमुख धुरी है। वह पूर्णकालिक कार्यकर्ता होता है और परंपरा से अविवाहित रहता है। उसे देश में कहीं भी और संघ से जुड़े किसी भी संगठन में भेजा जा सकता है। आगे बढ़ने के लिए प्रशिक्षण शिविर, यानी संघ शिक्षा वर्ग जरूरी हैं। 2025 में 17,000 से ज्यादा स्वयंसेवकों ने पहले स्तर का प्रशिक्षण लिया।

आरएसएस के उद्देश्य और लक्ष्य
आरएसएस का ध्येय वाक्य है ‘ राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय, इदं न मम’ यानी सब कुछ राष्ट्र को अर्पित है , मेरा कुछ भी नहीं
व्यक्ति निर्माण : व्यक्ति के चरित्र निर्माण को राष्ट्र निर्माण की नींव मानना
संगठन : हिंदू समाज को संगठित करना; संघ हिंदू को एक पंथ नहीं, साझी सभ्यता मानता है
सामाजिक समरसता : जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर सद्भाव
सेवा : आपदा राहत से लेकर आदिवासी जिलों के स्कूलों तक
परम वैभव : राष्ट्र को गौरव के शिखर तक ले जाना, संघ की दैनिक प्रार्थना का लक्ष्य
पंच परिवर्तन : मौजूदा कार्यक्रम: सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व-बोध के साथ स्वदेशी, नागरिक अनुशासन।

शताब्दी वर्ष आंकड़ों में
आरएसएस के अपने आंकड़े, 20 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत किए गए
संपर्क किए गए घर: 10,19,88,511; 4,61,527 गांव और 41,076 शहरी बस्तियां
प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठियां: 1,117 जिले, 4,26,497 लोग
• सद्भाव बैठकें: 5,036 खंड
हिंदू सम्मेलन: 34,187 मंडल (घोषित योजना: 1 लाख से ज्यादा)
युवा सम्मेलन: 39,25,225
सरसंघचालक की व्याख्यानमाला: 4 महानगर, 10,000 सवाल
साल भर में जुड़ी नई दैनिक शाखाएं: ~6,700 ।

आरएसएस करेगा संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव
रा ष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव करने जा रहा है। इंदौर में 2-4 नवंबर को आयोजित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद यह पुनर्गठन होगा, प्रस्तावित बदलावों के तहत क्षेत्रों की संख्या मौजूदा 11 से घटाकर 9 कर दी जाएगी, जबकि वर्तमान 46 प्रांतीय इकाइयों को पुनर्गठित करके लगभग 90 संभागों में बांटा जाएगा।

बैठक में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। तीन दिवसीय बैठक में मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, सभी सह-सरकार्यवाह और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी हिस्सा लेंगे। साथ ही, संगठन के सभी 46 प्रांतों और 11 क्षेत्रों के संघचालक, कार्यवाह और प्रचारक भी इसमें शामिल होंगे।

37 शाखाओं से 90,000 तक
1929 में आरएसएस की करीब 37 शाखाएं थीं। 1933 तक ये 125 हो गईं। अप्रैल 2014 में यह संख्या 29,000 से ज्यादा जगहों पर 44,000 थी।
इसके बाद बढ़त तेज रही। संघ की अपनी वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2024 में 73,117 शाखाएं थीं और एक साल बाद 83,129। यानी 12 महीने में 10,012 नई शाखाएं, करीब 14 फीसदी की बढ़त। शताब्दी वर्ष के अंत तक 56,000 जगहों पर करीब 90,000 दैनिक शाखाएं हो गईं। यह 2014 के स्तर के दोगुने से ज्यादा है। 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक संघ 98 फीसदी जिलों और 92 फीसदी तालुकों में मौजूद है। इसके अलावा 32,147 साप्ताहिक मिलन होते हैं। 59 फीसदी शाखाएं छात्रों और युवाओं की हैं। अगला घोषित लक्ष्य एक लाख दैनिक शाखाओं का है।

सौ साल में दैनिक शाखाएं
1929 : 37
1933 : 125
अप्रैल 2014 : 44,000
मार्च 2024 : 73,117
मार्च 2025 : 83,129
अक्टूबर 2026 : 90,000

संघ परिवार
आरएसएस अपनी शाखाओं से कहीं आगे उन संगठनों के जरिए काम करता है जिन्हें वह संघ-प्रेरित कहता है। ऐसे 32 संगठनों के अध्यक्ष, महामंत्री और संगठन मंत्री प्रतिनिधि सभा में आते हैं। राजनीति में भारतीय जनता पार्टी, छात्रों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, मजदूरों में भारतीय मजदूर संघ और किसानों में भारतीय किसान संघ है। धर्म के क्षेत्र में विश्व हिंदू परिषद, स्कूलों में विद्या भारती और आदिवासी कल्याण में वनवासी कल्याण आश्रम काम करते हैं। महिलाओं के बीच 1936 में बनी राष्ट्र सेविका समिति है। ज्यादातर संगठनों में संगठन मंत्री आरएसएस का प्रचारक होता है। इसी से अलग संविधान और चुने हुए प्रमुखों वाले संगठनों में एक ही सोच चलती है।

