ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।राज्यसभा ने मंगलवार को ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 पास कर दिया। एक दिन पहले लोकसभा इसे पास कर चुकी थी। सीधी बात यह है कि अब देश के अधिकरणों (ट्रिब्यूनल) के लिए एक राष्ट्रीय अधिकरण आयोग बनेगा।
इस आयोग में एक अध्यक्ष, दो न्यायिक सदस्य और दो तकनीकी सदस्य होंगे। इनका काम होगा — सभी केंद्रीय अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों का चयन करना, उनके कामकाज की समीक्षा करना, और शिकायतों की जाँच पर नज़र रखना। लेकिन आम आदमी के लिए सबसे बड़ी बात इसमें छिपी दूसरी है — राष्ट्रीय अधिकरण डेटा ग्रिड, यानी यह सार्वजनिक रिकॉर्ड कि किस अधिकरण में कितने मामले हैं और कितनी देर लग रही है।
केंद्रीय क़ानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, जिन्होंने यह विधेयक सदन में रखा। फ़ोटो: पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार (GODL-India), विकिमीडिया कॉमन्स से।
नियुक्ति और कार्यकाल में एकरूपता बड़ी बात है। पर जिस आदमी का मामला सालों से अटका है, उसके लिए असली बदलाव यह होगा कि अब देरी का हिसाब सार्वजनिक होगा।
At a Glance
• पास हुआ लोकसभा 10 अगस्त, राज्यसभा 11 अगस्त 2026
• क्या बनेगा राष्ट्रीय अधिकरण आयोग — अध्यक्ष, 2 न्यायिक, 2 तकनीकी सदस्य
• साथ में राष्ट्रीय अधिकरण डेटा ग्रिड
• आधार मद्रास बार एसोसिएशन मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
• मंत्री अर्जुन राम मेघवाल
देश के अधिकरणों में कंपनी क़ानून, आयकर, बिजली, टेलीकॉम, सशस्त्र बल और पर्यावरण से जुड़े लाखों मामले चलते हैं। दिक्कत क़ानून की नहीं रही — दिक्कत रही है ख़ाली पड़े पद, अलग-अलग कार्यकाल, और हर अधिकरण की अपनी-अपनी चयन प्रक्रिया।
अब असली परीक्षा काग़ज़ से बाहर है: आयोग कितनी जल्दी बनता है, ख़ाली पद कितनी तेज़ी से भरते हैं, और डेटा ग्रिड ऐसी भाषा में छपता है या नहीं कि एक सामान्य नागरिक उसे पढ़ सके। ब्लिट्ज़ इंडिया इन्हीं तीन बातों पर नज़र रखेगा।














