ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने सरकारों, इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स, एकेडेमिया, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और इंटरनेशनल पार्टनर्स से देश में ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिटिव ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम बनाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।
फिक्क ी द्वारा आयोजित ‘भारत ग्रीन हाइड्रोजन समिट 2026’ के दूसरे एडिशन में बोलते हुए, नए और रिन्यूएबल एनर्जी राज्य मंत्री ने कहा कि ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है।नाइक ने कहा, आज सवाल यह नहीं है कि क्या ग्रीन हाइड्रोजन इंडस्टि्रयल डीकार्बोनाइजेशन का आधार बनेगा, बल्कि यह है कि कौन से देश इस बदलाव का नेतृत्व करेंगे। हाइड्रोजन इकॉनमी में ग्लोबल लीडर के तौर पर उभरने के लिए भारत की स्थिति अनोखी है।
उन्होंने कहा, आइए हम ‘मेड-इन-इंडिया’ ग्रीन हाइड्रोजन को क्लीन एनर्जी, टेक्नोलॉजिकल एक्सीलेंस और सस्टेनेबल इंडस्टि्रयल ग्रोथ का दुनिया का भरोसेमंद प्रतीक बनाने के लिए मिलकर काम करें।
नाइक ने आगे कहा कि नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन ने एक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार इकोसिस्टम बनाया है।
आइए हम ‘मेड-इन-इंडिया’ ग्रीन हाइड्रोजन को क्लीन एनर्जी, टेक्नोलॉजिकल एक्सीलेंस और सस्टेनेबल इंडस्टि्रयल ग्रोथ का दुनिया का भरोसेमंद प्रतीक बनाने के लिए मिलकर काम करें।
प्रोडक्शन इंसेंटिव, देश में इलेक्ट्रोलाइज़र मैन्युफैक्चरिंग, रिफाइनरियों और फर्टिलाइज़र में डिमांड पैदा करना, मोबिलिटी, शिपिंग और स्टील में पायलट प्रोजेक्ट्स और एक सक्षम रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पॉलिसी के इरादे को कमर्शियल हकीकत में बदल रहे हैं।
उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा, भारत में ग्रीन हाइड्रोजन अब भविष्य का विचार नहीं है; यह तेज़ी से बढ़ता हुआ आर्थिक अवसर बन रहा है। कॉमर्शियल-स्केल प्रोडक्शन से लेकर हाल ही में शुरू की गई भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन तक, हमारी प्रगति उन क्षमताओं के दायरे को दर्शाती है जिनकी भारत को ग्लोबल हाइड्रोजन हब के रूप में स्थापित करने के लिए जरूरत है।
नाइक ने आगे कहा कि ग्लोबल हाइड्रोजन हब बनने के लिए सिर्फ़ प्रोडक्शन कैपेसिटी से ज़्यादा की जरूरत होगी।
इसके लिए इनोवेशन, कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस, मज़बूत सप्लाई चेन, इंटरनेशनल लेवल पर स्वीकार्य स्टैंडर्ड्स, स्किल्ड ह्यूमन रिसोर्स और लंबे समय तक चलने वाली ग्लोबल पार्टनरशिप की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा कि सरकारों, इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स, एकेडेमिया, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और इंटरनेशनल पार्टनर्स को ग्लोबल लेवल पर कॉम्पिटिटिव हाइड्रोजन इकोसिस्टम बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
इस कार्यक्रम में गुजरात के ऊर्जा राज्य मंत्री ऋषिकेश गणेशभाई पटेल ने कहा कि उनका राज्य भारत का ‘ग्रीन हाइड्रोजन ग्रोथ इंजन’ बनने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के भरपूर स्रोतों, विश्व-स्तरीय बंदरगाहों, मजबूत औद्योगिक बुनियादी ढांचे और एक प्रगतिशील ग्रीन हाइड्रोजन नीति के साथ, यह राज्य उत्पादन, नवाचार और निर्यात के लिए एक एकीकृत इकोसिस्टम प्रदान करता है।
उन्होंने उद्योग जगत को भी आमंत्रित किया कि वे विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था बनाने में गुजरात के साथ साझेदारी करें।
भारत में कनाडा के उच्चायोग में कॉमर्शियल मामलों के मंत्री एड जैगर ने कहा कि भारत का वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन हब बनने का लक्ष्य विश्वसनीय और हासिल करने योग्य है।
फिक्क ी की महानिदेशक ज्योति विज ने बताया कि भारत का लक्ष्य 2030 तक वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन बाजार का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा हासिल करना है।
उन्होंने कहा कि इसे हासिल करने के लिए हम विश्व-स्तरीय निर्यात बुनियादी ढांचा बनाने, भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने और डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में काम कर रहे देशों के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक भागीदार बनने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
इस कार्यक्रम के दौरान फिक्क ी-ईवाई की रिपोर्ट ‘टुवर्ड्स ए ग्रीन हाइड्रोजन इकोनॉमी: इंडियाज एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस एंड स्ट्रेटेजिक आउटलुक’ जारी की गई, जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन और उससे जुड़े उत्पादों के विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी निर्यातक बनने के लिए भारत के रोडमैप पर प्रकाश डाला गया है।