आरएसएस के संगठन
महिलाएं: राष्ट्र सेविका समिति (1936) — वी. शांता कुमारी, ‘शांतक्का’
राजनीति: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) — नितिन नबीन
छात्र और युवा: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी, 1949) — रघुराज किशोर तिवारी; बजरंग दल; दुर्गा वाहिनी
मजदूर और किसान: भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस, 1955) — एस. मल्लेशम; भारतीय किसान संघ (बीकेएस, 1979) — के. साई रेड्डी
अर्थव्यवस्था: स्वदेशी जागरण मंच; लघु उद्योग भारती; सहकार भारती; अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत
शिक्षा: विद्या भारती — रवींद्र कान्हेरे; एकल विद्यालय; भारतीय शिक्षण मंडल; अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ
सेवा: सेवा भारती; वनवासी कल्याण आश्रम (1952); आरोग्य भारती; सक्षम; नेशनल मेडिकोज ऑर्गनाइजेशन
धर्म और समाज: विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी, 1964) — आलोक कुमार; हिंदू जागरण मंच; मुस्लिम राष्ट्रीय मंच; राष्ट्रीय सिख संगत
संस्कृति और ज्ञान: संस्कार भारती; संस्कृत भारती; विज्ञान भारती; अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना; प्रज्ञा प्रवाह; क्रीड़ा भारती
पेशेवर और सीमा: अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद; पूर्व सैनिक सेवा परिषद; सीमा जागरण मंच
मीडिया: ऑर्गनाइजर (अंग्रेजी साप्ताहिक); पांचजन्य (हिंदी साप्ताहिक)
विदेश: हिंदू स्वयंसेवक संघ (एचएसएस); सेवा इंटरनेशनल

विदेश में है एचएसएस
भारत के बाहर आरएसएस हिंदू स्वयंसेवक संघ के नाम से काम करता है। उसके समन्वयक बताते हैं कि विदेशी धरती पर राष्ट्रीय शब्द का इस्तेमाल नहीं हो सकता। पहली विदेशी शाखाएं 1947 में केन्या और म्यांमार में लगीं। इन्हें वहां जाकर बसे स्वयंसेवकों ने शुरू किया। 2015 तक 39 देशों में शाखाएं चल रही थीं। भारत के बाहर सबसे ज्यादा शाखाएं नेपाल में हैं। अमेरिका में 2016 में 172 शाखाएं थीं। मध्य-पूर्व के पांच देशों में खुले में जमा होने की अनुमति नहीं है, इसलिए वहां शाखाएं भीतर लगती हैं।

शताब्दी वर्ष में सरसंघचालक खुद विदेश गए। 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में सर्व-धर्म बैठक हुई। फिर टोरंटो में सम्मेलन और 2 सितंबर से लंदन में छह दिन का कार्यक्रम रहा। लंदन कार्यक्रम को ब्रिटेन के 115 से ज्यादा संगठनों का साथ मिला। ब्रिटेन के हिंदुओं से उन्होंने कहा कि हिंदुत्व किसी से उस देश के साथ विश्वासघात करने को नहीं कहता, जहां वह रहता और काम करता है।

संघ का मानना है कि शताब्दी अंत नहीं, शुरुआत है। अगले चरण में वह साल भर में जुड़े परिवारों से संपर्क बनाए रखेगा और एक लाख शाखाओं की ओर बढ़ेगा। देश और विदेश में शुरू हुए संवाद को स्थायी कार्यक्रम बनाना भी लक्ष्य है।

भागवत के शब्दों में मंजिल है समाज को एक संगठित, परिश्रमी और विजयी शक्ति बनाना। असली कसौटी टिके रहने की है। दरवाजे पर हुआ संपर्क एक बार गिना जाता है। शाखा में आया स्वयंसेवक हर दिन गिना जाता है। इसीलिए हर दिन देश में आरएसएस के स्वयं सेवकों की संख्या बढ़ती जा रही है।

