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भारत की अंतरिक्ष में नई छलांग, इसरो ने भेजा पहरेदार

by ब्लिट्ज़ इंडिया
September 5, 2026
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vikram

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। अपनी असफलताओं को भुलाकर इसरो अब आगे कदम बढ़ा चुका है। इसरो ने शुक्रवार तड़के जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट से ईओएस-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। करीब 2,367 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से काम करने वाला भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है। इसे अंतिम कक्षा में पहुंचाने के लिए सैटेलाइट के थ्रस्टर्स की मदद से कई चरणों में कक्षा बदली जाएगी।

यह भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है, जो जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से काम करेगा। करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से यह बड़े इलाकों की लगातार निगरानी और बार-बार तस्वीरें लेने में सक्षम होगा। इससे मौसम की सटीक निगरानी, प्राकृतिक आपदाओं की जल्द पहचान, कृषि और पर्यावरण पर नजर रखने के साथ-साथ सीमाओं और रणनीतिक इलाकों की निगरानी में भारत की क्षमता मजबूत होगी।

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सैटेलाइट ईओएस-05 को जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया।
इसके लिए 27 घंटे का काउंटडाउन था। यह मिशन भारत के लिए बहुत खास है। इस रॉकेट को प्यार से ‘नॉटी बॉय’ कहा जाता है। पिछले कुछ मिशन में इसरो को असफलता मिली थी। कई असफलताओं के बाद इसरो इस लॉन्च से जोरदार वापसी की उम्मीद कर रहा था। यह सैटेलाइट आपदा प्रबंधन और मौसम की सटीक जानकारी देने में गेम चेंजर साबित होगा।

51.7 मीटर ऊंचे और 420.5 टन वजनी तीन चरणों वाले जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट ने शुक्रवार सुबह 2 बजकर 55 मिनट पर उड़ान भरी। रॉकेट ने करीब 2,367 किलोग्राम वजनी ईओएस-05 सैटेलाइट को उसकी निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित किया। यह जीएसएलवी रॉकेट की 19वीं उड़ान थी।

सैटेलाइट कई चरणों में अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचेगा। इसके लिए सैटेलाइट में लगे थ्रस्टर्स यानी छोटे रॉकेट इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा। अंतिम कक्षा में इसकी न्यूनतम ऊंचाई करीब 170 किलोमीटर, अधिकतम ऊंचाई 28,934 किलोमीटर और कक्षा का झुकाव 19.28 डिग्री होगा।

इसरो चीफ ने क्या कहा?

इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा, ‘मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि जीएस एलवी-एफ17 रॉकेट ने एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-05 यानी जियो-इमेजिंग स्टार सैटेलाइट को सफलतापूर्वक और बिल्कुल सटीक तरीके से उसकी निर्धारित और जरूरी कक्षा में स्थापित कर दिया है। एक बार अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-05 को कक्षा में पूरी तरह सक्रिय कर दिया जाएगा, तो यह जियो ऑर्बिट से काम करने वाला भारत का पहला समर्पित इमेजिंग सैटेलाइट बन जाएगा। यह हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक डेटा उपलब्ध कराएगा।’

इस सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में क्यों भेजा गया?

यहां यह जानना जरूरी है कि आम सैटेलाइट धरती के चक्कर लगाते रहते हैं। इससे वे एक जगह पर लगातार नजर नहीं रख पाते। जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट का फायदा यह है कि सैटेलाइट एक बड़े इलाके पर फोकस बनाए रखता है। ईओएस-05 इसी तकनीक पर काम करेगा। यह लगातार भारत और उसके आसपास के इलाकों की निगरानी करेगा। इससे मौसम के बदलाव और कृषि से जुड़ी सटीक जानकारी मिलेगी। इससे धरती की कुल मिलाकर पहरेदारी होगी। आपदा हो या कोई दुश्मन…इससे भारत हर गतिविधि पर नजर रख सकेगा।

इसरो के रॉकेट जीएसएलवी को ‘नॉटी बॉय’ का नाम क्यों?

दरअसल, जीएसएलवी का पुराना रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है। शुरुआती उड़ानों में इसे कई बार असफलता मिली ।इसके पहले 18 मिशन में से 6 पूरी तरह सफल नहीं हो पाए थे। इसी वजह से इसे ‘नॉटी बॉय’ कहा जाता है। हालांकि, अब इसकी तकनीक में काफी सुधार हो चुका है।

भारत के लिए क्यों खास है ईओएस-05?

फरवरी 2026 तक भारत के पास 21 सक्रिय अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट थे। इनमें से ज्यादातर सैटेलाइट लो-अर्थ ऑर्बिट या सूर्य-समकालिक ध्रुवीय कक्षा में काम करते हैं। वहीं, जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से पृथ्वी की निगरानी करने की भारत की मौजूदा क्षमता
इनसेट -3डी, इनसेट-3 डीआर और इनसेट-3डीएस जैसे मौसम संबंधी सैटेलाइटों तक सीमित थी।

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