ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।अमेरिका ने नियम जारी कर दिया है कि ग्रीन कार्ड, नागरिकता, वर्क परमिट और परिवार से जुड़ी अर्ज़ियाँ अब ऑनलाइन ही दाख़िल करनी होंगी। जिन भारतीय परिवारों का कोई सदस्य अमेरिका में है, उनके लिए यह छोटी सी लगने वाली बात बहुत महंगी पड़ सकती है — अगर वक़्त पर ध्यान न दिया जाए।
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने फ़ेडरल रजिस्टर में जारी एक नियम में कहा है कि जो फ़ॉर्म कम से कम 180 दिन से इलेक्ट्रॉनिक तरीक़े से भरे जा सकते हैं, उन्हें अब ऑनलाइन ही जमा करना होगा। नियम में यह व्यवस्था भी है कि कम से कम 60 दिन की सूचना देकर किसी फ़ॉर्म को सिर्फ़ ऑनलाइन कर दिया जाएगा — यानी उसके बाद काग़ज़ का विकल्प रहेगा ही नहीं। जिन आवेदनों पर यह लागू होगा उनमें ग्रीन कार्ड और उसका नवीनीकरण, परिवार आधारित याचिकाएँ, नागरिकता के आवेदन, शरण के दावे, वर्क परमिट और अस्थायी संरक्षित दर्जा शामिल हैं। आवेदक को आम तौर पर यूएससीआईएस का ऑनलाइन खाता बनाना होगा।
दो तारीख़ें याद रखिए: 180 दिन ऑनलाइन उपलब्ध रहने के बाद ऑनलाइन भरना ज़रूरी, और 60 दिन की सूचना के बाद काग़ज़ बंद।
नियम बस यह बदल रहा है कि फ़ॉर्म कहाँ जमा होगा। पर ग़लत जगह जमा हुआ फ़ॉर्म वापस आता है — और लाइन में जगह चली जाती है।
एक नज़र में
• किसने जारी किया: यूएससीआईएस, फ़ेडरल रजिस्टर में
• पहला नियम: 180 दिन से ऑनलाइन उपलब्ध फ़ॉर्म अब ऑनलाइन ही
• दूसरा नियम: 60 दिन की सूचना पर फ़ॉर्म सिर्फ़ ऑनलाइन किया जा सकेगा
• किन पर लागू: ग्रीन कार्ड और नवीनीकरण
• साथ ही: परिवार आधारित याचिकाएँ, नागरिकता के आवेदन
• साथ ही: शरण के दावे
• साथ ही: वर्क परमिट और अस्थायी संरक्षित दर्जा
• ज़रूरी: यूएससीआईएस का ऑनलाइन खाता
• दो तरीक़े: फ़ॉर्म ऑनलाइन भरें, या भरा हुआ पीडीएफ़ दस्तावेज़ों के साथ अपलोड करें
भारतीयों के लिए यह ख़बर बाक़ी देशों से ज़्यादा मायने रखती है, और वजह गिनती है। रोज़गार आधारित ग्रीन कार्ड की क़तार में और वर्क परमिट के नवीनीकरण में भारतीयों की संख्या सबसे बड़ी है। वर्क परमिट वही दस्तावेज़ है जिससे तय होता है कि पति या पत्नी नौकरी कर पाएँगे या नहीं, जब तक मुख्य मामला लंबित है। ऐसे में एक ग़लत तरीक़े से जमा हुआ आवेदन पैसे का नहीं, महीनों का नुक़सान होता है — क्योंकि लौटा हुआ आवेदन आम तौर पर आपको उसी क़तार के आख़िर में खड़ा कर देता है, और भारतीय श्रेणियों में यह क़तार सालों की होती है।
अच्छी बात यह है कि लंबे समय में यह बदलाव उन्हीं लोगों की मदद करेगा जिन्हें शुरू में परेशानी होगी। ऑनलाइन जमा करने पर रसीद तुरंत मिलती है, मामले की स्थिति बिना फ़ोन किए दिखती रहती है, और डाक में देरी या दस्तावेज़ खो जाने जैसी सबसे आम शिकायतें अपने आप ख़त्म हो जाती हैं — और इसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा उन्हें होता है जो अमेरिका के बाहर से आवेदन कर रहे हैं। असली ख़तरा बदलाव के दौर में है। इसलिए तीन काम आज ही कर लीजिए: यूएससीआईएस का ऑनलाइन खाता अभी बना लीजिए, भले ही कोई आवेदन बाक़ी न हो; एजेंसी की सूची देख लीजिए कि कौन-से फ़ॉर्म पहले से ऑनलाइन अनिवार्य हैं, क्योंकि यह सूची बदलती रहती है; और अगर कोई वकील या एजेंट आपकी तरफ़ से आवेदन करता है तो लिखित में पूछ लीजिए कि आवेदन किस खाते से जाएगा। अब काग़ज़ नहीं, खाते तक पहुँच ही सबसे क़ीमती चीज़ है।