शताब्दी वर्ष में क्या हुआ
सह-सरकार्यवाह सी.आर. मुकुंद ने समालखा में बताया था कि काम दो पटरियों पर चला। एक, संगठन का विस्तार। दूसरा, समाज से संपर्क।
20 अक्टूबर की संघ की रिपोर्ट के मुताबिक 1,117 जिलों में प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठियां हुईं, जिनमें 4,26,497 लोग आए। 5,036 खंडों में सद्भाव बैठकें हुईं। 34,187 मंडलों में हिंदू सम्मेलन हुए। युवा सम्मेलनों में 39,25,225 युवा शामिल हुए। भागवत ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में व्याख्यान मालाएं लीं। इनमें लोगों ने करीब 10,000 सवाल पूछे।

अक्टूबर 2025 में योजना की घोषणा के समय संघ ने एक लाख से ज्यादा हिंदू सम्मेलनों की बात कही थी। समापन रिपोर्ट इन्हें 34,187 मंडलों में गिनती है। रिपोर्ट नहीं बताती कि गिनती का पैमाना बदला या लक्ष्य पूरा नहीं हुआ।

हर दरवाजे तक इन पंच परिवर्तन का संदेश ले जाया गया जिनकी संघ समाज से अपेक्षा करता है: सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण की चिंता, स्व-बोध के साथ स्वदेशी और नागरिक अनुशासन। मुकुंद ने केरल के काम का ब्योरा दिया कि करीब 55,000 मुस्लिम और 54,000 ईसाई परिवारों से संपर्क हुआ।

आरएसएस एक नजर में
•स्थापना : विजयादशमी, 27 सितंबर 1925, नागपुर, केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा
• शताब्दी वर्ष : 2 अक्टूबर 2025 से 20 अक्टूबर 2026
• दैनिक शाखाएं : ~90,000, ~56,000 जगहों पर
• मौजूदगी : 98% जिले, 92% तालुके; 32,147 साप्ताहिक मिलन
• शताब्दी वर्ष में संपर्क किए गए घर : 10.2 करोड़
• सबसे बड़ी संस्था : अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस);
• प्रतिनिधि सभा में आने वाले संघ-प्रेरित संगठन : 32
• विदेश में : हिंदू स्वयंसेवक संघ, 39 देशों में शाखाएं
• सदस्यता रजिस्टर : नहीं; सोसाइटी पंजीकरण कानून के तहत पंजीकृत नहीं

आज का नेतृत्व
• सरसंघचालक (मार्गदर्शक प्रमुख) : मोहन भागवत
• सरकार्यवाह (महासचिव) : दत्तात्रेय होसबाले
• सह-सरकार्यवाहों में : कृष्ण गोपाल, सी.आर. मुकुंद और अरुण कुमार शामिल
•अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख : सुनील आंबेकर
अब तक के छह सरसंघचालक
•1. केशव बलिराम हेडगेवार, ‘डॉक्टरजी’ : 1925 से 1940 (संस्थापक)
•2. माधव सदाशिवराव गोलवलकर, ‘गुरुजी’ : 1940 से 1973 (सबसे लंबा कार्यकाल)
•3. मधुकर दत्तात्रेय देवरस, ‘बालासाहेब’ : 1973 से 1994
•4. राजेंद्र सिंह, ‘रज्जू भैया’ : 1994 से 2000
•5. के.एस. सुदर्शन : 2000 से 2009
•6. मोहन भागवत : 21 मार्च 2009 से
•हर सरसंघचालक अपना उत्तराधिकारी खुद चुनता है; सरकार्यवाह का चुनाव होता है

संगठन का ढांचा
सरसंघचालक : मार्गदर्शक प्रमुख · पूर्ववर्ती द्वारा मनोनीत
सरकार्यवाह : महासचिव · कार्यकारी प्रमुख · हर 3 साल में प्रतिनिधि सभा द्वारा निर्वाचित
सह-सरकार्यवाह : संयुक्त महासचिव
अखिल भारतीय पदाधिकारी : शारीरिक, बौद्धिक, सेवा, संपर्क, प्रचार और व्यवस्था प्रमुख
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल : राष्ट्रीय कार्यकारिणी
क्षेत्र : कई प्रांतों का समूह
प्रांत : प्रदेश स्तर
विभाग : कई जिलों का समूह
जिला : जिला स्तर
खंड / नगर : ब्लॉक या कस्बा
मंडल / बस्ती : गांवों का समूह या शहरी मोहल्ला
शाखा : रोज की इकाई · कार्यवाह, मुख्य शिक्षक, गण शिक्षक, स्वयंसेवक
क्षेत्र से खंड तक हर स्तर पर तीन पद: संघचालक (मानद प्रमुख), कार्यवाह (सचिव) और प्रचारक (पूर्णकालिक संगठनकर्ता)।
निर्णय संस्थाएं : प्रतिनिधि सभा (मार्च) · कार्यकारी मंडल (शरद) · प्रांत प्रचारक बैठक (जुलाई)। पूर्णकालिक: प्रचारक (जीवन भर) · विस्तारक (तय अवधि)।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation