ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।जब भी कॉमर्स या फाइनेंस में पढ़ाई करने वाले छात्रों से उनके ड्रीम करियर के बारे में पूछा जाता है, तो सबसे पहला जवाब चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) या कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) ही होता है। सालों से हमारे यहां इन्हीं दोनों कोर्सेस का भारी दबदबा रहा है। युवाओं को लगता है कि बस यही दो रास्ते हैं जो सफलता तक जाते हैं लेकिन, जरा सोचिए, अगर आपको एक ऐसा कोर्स मिल जाए जिसकी डिमांड न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में हो? और जो आपको ऐसी शानदार नौकरी दिलाए कि आप सच में मालामाल हो जाएं? जी हां, हम बात कर रहे हैं सीएफए यानी चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट कोर्स की। आज के दौर में यह कोर्स युवाओं की पहली पसंद बनता जा रहा है।
क्या है यह कोर्स?
सीएफए एक इंटरनेशनल लेवल का प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन है। इसे अमेरिका का ‘सीएफए इंस्टीट्यूट’ आयोजित करवाता है। अगर आप इसे फाइनेंस की दुनिया का गोल्ड मेडल कहें, तो यह बिल्कुल भी गलत नहीं होगा। सीए या सीएस जहां मुख्य रूप से अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, टैक्स और कंपनी लॉ पर फोकस करते हैं, वहीं सीएफए का पूरा जोर इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, शेयर बाजार, वेल्थ मैनेजमेंट और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट पर होता है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर आपको पैसों से पैसा बनाना अच्छा लगता है और बड़ी-बड़ी कंपनियों को निवेश की सही सलाह देने में दिलचस्पी है, तो यह कोर्स खासतौर पर आपके लिए ही बना है।
कौन कर सकता है यह कोर्स?
इस कोर्स की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे करने के लिए आपको कोई अलग से बहुत बड़ी या खास डिग्री नहीं चाहिए। अगर आपने अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली है, तो आप इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं। अगर आप अपनी ग्रेजुएशन के आखिरी साल (फाइनल ईयर) में पढ़ाई कर रहे हैं, तब भी आप इसका एग्जाम दे सकते हैं।
जरूरी बात कि इसमें रजिस्ट्रेशन के लिए आपके पास एक वैलिड इंटरनेशनल पासपोर्ट होना बेहद जरूरी है। बिना पासपोर्ट के आप इसमें एंट्री नहीं ले सकते।
कैसे पार करें ये नैया?
सीएफए कोई ऐसा आम कोर्स नहीं है जिसे आप रातों-रात गाइड पढ़कर पास कर लेंगे। इसे काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है और इसे तीन लेवल्स में बांटा गया है-
1. लेवल 1 : इसमें फाइनेंस, इकोनॉमिक्स और इन्वेस्टमेंट के बेसिक कॉन्सेप्ट्स पर बात होती है। यह शुरुआत है, इसलिए थोड़ी आसान लगती है।
2. लेवल 2 : यह थोड़ा एडवांस और मुश्किल लेवल है। यहां एसेट वैल्यूएशन और फाइनेंशियल एनालिसिस पर ज्यादा जोर दिया जाता है।
3 . लेवल 3 : यह सबसे बड़ा और आखिरी पड़ाव है। इसमें आपको पोर्टफोलियो मैनेजमेंट और वेल्थ प्लानिंग की एकदम गहरी बारीकियां सिखाई जाती हैं।
जब आप ये तीनों लेवल पास कर लेते हैं, उसके बाद आपको फाइनेंस के फील्ड में लगभग 3-4 साल का वर्क एक्सपीरियंस (काम का तजुर्बा) दिखाना होता है। इसके बाद जाकर आपको सीएफए का फाइनल टैग मिल जाता है।
वो सैलरी जो कर देगी मालामाल
अब सीधे आते हैं सबसे काम की बात पर कि आखिर यह कोर्स आपको मालामाल कैसे करेगा? आज के समय में हर बड़ी कंपनी, मल्टीनेशनल बैंक और बड़े-बड़े रईस लोगों को ऐसे एक्सपर्ट्स की सख्त जरूरत है जो उनके पैसों को सही जगह पर इन्वेस्ट कर सकें। एक सीएफए की नौकरी ठीक यही होती है। कोर्स पूरा करने के बाद आप इन्वेस्टमेंट बैंकर, पोर्टफोलियो मैनेजर, रिस्क एनालिस्ट, या फाइनेंस डायरेक्टर जैसी टॉप लेवल की पोजीशंस पर काम कर सकते हैं।














