ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।शनिवार सुबह लाल क़िले की प्राचीर से पहली बार वंदे मातरम् गाया जाएगा। राष्ट्रगीत इस साल 150 बरस का हो रहा है। पर असली ख़बर गीत नहीं है — असली ख़बर यह है कि इस बार मेहमानों की सूची में कौन है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 10 अगस्त को दिल्ली में यह इंतज़ाम बताए। प्रधानमंत्री के पहुँचते ही वंदे मातरम् गाया जाएगा, उसके बाद ध्वजारोहण और देश के नाम संबोधन। ज्ञानपथ पर 2,500 एनसीसी कैडेट और माय भारत वॉलंटियर मिलकर ‘वंदे मातरम्’ लिखेंगे। वायुसेना का एक एमआई-17 हेलिकॉप्टर 150 साल का बैनर लेकर फूल बरसाएगा। 8 अगस्त से देश भर में 343 जगहों पर सैन्य बैंड बज रहे हैं, और वहाँ जाने के लिए किसी पास की ज़रूरत नहीं — यह बात बहुत कम लोगों को पता है।
80वाँ स्वतंत्रता दिवस: रक्षा मंत्रालय ने 10 अगस्त 2026 को दिल्ली में इस बार की तैयारियों का ब्योरा दिया।
मेहमानों की सूची बताती है कि देश किसे अपनी कामयाबी मानता है। इस बार उसमें रेहड़ी वाले का नाम है।
एक नज़र में
• मौक़ा: 80वाँ स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त 2026, लाल क़िला
• पहली बार: प्राचीर से वंदे मातरम्, राष्ट्रगीत के 150 साल पर
• विशेष मेहमान: लगभग 5,000
• प्राचीर पर: अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड 2026 के 19 पदक विजेता छात्र
• ज्ञानपथ पर: 2,500 एनसीसी कैडेट और माय भारत वॉलंटियर
• बैंड: 8 अगस्त से 343 जगहों पर, आम लोगों के लिए खुला
• दीर्घाओं के नाम: देश की बड़ी झीलों पर (गणतंत्र दिवस पर नदियों के नाम थे)
• मेट्रो: 15 अगस्त को सुबह 4 बजे से
अब उस सूची पर आइए, क्योंकि वहीं यह समारोह सिर्फ़ समारोह नहीं रह जाता। पीएम स्वनिधि के रेहड़ी-पटरी वाले बुलाए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के सफ़ाईकर्मी, दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के वार्ड अटेंडेंट, दिल्ली मेट्रो के कर्मचारी, कर्तव्य पथ बनाने वाले मज़दूर और भारत टैक्सी के ड्राइवर भी। इनके साथ पीएम मुद्रा से कर्ज़ लेकर कारोबार खड़ा करने वाली महिलाएँ, पीएम विश्वकर्मा के कारीगर, पीएम मत्स्य किसान समृद्धि योजना के मछली पालक, पीएम सूर्य घर के तहत छत पर सोलर लगाने वाले परिवार, और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के सबसे अच्छे इंटर्न। इस साल की प्रतियोगिताओं के क़रीब 600 विजेता भी आएँगे — इनमें एक निबंध प्रतियोगिता का विषय था, 2047 तक विकसित भारत बनाने में एआई की भूमिका।
दो छोटी बातें और, जो छोटी दिखती हैं पर हैं नहीं। इस बार बैठने की दीर्घाओं के नाम देश की बड़ी झीलों पर रखे गए हैं — गणतंत्र दिवस पर नदियों के नाम थे। और समारोह के बाद उसी दोपहर एनसीसी कैडेट और वॉलंटियर सफ़ाई अभियान चलाएँगे, ताकि लाल क़िला अगले ही दिन आम सैलानियों के लिए खुला रहे। असली परीक्षा अगले साल है: क्या इन्हीं लोगों की बात सितंबर में भी सुनी जाएगी, या सिर्फ़ अगस्त की तस्वीर में? एक बार बुलाना सम्मान है। बार-बार सुनना व्यवस्था है।














