ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।अगर आपने इस ख़रीफ़ सीज़न में अभी तक अपनी फ़सल का बीमा नहीं कराया है, तो आपके पास दो दिन बचे हैं। प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना में नाम दर्ज कराने की आख़िरी तारीख़ 15 अगस्त है, और यह तारीख़ पहले ही एक बार बढ़ाई जा चुकी है।
सीधी बात यह है कि इस तारीख़ का असर सब पर एक जैसा नहीं है। जिस किसान ने बैंक या सहकारी समिति से फ़सली कर्ज़ लिया है, उसका बीमा अपने आप हो जाता है — जब तक वह लिखित में मना न कर दे। लेकिन जिसने कर्ज़ नहीं लिया, यानी ग़ैर-कर्ज़दार किसान, उसे ख़ुद जाकर नाम लिखवाना पड़ता है। यही वह किसान है जिस पर यह तारीख़ सबसे भारी पड़ती है, और यही वह किसान है जो आमतौर पर छूट जाता है।
दो दिन बाक़ी: ख़रीफ़ 2026 के लिए प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना में नाम दर्ज कराने की आख़िरी तारीख़ 15 अगस्त है।
बीमा उस साल काम आता है जिस साल कोई उम्मीद नहीं करता। इसीलिए वह हर साल कराना पड़ता है।
एक नज़र में
• योजना: प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना (पीएमएफ़बीवाई)
• सीज़न: ख़रीफ़ 2026
• आख़िरी तारीख़: 15 अगस्त 2026 (एक बार बढ़ाई जा चुकी)
• कर्ज़दार किसान: बीमा अपने आप, जब तक लिखित में मना न करें
• ग़ैर-कर्ज़दार किसान: ख़ुद नाम दर्ज कराना ज़रूरी
• कहाँ जाएँ: बैंक शाखा, सहकारी समिति, कॉमन सर्विस सेंटर या pmfby.gov.in
• साथ ले जाएँ: आधार, बैंक पासबुक, ज़मीन का रिकॉर्ड, बुवाई का प्रमाण
क्या करना है, आसान भाषा में। नज़दीकी बैंक शाखा, सहकारी समिति या कॉमन सर्विस सेंटर पर जाइए, या pmfby.gov.in पर ख़ुद रजिस्टर कीजिए। साथ में आधार, बैंक पासबुक, ज़मीन का रिकॉर्ड और बुवाई का प्रमाण-पत्र रखिए। बटाईदार और किरायेदार किसान भी शामिल हो सकते हैं, बशर्ते राज्य ने उस श्रेणी को अधिसूचित किया हो — यह पता करना ज़रूरी है, क्योंकि हर राज्य की सूची अलग है।
बड़ी बात यह है कि यह तारीख़ चूकने का मतलब पूरे सीज़न का जोखिम अपने ऊपर लेना है। अगस्त-सितंबर की बारिश ही तय करती है कि ख़रीफ़ की फ़सल घर आएगी या नहीं, और उसी वक़्त बीमा बंद हो जाता है। आगे का रास्ता साफ़ है और सरकार के हाथ में है — अगर पंचायत स्तर पर आख़िरी हफ़्ते में एक-एक दिन का कैंप लगे, जैसा कुछ राज्य पहले कर चुके हैं, तो ग़ैर-कर्ज़दार किसान का नाम छूटना बहुत हद तक रुक सकता है। योजना अच्छी है। उसे आख़िरी गाँव तक पहुँचाना अब तारीख़ का नहीं, इंतज़ाम का सवाल है।














