• Latest
  • Trending
सरकारी राहत ने दी मुंबई में रीडेवलपमेंट को रफ्तार

सवा करोड़ घर मंज़ूर, अब ज़मीन की बारी

August 12, 2026
pasport

अमेरिका का फॉर्म अब सिर्फ़ ऑनलाइन

August 12, 2026
jewellery shop india

सोना फिर चढ़ा, तेल नब्बे डॉलर के पास

August 12, 2026
monsoon

राजस्थान और एमपी में बारिश का रेड अलर्ट

August 12, 2026
farmer

दस करोड़ किसान आईडी, अब आगे क्या

August 12, 2026
vegetable

आपकी थाली और महंगाई का आंकड़ा

August 11, 2026
दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026

बुवाई पटरी पर, अब नज़र अगस्त की बारिश पर

August 11, 2026
badminton-court

असम की अस्मिता, कोरिया में पहला खिताब

August 11, 2026
hospital

सत्तर पार हैं? कार्ड बनवा लीजिए

August 11, 2026
neet-exam

भर्ती का कैलेंडर तय हो, बात यहीं अटकी है

August 11, 2026
दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026

बारिश लौटी, बुवाई अब भी पीछे

August 10, 2026
आयुष्मान भारत योजना

70 पार हैं तो इलाज का हक़ अलग

August 10, 2026
student

चार साल की डिग्री, तो पीजी एक साल में

August 10, 2026
Wednesday, August 12, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

सवा करोड़ घर मंज़ूर, अब ज़मीन की बारी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 12, 2026
in the blitz
0
सरकारी राहत ने दी मुंबई में रीडेवलपमेंट को रफ्तार

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी में अब तक सवा करोड़ से ज़्यादा घर मंज़ूर हो चुके हैं और एक करोड़ से ज़्यादा बनकर लोगों को मिल भी चुके हैं। दिल्ली में मंगलवार को हुई एक कॉन्फ़्रेंस में जो बात कही गई वह और अहम है — अगली चुनौती पैसे की नहीं, ज़मीन की है।

शहरी विकास विभाग के सचिव सतेंद्र सिंह ने ‘सस्ते आवास की नई सोच: योजना से टिकाऊ व्यवस्था तक’ विषय पर हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में बताया कि पीएम आवास योजना-शहरी के तहत 1.25 करोड़ से ज़्यादा घर मंज़ूर हुए हैं और एक करोड़ से ज़्यादा पूरे होकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। उनका कहना था कि अब सस्ते आवास को एक योजना की तरह नहीं, एक टिकाऊ व्यवस्था की तरह देखना होगा — जिसमें ख़रीदकर घर लेना ही नहीं, किराए पर रहने का विकल्प भी हो। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने उसी मंच से कहा कि आवास को अलग-थलग कल्याणकारी योजना मानने के बजाय शहरी नियोजन और आर्थिक विकास का हिस्सा मानना चाहिए, और ज़मीन की उपलब्धता इस क्षेत्र की सबसे बड़ी अड़चनों में है।

YOU MAY ALSO LIKE

अमेरिका का फॉर्म अब सिर्फ़ ऑनलाइन

सोना फिर चढ़ा, तेल नब्बे डॉलर के पास

सस्ता हिस्सा और महंगा हिस्सा: घर बनाना और उसके लिए पैसा जुटाना भारत ने सीख लिया। उसे काम की जगह के पास बनाना अभी बाक़ी है।
सब्सिडी बजट में बढ़ाई जा सकती है। शहर के भीतर की ज़मीन नहीं बढ़ाई जा सकती। पूरी दिक़्क़त इसी फ़र्क़ में है।

एक नज़र में

• पीएम आवास योजना-शहरी में मंज़ूर घर: 1.25 करोड़ से ज़्यादा
• बनकर सौंपे गए: 1 करोड़ से ज़्यादा
• किसने बताया: सतेंद्र सिंह, सचिव, शहरी विकास विभाग
• मौक़ा: सस्ते आवास पर राष्ट्रीय सम्मेलन, नई दिल्ली
• नीति आयोग के राजीव गौबा की बात: ज़मीन की उपलब्धता सबसे बड़ी अड़चन
• सुझाए गए सुधार: शहरों के मास्टर प्लान में बदलाव
• साथ ही: सस्ते आवास के लिए ज़्यादा ज़मीन
• साथ ही: लैंड पूलिंग
• साथ ही: ट्रांसफ़रेबल डेवलपमेंट राइट्स

ज़मीन क्यों सबसे बड़ी अड़चन है, यह समझना आसान है। शहर के बाहरी छोर पर ज़मीन सस्ती मिलती है, इसलिए घर वहीं बनते हैं। पर जिस मज़दूर या कर्मचारी को घर चाहिए, उसका काम शहर के भीतर है। रोज़ आने-जाने का किराया और समय मिलकर उस बचत को खा जाते हैं जो सस्ते घर से हुई थी। यानी सस्ता आवास सिर्फ़ बनाना नहीं है, सही जगह पर बनाना है — और सही जगह वही है जहाँ ज़मीन सबसे महंगी और सबसे कम उपलब्ध है। जो तीन उपाय बताए गए, वे इसी गुत्थी के अलग-अलग सिरे हैं। मास्टर प्लान बदलने का मतलब है यह तय करना कि कहाँ क्या बन सकता है — इसमें पैसा नहीं लगता, सिर्फ़ फ़ैसला लगता है। लैंड पूलिंग में बिखरे हुए निजी प्लॉट जोड़कर एक नियोजित लेआउट बनाया जाता है और हर मालिक को छोटा पर सुविधाओं वाला प्लॉट वापस मिलता है। और टीडीआर में जिसकी ज़मीन ली जाती है उसे कहीं और ज़्यादा निर्माण का अधिकार मिल जाता है।

किराए वाली बात पर उतना ही ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यह तय करती है कि योजना किस तक पहुँचेगी। ख़रीदकर घर लेना उस परिवार के लिए ठीक है जो शहर में जम चुका है। जो मज़दूर अभी-अभी गाँव से आया है और अगले पाँच साल में शहर बदल भी सकता है, उसके लिए यह मॉडल काम नहीं करता — और भारत के शहर इसी मज़दूर के दम पर बढ़ रहे हैं। किराए के लिए बनी, किराए पर चलने वाली और भरोसेमंद क़ानून वाली आवास व्यवस्था उस तक पहुँचती है जहाँ मालिकाना मॉडल पहुँच ही नहीं सकता। यही वह बदलाव है जिसे सचिव ने ‘योजना से व्यवस्था’ कहा। एक करोड़ घर बनाकर देना छोटी उपलब्धि नहीं है। अगला करोड़ घर से ज़्यादा प्लॉट, प्लान और किरायानामे का सवाल है — और ये फ़ैसले दिल्ली में नहीं, राज्यों की राजधानियों और नगर निगमों में होते हैं।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation