ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को विधानसभा में विद्या वाहिनी योजना के तहत उत्तरी दिल्ली के ज़ोन-7 की क़रीब 200 छात्राओं को साइकिल दीं। इस साल यह योजना दिल्ली सरकार के स्कूलों की लगभग 1.40 लाख छात्राओं तक पहुँचेगी।
मुख्यमंत्री ने बात ठीक पकड़ी — साइकिल यहाँ सिर्फ़ आने-जाने का साधन नहीं है, बल्कि बेटी की पढ़ाई और उसकी आत्मनिर्भरता का सहारा है। सरकार ने योजना के चार मक़सद बताए हैं: स्कूल आना-जाना आसान हो, पढ़ाई बीच में न छूटे, हाज़िरी सुधरे, और बेटियों का आत्मविश्वास बढ़े।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता। फ़ोटो: भारत सरकार / दिल्ली सरकार (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स से।
बेटी और स्कूल के बीच की दूरी हमेशा किलोमीटर में नहीं नापी जाती। कई बार वह इस बात में नापी जाती है कि घरवाले रास्ते को सुरक्षित मानते हैं या नहीं।
At a Glance
• योजना विद्या वाहिनी योजना, दिल्ली सरकार
• कब 10 अगस्त 2026, दिल्ली विधानसभा
• कितनी साइकिल लगभग 200, कक्षा नौ, ज़ोन-7 उत्तरी दिल्ली
• इस साल कुल लगभग 1.40 लाख छात्राएँ
• मक़सद आवागमन, पढ़ाई की निरंतरता, हाज़िरी, आत्मविश्वास
साइकिल बाँटने की योजनाएँ देश में पहले भी चली हैं, और उनका अनुभव एक जैसा रहा है — जहाँ स्कूल पैदल जाने की दूरी से बाहर है और घर में दूसरा वाहन नहीं है, वहाँ बेटियों के माध्यमिक स्तर पर टिकने में साफ़ फ़र्क़ पड़ता है। दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले बड़े हिस्से की हालत ठीक यही है।
असली जाँच का तरीक़ा भी मौजूद है। सरकार अगर इन बच्चियों के नौवीं से दसवीं तक पहुँचने का आँकड़ा पिछले सालों के मुक़ाबले छापे, तो साफ़ दिख जाएगा कि साइकिल ने कितना काम किया। यह आँकड़ा माँगा जाना चाहिए।














